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  1. जिंदगी और मौत 

     के बीच भी क्या कुछ है? यह सवाल जितना हमें उत्सुक करता है उतना ही वक्त-बेवक्त इस पर चर्चाओं का बाजार गर्म रहता है। जिंदगी और मौत के बीच के इसी अनुभव को नियर डेथ एक्सपीरियंस (एनडीई) कहा जाता है। कई जहां इसे भ्रम मानते हैं वहीं अभी तक सैकड़ों लोग अपने साथ ऐसा होने का एक्सपीरियंस कर चुके हैं। ताजातरीन घटना ऐसी है जिसमें दुनिया की नामी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक न्यूरो सर्जन ने इस एक्सपीरियंस की बात कही है। डॉक्टर एबेन अलेक्जेंडर ने अपनी नई किताब प्रूफ ऑफ हेवन में कहा है कि एक खास तरह की बीमारी की वजह से जब वह कोमा में चले गए तो उन्हें नियर डेथ एक्सपीरियंस हुआ। क्या होता है यह एक्सपीरियंस जानते हैं इसके बारे में :-

    बीच की घड़ी

     
    एनडीई यानी जिंदगी और मौत के बीच की वह घड़ी है जिसमें मौत से साक्षात्कार का अनुभव होता है। ऐसा लगता है मानो अपने आप शरीर से अलग होकर आकाश की ओर जा रहे हैं। इस स्थिति में लोग एक सुरंग और चमकीली रोशनी देखने का दावा करते हैं। यह स्थिति जबर्दस्त डर या फिर शांति पैदा करती है और अपने शरीर के धीरे-धीरे विलीन होने का आभास होता है।

    कब होता है अनुभव

     
    अभी तक एनडीई के जितने मामले सामने आए हैं उनमें देखा गया है कि जब किसी शख्स को क्लिनिकली डेड (जब सांस रुक जाए और शरीर में खून का संचार नहीं हो) घोषित कर दिया जाता है तो उसे यह अनुभव होता है।

    किसके शब्द

     
    माना जाता है कि नियर डेथ एक्सपीरियंस नाम अमेरिकी मनोवैज्ञानिक और डॉक्टर रेमंड मूडी ने दिया। उन्होंने मौत के बाद जिंदगी (लाइफ आफ्टर डेथ) और एनडीई पर कई किताबें लिखीं। लाइफ आफ्टर लाइफ उनकी प्रसिद्ध किताब है।

    सच क्या है

     
    और कई चीजों की तरह एनडीई की विश्वसनीयता पर भी सवाल खडे़ होते रहे हैं। लेकिन कई ऐसी चीजें हैं जो सोचने को मजबूर करती हैं। मसलन, सभी लोगों को एक ही तरह का एक्सपीरियंस क्यों होता है? कुछ अंधे लोगों ने भी बतौर विजुअल ऐसा देखने की बात कही है, इसका क्या?

    चर्चित उदाहरण
     

    अमेरिकी सिंगर और सॉन्गराइटर पाम रेनॉल्ड्स लॉरी ने 35 साल की उम्र में 1991 में एनडीई के अनुभव की बात कही। उस वक्त उनके दिमाग का ऑपरेशन हो रहा था।
    1990 में ऑस्ट्रेलियाई मीडिया टायकून केरी पैकर को हार्ट अटैक आया और उन्हें छह मिनट के लिए क्लिनिकली डेड घोषित कर दिया गया। बाद में उन्होंने एनडीई की बात बताई।
    अमेरिकी की प्रसिद्ध पर्यावरणविद्, संगीतकार और गीतकार किकी कार्टर को 1983 में नियर डेथ एक्सपीरियंस हुआ। मां की सलाह पर उन्होंने इस बारे में विस्तार से लिखा।
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