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  1. भुवनेश्वर। कटक के एक छोटे से टी-स्टॉल का मालिक गरीब बच्चों की मदद करत करते उनके लिए एक शिक्षक भी बन गया।हर सुबह चाय के ठेला चलाने वा प्रकाश राव कुछ गरीब बच्चों को दूध बेचता है जो उसके स्टॉल के करीब आते हैं। अगर यह 55 साल का चायवाला इस ओर कदम नहीं बढ़ाता तो शायद यह बच्चे कभी पढ़ ही नहीं पाते।

    प्रकाश को 11 कक्षा में छात्रवृत्ति के बाद भी पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी जिसके कारण वह शिक्षा की अहमियत जान चुका था। इसके कारण ही प्रकाश ने बस्ती में रहने वाले बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया गया। इस गांव के 2 किमी के आस पास 4 सरकारी स्कूल हैं पर ज्यादातर मां बाप बेहद गरीब परिवार से हैं और वह अपने बच्चों को इस कारण वहां नहीं भेज सकते।

    ऐसे बच्चों की मदद प्रकाश ने करी जिससे वह पास में ही अच्छी शिक्षा मुफ्त में ले पाएं।राव ने सभी बच्चों को कक्षा 3 तक पढ़ाता है और इसको पास करने वाले छात्रों को वह सरकारी स्कूल भेजने में भी मदद करता है।बस्ती में रहने वाली एक मां बी नागरातनम के मुताबिक स्कूल से बच्चों का मन पढ़ने में लग गया।इससे पहले सभी बच्चे आवारा घूमते रहते थे अब पढ़ाई में अपना ध्यान लगाकर वह अपना भविष्य बना रहे हैं।

    हालांकि स्कूल बनाने का यह सपना इतना आसान नहीं था। प्रकाश को किसी वित्तीय संस्थान से कोई मदद नहीं मिली और उसने अपने बल पर यह काम पूरा किया। स्कूल के लिए पूरे महीने के किराया 10,000 रुपए होता है जिसमें 4 शिक्षकों का वेतन अलग होता है। प्रकाश अपने टी स्टॉल से 20,000 रुपए का फायदा महीने में कमाता है और कभी किसी बिल के भुगतान में देरी नहीं करता।
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