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  1. क्या कभी आपने google.com या pipl.com पर अपना नाम टाइप करके देखा है! आप
    हैरान रह जाएंगे कि आपके बारे में कितनी सारी जानकारी इंटरनेट पर मौजूद
    है।

    इसमें आपकी फोटो, ईमेल एड्रेस, फोन नबंर और परिवार की जानकारी भी हो सकती
    है। यह खतरनाक है और आने वाली किसी मुश्किल का संकेत भी। इसलिए जरूरत है
    इंटरनेट पर काम करते हुए सावधान रहने की।

    सोशल मीडिया प्रोफाइल न भरें
    जितनी ज्यादा सूचना आप ऑनलाइन शेयर करेंगे उतना ही किसी के लिए आप तक
    पहुंचना आसान हो जाएगा, इसलिए ऐसा न करें। अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर
    एक नजर डालें और दी गई जानकारी सीमित करें।

    जिन लोगों को आपका नाम, जन्मदिन, ईमेल एड्रेस और फोन नंबर जानने की जरूरत
    है, वह इस बारे में जानते हैं।

    हार्डवेयर पासवर्ड भी जरूरी
    मामला पीसी, लैपटॉप का हो या फिर मोबाइल का, अपनी डिवाइस में पासवर्ड
    जरूर सेट करें। डिवाइस के खो जाने या गलती से कहीं छूट जाने की स्थिति
    में यह पासवर्ड आपकी प्राइवेसी की सुरक्षा करेगा।

    पासवर्ड के अलावा ऐसे एप भी इंस्टॉल करें जो आपकी डिवाइस के खोने पर उसकी
    लोकेशन का पता लगा सकें। यह भी ध्यान रखें कि आपका कंप्यूटर और मोबाइल
    डिवाइसेज एंटी-मालवेअर एप्स और सॉफ्टवेयर से लोडिड हों।

    प्राइवेट ब्राउजिंग का इस्तेमाल करें
    यदि आप नहीं चाहते कि कोई भी आपके कंप्यूटर तक पहुंच बनाकर यह देखे कि आप
    ऑनलाइन क्या सर्फ कर रहे हैं तो 'प्राइवेट ब्राउजिंग' के ऑप्शन को एनेबल
    करें। यह सेटिंग सभी वेबब्राउजर में उपलब्ध होती है। यह कुकीज, टेम्परेरी
    फाइल और आपकी ब्राउजिंग हिस्ट्री को आपके विंडो क्लोज करने के बाद डिलीट
    कर देता है।

    पासवर्ड पर पकड़
    यह काफी मुश्किल है कि आप अपनी दर्जन भर ऑनलाइन सर्विसेज के लिए अलग-अलग
    पासवर्ड का इस्तेमाल करें और उन्हें याद रखें। इसलिए ज्यादातर लोग एक ही
    पासवर्ड का इस्तेमाल करते हैं। इसके साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि अगर
    फिशिंग अटैक या किसी और तरीके से किसी के हाथ आपका पासवर्ड लग गया तो वह
    आपके सभी अकाउंट्स तक पहुंच सकता है और आपके लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है।

    इस परेशानी से बचने के लिए पासवर्ड मैनेजर का इस्तेमाल करें। इसके लिए
    LAstPass एक अच्छा विकल्प है, जो पासवर्ड मैनेज करने का काम करता है।

    टू-फैक्टर ऑथेंटिफिकेशन
    आप अपने फेसबुक, गूगल, ड्रॉपबॉक्स, माइक्रोसॉफ्ट, ट्विटर और अन्य
    अकाउंट्स को टू-फैक्टर ऑथेंटिफिकेशन से लॉक कर सकते हैं। इसका मतलब यह है
    कि जब आप लॉग इन करते हैं तो आपको एक स्पेशल कोड एंटर करने की जरूरत होती
    है, जो कि वह साइट आपके फोन पर मैसेज के द्वारा भेजती है।

    कुछ सर्विसेज में इसकी जरूरत हर बार लॉग इन करते वक्त होती है और कुछ में
    सिर्फ तब, जब आप नया डिवाइस या वेब ब्राउजर इस्तेमाल करते हैं।

    गूगल अलर्ट सेट करें
    यह एक आसान तरीका है वेब की दुनिया में हो रही आपसे जुड़ी बातों को जानने
    का। इसके लिए आपको सिर्फ गूगल को यह बताना कि आप किन चीजों पर नजर रखना
    चाहते हैं। जब बात अपनी प्राइवेसी की है तो आप अपना नाम दर्ज कर सकते
    हैं। इसके अलावा जिन वेब पेज या ब्लॉग्स पर आप नजर रखना चाहते हैं उनके
    बारे में गूगल को बताकर भी अलर्ट सेट कर सकते हैं।

    पैसे देकर करें शॉपिंग
    बिजनेस इन्साइडर नामक एक वेबसाइट की मानें तो क्रेडिट कार्ड कंपनियां
    आपके द्वारा खरीदे जाने वाले सामान की जानकारी एडवरटाइजर्स को बेचती हैं।
    यदि आप नहीं चाहते कि ऐसा हो तो शॉपिंग करने के लिए पुराने तरीके का ही
    इस्तेमाल करें। यानी नगद दें और सामान लें।


    सोशल नेटवर्क एक्टिविटी को प्राइवेट रखें
    फेसबुक सेटिंग चेक करें और वहां अपने दोस्तों को ही अपनी एक्टिविटी से
    जुड़ने की इजाजत दें। ऊपर की ओर दाईं तरफ बने प्राइवेसी सेटिंग के विकल्प
    पर जाएं और वहां 'हू कैन सी माई स्टफ' पर जाकर विकल्प सेट करें। ट्विटर
    के लिए भी सेटिंग विकल्प पर जाएं। यहां जाकर आप हर तरह की प्राइवेसी
    सेटिंग कर सकते हैं।

    मसलन उस बॉक्स के बारे में जो ट्विटर को यह अनुमति देता है कि वह आपकी
    ट्वीट्स के साथ आपकी लोकेशन भी दिखाए या फिर यह कि आपके ट्वीट सिर्फ वही
    लोग देख पाएं, जिन्हें आपने अनुमति दी है। इसी तरह गूगल + पर भी आप
    सेटिंग्स में जाकर यह तय कर सकते हैं कि आपसे कौन बात कर सकता है और आपके
    पोस्ट्स पर कौन कमेंट कर सकता है। इस तरह आप सोशल नेटवर्क से जुड़े
    रहेंगे, वो भी सुरक्षा के साथ।

    इंटरनेट की दुनिया में घूमते हुए कहीं आप अपनी प्राइवेसी को तो खतरे में
    नहीं डाल रहे? यह सवाल कुछ लोगों को हैरान कर सकता है, मगर सच यही है कि
    हर बात के लिए इंटरनेट और सोशल नेटवर्किंग पर बढ़ती निर्भरता के कारण
    इंटरनेट यूजर की निजी जानकारी बेहद आसानी से सबके पास जा रही है।

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