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  1. देश के सबसे 10 रईस औद्योगिक परिवारों में शुमार महिंद्रा एंड महिंद्रा
    फैमिली के बेटे आनंद महिंद्रा औद्योगिक जगत के आज चमकते हुए सितारे हैं।
    आपको यह जानकर हैरानी होगी जब महिंद्रा फैमिली का यह बेटा कॉलेज में
    कट्टर कम्युनिस्ट बन गया हो तो परिवार को उससे क्या उम्मीदें हो सकती
    थीं। इस परिवार की चिंता यहीं नहीं खत्म हुई, परिवार यह भी जानता था कि
    उनका यह बेटा परिवार के हजारों करोड़ के साम्राज्य को संभालने की बजाय
    फिल्में बनाने में अधिक रुचि रखता है। लेकिन बदलते वक्त के साथ आनंद ने
    आखिर अपने परिवारके काम में हाथ बंटाना शुरू किया और महज कुछ सालों में
    ऐसा इतिहास रचा कि देश ही नहीं विदेशों में महिंद्रा समूह की धूम मच गई।
    महज 3,212 करोड़ रुपये की मार्केट कैपिटल वाली कंपनी समूह के एमडी के रूप
    में काम संभालने वाले आंनद महिंद्रा ने अपने ग्रुप को आज 86,412 करोड़
    रुपये (15.4 बिलियन डॉलर) के साम्राज्य में तब्दील कर दिया है।

    फोब्र्स ने उन्हें भारत के 68 वें धनी व्यक्ति के रूप में अपनी सूची में
    शामिल किया है। इसके अनुसार उनकी 4,840 करोड़ रुपये निजी संपत्ति है।
    आनंद महिंद्रा आज देश के बड़े बिजनेस आइकान के रूप में के प्रेरणा बन गए
    हैं। उनका आज 58 वां जन्म दिन है। इस मौके पर प्रस्तुत है उनसे जुड़ी
    रोचक और प्रेरक सामग्री।

    आनंद महिंद्रा का जन्म 1 मई 1955 को मुंबई में हुआ था। वह हरीश महिंद्र
    और इंदिरा महिंद्रा के बेटे हैं। एम एंड एम ग्रुप के संस्थापक केसी
    महिंद्रा की तीन बेटियां में से दूसरी बेटी इंदिरा ने पारिवारिक बिजनेस
    में रुचि दिखाई। उन्हीं के बेटे हैं आनंद महिंद्रा। धनी परिवार का यह
    बेटा अपनी शिक्षा के लिए हावर्ड कॉलेज कैम्ब्रिज मैसाच्युसेट से
    ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर
    डिग्री हार्वड स्कूल, बोस्टन से की। आनंद ने विदेश में पढा़ई करने के
    पहले मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर में करीब डेढ़ साल तक पढ़ाई की
    थी। आनंद पढऩे में बेहद प्रतिभाशाली थे। 1972 में उन्होंने जब हार्वर्ड
    के लिए आवेदन किया तो उन्हें पूरी स्कॉलशिप (12000 डॉलर) मिले पूरे चार
    साल तक। आनंद एक ट्रक में घूमने के लिए सवार हो गए, लेकिन अमेरिकी पुलिस
    ने इस ट्रक को रोककर तलाश ली तो इसमे नशीला पदार्थ निकला, जिसके लिए ट्रक
    ड्राइवर जिम्मेदार था। पुलिस सच्चाई निकाली और आनंद नशीले पदार्थ की
    तस्करी के मामले में फंसने से बाल-बाल बचे।

    आंनद के बारे में शायद यह बहुत कम लोगों को पता होगा कि वह जब हावर्ड में
    पढ़ रहे थे तो उन्होंने फिल्म मेकिंग में पढ़ाई। उन्हें फोटोग्राफी बेहद
    पसंद है। आंनद फुर्सत के पलों में गम भरे गीत सुनना पंसद करते हैं। आनंद
    ने जब बिजनेस संभाला था, तब उन्हें टेनिस खेलना पसंद था, लेकिन अब वह
    सबसे अधिक सेलिंग में रुचि रखते हैं। आनंद सोशल मीडिया की लोकप्रिय साइट
    ट्विटर पर भी सक्रिय हैं और 35,000 से अधिक उनके फालोअर्स हैं। वह दिन
    में दो बार ट्वीट जरूर करते हैं।

    आनंद महिंद्रा ने अनुराधा के साथ शादी की है। अनुराधा पेशे से पत्रकार
    हैं और वह फेमस मैग्जीन वर्व और मैंन्स वल्र्ड की एडिटर हैं। रोलिंग
    स्टोन इंडिया की भी संपादक हैं।

    आनंद को दो बेटियां है। एक बार आनंद महिंद्रा ड्रग तस्करी के एक मामले
    में फंसने से बाल-बाल बचे थे।

    आनंद महिंद्रा के मित्रों में देश के सबसे धनी व्यक्ति मुकेश अंबानी हैं।
    दोनों के घरेलू रिश्ते हैं और अक्सर एक-दूसरे से मिलते हैं।

    आंनद महिंद्रा विदेश से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद 1981 में भारत आए और
    महिंद्रा की यूजिन स्टील कंपनी (एमयूएससीओ) ज्वाइन किया। वह भी फाइनेंस
    डायरेक्टर के एक एक्जीक्यूटिव अस्टिट के रूप में। लेकिन महज कुछ वर्षो
    बाद 1989 में वह इस लीडिंग ग्रुप के प्रेसीडेंट बन गए जब उन्होंने रियल
    इस्टेट और हॉस्पीटैलिटी के क्षेत्र में अपनी कंपनी का विस्तार किया।
    उन्होंने 1997 में बिजनेस के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में जिम्मेदारी
    संभाली और 2003 में वाइस चेयरमैन बन गए। इसके साथ ही उन्होंने
    को-प्रोमोटर बन गए महिंद्रा फाइनेंस लि. और इसे 2003 में बैंक के रूप में
    बदल दिया। आज कोटक महिंद्रा देश प्रमुख निजी बैंकों में से एक है।

    2002 में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने एक स्वादेशी एसयूवी स्कॉर्पियो विकसित
    की, जिसने महिंद्रा समूह को न केवल पूरे देश में बल्कि पूरे विश्व में
    पहचान दी।

    महिंद्रा एंड महिंद्रा ने पिछले साल एक्सयूवी 500 एसयूवी लॉन्च की है
    और अब तक इसकी 36,000 यूनिट बेंच ली हैं। आनंद के नेतृत्व में महिंद्रा
    ग्रुप ने बड़े अधिग्रहण किए, जिसमें 2009 में सत्यम कंप्यूटर, रेवा
    इलेक्ट्रिक वेहिकल्स और 2010 में एस सानयोंग मोटर्स कंपनी का अधिग्रहण
    शामिल है। हालाकि आनंद जगुआर की अधिग्रहण में रतन टाटा से पीछे रह गए थे,
    लेकिन आज वही टाटा जो भारत में कार निर्माताओं में सबसे आगे थे, उन्होंने
    ने ही स्वीकार किया कि महिंद्रा ने हमे कार के मामले में पीछे छोड़ दिया
    है।

    आनंद महिंद्रा को 2004 में नाइट ऑफ द ऑर्डर मेरिट का पुरस्कार फ्रांस के
    राष्ट्रपति ने प्रदान किया।

    उन्हें 2005 में पर्सन ऑफ द इयर फ्रांस मॉनीटर एंड लीडरशिप अवॉर्ड
    अमेरिकन इंडियन सोसाइटी द्वारा प्रदान किया गया।

    ये हैं महिंद्रा एंड महिंद्रा का विशाल सामाज्य :
    महिंद्रा एंड महिंद्रा ने 1997 से तेजी से सफलता की ओर बढ़ी जब आनंद
    महिंद्रा ने 3,212 करोड़ रुपये की मार्केट कैपिटल वाली कंपनी के एमडी के
    रूप में कार्यभार संभाला था। आज महिंद्रा एंड महिंद्रा की मुख्य कंपनियों
    और उनकी बाजारगत पूंजी कुछ इस तरह से है।
    महिंद्रा एं महिंद्रा : 40,350 करोड़ रुपये।
    महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनांनशियल सर्विसेस : 6,531 करोड़ रुपये।
    टेक महिंद्रा : 8,795 करोड़ रुपये।
    महिंद्रा सत्यम : 9,173 करोड़ रुपये।
    महिंद्रा यूजिन स्टील : 156 करोड़ रुपये।
    महिंद्रा होलीडेज एंड रिसार्ट : 2,281 करोड़ रुपये।
    महिंद्रा लाइफ स्पेस डेवलपर्स : 1,272 करोड़ रुपये।
    कोटक महिंद्रा बैंक : 40,772 करोड़ रुपये।

    आनंद ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के ह्यूमिनिटीज सेंटर को अपनी मां का नाम
    पर रखने के लिए 10 मिलियन डॉलर (55 करोड़ रुपये) दान में दिए।

    महिंद्र एंड मोहम्मद से महिंद्रा एंड महिद्रा का ऐसा है सफर :
    1945 में जगदीश चंद्र महिंद्रा, कैलास चंद्र महिंद्रा बंधुओं ने मलिक
    गुलाम मुहम्मद के साथ मिलकर महिंद्रा एंड मोहम्मद की शुरुआत की थी।
    महिंद्रा बंधु टाटा स्टील में सीनियर सेल्स ऑफिसर थे। लेकिन 1947 में
    भारत का विभाजन होने के बाद मलिक मोहम्मद पाकिस्तान चले गए और वह वहां के
    पहले वित्त मंत्री बने। इसके बाद यह कंपीन महिंद्रा एंड महिंद्रा बन गई।
    कैलास चंद्र महिंद्रा के बेटे केसब महिंद्रा ने इस फर्म को इसी समय
    ज्वाइन किया। 1951 में कैलास चंद्र महिंद्रा ने भाई जगदीश चंद्र की मौत
    होने के बाद चेयरमैन का पद संभाला। इसके बाद 1963 में केसब महिंद्रा ने
    कैलास चंद्र की मौत के बाद कारोबार संभाला। आंनद के पिता हरीश महिंद्रा
    ने 1964 में यूजिन स्टील की स्थापना की थी। आनंद को डिप्ट एमडी के तौर पर
    महिंद्रा एंड महिंद्रा में 1991 में जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद 2002 में
    एडी और 2012 में एमएंडएम का चेयरमैन का कार्यभार सौंपा गया।
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