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  1. बचपन से ही हम यही सुनते आ रहे थे कि एक वक्त में एक ही काम करो, एक साधे सब सधे, सब साधे सब जाए..दो नावों की सवारी में डूबने का खतरा रहता है..। शायद हमारे बुजुर्गो की इन बातों के पीछे यही सोच काम कर रही होगी कि किसी भी काम के अच्छे परिणाम के लिए एकाग्रता की जरूरत होती है। फिर वक्त के साथ जीवनशैली व्यस्त से व्यस्ततम होने लगी। सीमित समय और संसाधनों में बेहतर परिणाम हासिल करने के नए-नए तरीके ढूंढे जाने लगे।
    क्या है मल्टीटास्किंग
    दरअसल मल्टीटास्किंग शब्द कंप्यूटर इंजीनियररिंग के क्षेत्र से लिया गया है। 90 के दशक तक कंप्यूटर हमारी जीवनशैली का जरूरी हिस्सा बन चुका था। इसके बाद सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों ने यह सोचना शुरू किया कि अगर कंप्यूटर का माइक्रो प्रोसेसर एक ही वक्त में कई अलग-अलग तरह के कार्य करता है तो मानव मस्तिष्क ऐसा क्यों नहीं कर सकता? यही वह दौर था, जब पूरी दुनिया में मल्टीटास्किंग स्किल पर बहस छिड गई। मैनेजमेंट से जुडे कुछ लोगों का ऐसा मानना था कि इससे हमारे दिमाग की सक्रियता बढ जाएगी और कम समय में ज्यादा काम निबटाना संभव होगा, पर कुछ लोग इसके पक्ष में नहीं थे। उनका मानना था कि शुरुआत में भले ही इसके अच्छे परिणाम हासिल हों, लेकिन एक समय के बाद इसके कई नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे।
     
    वक्त की जरूरत
    आज मल्टीटास्किंग वक्त की जरूरत बनती जा रही है क्योंकि कडी प्रतिस्पर्धा के इस दौर में हर इंसान दूसरे से आगे निकलना चाहता है। प्रोफेशनल लाइफ में आगे बढने के लिए लोग यही चाहते हैं कि वे एक साथ ज्यादा से ज्यादा कार्यो को बेहतर ढंग से पूरा कर सकें। आपने नोटिस किया होगा कि एंटरटेनमेंट सेक्टर में कितना जबरदस्त बदलाव आया है। पहले फिल्मों के प्लेबैक सिंगर केवल गाना जानते थे, पर स्टेज परफॉर्मेस के दौरान आज के प्राय: सभी सिंगर्स गाने के साथ डांस भी सीख गए हैं। बात सिर्फ इतनी है कि चाहे सिंगर हो या इंजीनियर, हर इंसान को अपने मूल कार्य की प्रकृति से जुडे अन्य कार्यो को भी सीखने-समझने की कोशिश करनी चाहिए। यह उसकी प्रोफेशनल लाइफ के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है।
    जरूरी है निश्चित सीमा रेखा
    हाल ही में कुछ अमेरिकी कंपनियों द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि वहां काम कर रहे भारतीय मल्टीटास्किंग कार्यशैली अपनाने में सबसे आगे हैं। इसके अलावा सर्वेक्षणों से यह बात भी सामने आई है कि पुरुषों की तुलना में स्त्रियां अधिक तत्परता से मल्टीटास्किंग कार्यशैली अपनाती हैं, क्योंकि घरेलू कार्यो के अनुभवों से उन्हें इस बात का सही अंदाजा होता है कि कम समय में कई कार्यो को अच्छी तरह कैसे निबटाया जा सकता है। समय और ऊर्जा की बचत के लिए एक ही वक्त में कई काम करने में कोई बुराई नहीं है, पर ऐसा करते समय आपको कार्य की प्रकृति और गंभीरता पर जरूर विचार करना चाहिए। मिसाल के तौर पर अगर कंप्यूटर पर कोई बडी फाइल खुलने में ज्यादा वक्त लेती है तो इस बीच आप अपना जरूरी फोन कॉल निबटा लें। इससे समय की बचत होगी और एक साथ दो काम आसानी से पूरे हो जाएंगे, पर ऐसा करने से पहले आपको कार्य की प्रकृति को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। अगर आप बैंक के कैश काउंटर पर बैठते हैं तो कैश संभालने के अलावा किसी दूसरे काम के बारे में सोचना भी आपके लिए बहुत भारी पड सकता है।
    टाइम और स्किल मैनेजमेंट
    मल्टीटास्किंग कार्यशैली को ज्यादा फायदेमंद बनाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरत है-समय और प्रोफेशनल स्किल्स को सही ढंग से मैनेज करने की। अगर वक्त की कीमत पहचानते हुए दिन के एक-एक मिनट का सही इस्तेमाल किया जाए तो इससे एक वक्त में कई कार्यो को कुशलता से निबटाया जा सकता है। इसके लिए पूरे दिन की दिनचर्या में घंटों के हिसाब से अपने कार्यो की डेडलाइन तय करें। हो सकता है कि शुरुआत में आप निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा न कर पाएं, पर कुछ दिनों के अभ्यास से ही आपको खुद-ब-खुद फर्क नजर आएगा। आपको इस बात का सही अंदाजा होना चाहिए कि किसी एक कार्य में कितना समय खर्च होगा। फिर उसी हिसाब से दो कार्यो के बीच के खाली समय का इस्तेमाल छोटे कार्यो के लिए कर सकते हैं।
     
    न खोएं अपनी पहचान
    चाहे क्रिकेट का मैदान हो या आपका कार्यस्थल, ऑलराउंडर होना अच्छी बात है, पर अगर आप अच्छे बल्लेबाज हैं तो चाहे कितनी ही अच्छी फील्डिंग क्यों न करते हों, आपको अपनी बैटिंग सुधारने के लिए हमेशा प्रयासरत रहना चाहिए। अति उत्साह में आकर आप अपनी प्राथमिकताएं न भूलें। जो कार्य सबसे जरूरी हो उस पर पहले ध्यान दें और उसे पूरा करने के बाद ही कोई नया काम शुरू करें। अगर बीच में कोई नया काम करना भी पडे तो उसे पूरा करके तुरंत अपने मुख्य काम में जुट जाएं। 

    अंग्रेजी में एक कहावत है- जैक ऑफ ऑल ट्रेड्स, मास्टर ऑफ नन अर्थात कुछ लोग सभी कार्यो के बारे में थोडा-थोडा जरूर जानते हैं, लेकिन किसी भी एक काम में उनकी विशेषज्ञता नहीं होती। मल्टीटास्किंग कार्यशैली में भी इसी बात का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इसलिए आप अपने फील्ड से संबंधित नए प्रोफेशनल स्किल्स जरूर सीखें पर किसी एक कार्य में ऐसी दक्षता हासिल करने की कोशिश करें, जो आपकी खास पहचान बन जाए।
    मल्टीटास्किंग कार्यशैली की खूबियों और खामियों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि कार्य की प्रकृति और गंभीरता को समझते हुए अगर इसे संतुलित ढंग से अपनाया जाए तो इसका अधिकतम लाभ हासिल किया जा सकता है।
    मल्टीटास्किंग कार्यशैली
    पायदे 1. कम समय में ज्यादा कार्य होता है।
    2. कार्यक्षमता बढती है।
    3. समय और संसाधनों की बचत होती है और उनका इस्तेमाल दूसरे उत्पादक कार्यो के लिए किया जा सकता है।
    4. कम समय में लक्ष्य हासिल करने से कार्य करने वाले व्यक्ति के मन में उत्साह का संचार होता है और उसका आत्मविश्वास भी बढता है।
    5. इसे अपनाने से प्रोफेशनल स्किल्स में इजाफा होता है।
    नुकसान
    1. शुरुआती दौर में मल्टीटास्किंग कार्यशैली के फायदे जरूर नजर आते हैं, पर इसे लंबे समय तक अपनाने के बाद रिजल्ट की क्वॉलिटी और कार्यक्षमता में गिरावट आने लगती है। 


    2. जब किसी को मल्टीटास्टिंग कार्यशैली की आदत पड जाती है तो वह अनजाने में इसका इस्तेमाल अनुत्पादक और व्यक्तिगत कार्यो के लिए भी करने लगता है। मसलन कंप्यूटर पर काम करते हुए चैंटिंग और फोन पर बातें करना आदि।

    3. इसे अपनाने वाले लोगों की एकाग्रता में कमी आती है और नतीजतन वे एक साथ कई कार्यो को तो निबटा सकते हैं, पर उनकी कार्यशैली से परफेक्शन खत्म होने लगता है।

    4. अब तक किए गए किए अनुसंधानों से यह तथ्य सामने आया है कि मल्टीटास्किंग होने की वजह से आजकल लोगों में शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस की समस्या बहुत ज्यादा देखने को मिल रही है।

    5. मल्टीटास्किंग कार्यशैली अपनाने वाले लोगों की ऐसी आदत बन जाती है कि वे केवल प्रोफेशनल ही नहीं, बल्कि पर्सनल लाइफ में भी इसे अपनाने लग जाते हैं। मसलन, ब"ो को पढाते समय मोबाइल पर बातें करना, टीवी देखते हुए खाना आदि। नतीजतन स्वास्थ्य और रिश्तों पर भी इसका नकारात्मक असर दिखाई देने लगता है।
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