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लिखिए अपनी भाषा में

  1. पुदीने को गर्मी और बरसात की संजीवनी बूटी कहा गया है, स्वाद, सौन्दर्य
    और सुगंध का ऐसा संगम बहुत कम पौधों में दखने को मिलता है। इसके पौधे की
    आयु बहुत लम्बी होती है। पुदीना मेंथा वंश से संबंधित एक बारहमासी,
    खुशबूदार जड़ी है। पिपरमिंट और पुदीना एक ही जाति के होने पर भी अलग अलग
    प्रजातियों के पौधे हैं।

    पुदीना को गुणों की खान कहें, तो अतिशयोक्ति न होगी, यह विटामिन-ए से
    भरपूर होता है। इसका स्वाद व सुगंध भोजन को लजीज बनाता है। पुदीना को
    घरों में उपलब्ध छोटी-सी जगह, जैसे-गमलों में आसानी से उगाया जा सकता है।
    पुदीने की चटनी स्वादिष्ट तो होती ही है, सेहत के लिए भी फायदेमंद है।
    पुदीने का अर्क दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

    पुदीना पाचक तथा कफ, वायु, उल्टी, पेट दर्द और कृमि का नाशक है। यूनानी
    मत के अनुसार पुदीना अमाशय को शक्ति देने वाला, पसीना लाने में सहायक
    बताया गया है। यह मासिक धर्म के अवरोध को भी दूर करता है।

    हैजे में पुदीना, प्याज का रस, नींबू का रस बराबर-बराबर मात्रा में मिला
    कर पिलाने से लाभ होता है, उल्टी-दस्त, हैजा हो, तो आधा कप पुदीने का रस
    हर दो घंटे पर रोगी को पिलाएं।

    अजीर्ण होने पर पुदीने का रस पानी में मिला कर पीने से लाभ होता है।

    पेट दर्द और अरुचि में तीन ग्राम पुदीने के रस में जीरा, हींग, काली
    मिर्च, कुछ नमक डाल कर गर्म करके पीने से लाभ होता है।

    प्रसव के समय पुदीने का रस पिलाने से प्रसव आसानी से हो जाता है।

    बिच्छू के दंश स्थान पर पुदीने का अर्क लगाने से यह विष को खींच लेता है
    और दर्द को भी शांत करता है।

    पुदीने को पानी में उबाल कर थोड़ी चीनी मिला कर उसे गरम-गरम चाय की तरह
    पीने से बुखार दूर होता है, बुखार के कारण आई दुर्बलता भी दूर होती है।

    धनिया, सौंफ व जीरा बराबर-बराबर लेकर भिगो कर पीस लें, फिर 100 ग्राम
    पानी मिला कर छान लें, इसमें पुदीने का अर्क मिला कर पीने से उल्टी का
    शमन होता है।

    यदि मुंह से दुर्गध आती है, तो पुदीना पीसकर एक गिलास पानी में घोल
    लीजिए। इस पुदीना-मिश्रित पानी से दिन भर में दो-तीन बार कुल्ले करते
    रहने से मुख की दुर्गध दूर हो जाती है।

    पुदीने की पत्तियों को सुखाकर बनाए गए चूर्ण को मंजन की तरह प्रयोग करने
    से मुख की दुर्गंध दूर होती है और मसूड़े मज़बूत होते हैं।

    पुदीने में फेफड़ों में जमा हुए बलगम को छांट-छांट कर शरीर से बाहर कर
    देने का विलक्षण गुण पाया जाता है। इसी कारण कफ से होने वाली खांसी,
    हिचकी एवं दमा को यह दूर करता है। पुदीने को सुखाकर, बारीक कपड़छन चूर्ण
    तैयार कर लें। यह चूर्ण एक चाय चम्मच भर मात्रा में दिन में दो बार पानी
    के साथ सेवन करें। पुदीने का अर्क इन रोगों पर विशेष प्रभावी है।
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