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लिखिए अपनी भाषा में

  1. बठिंडा की नंदिनी की इच्छा व उनके परिवार के विशेष सहयोग से नौ साल की
    उम्र में ही नंदिनी ने अपना नाम विश्व रिकॉर्ड में दर्ज करा लिया था।
    स्मरण शक्ति की बदौलत नंदिनी का नाम यूके की वर्ल्ड रिकॉर्ड बुक में भी
    शुमार है। इतना ही नहीं, आरबी डीएवी स्कूल की नौंवी कक्षा की छात्रा
    नंदिनी पर कोरिया की एजुकेशन ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम ने फिल्म तैयार की है।
    इसको पूरे विश्व में छात्रों को मोटीवेट करने के लिए दिखाया गया।
    नंदिनी के पिता बब्बू ने गरीबी में रहते हुए भी अपनी बेटी के लिए अच्छा
    माहौल तैयार किया और उसकी सहायता की। उसके पिता ड्राइक्लीनिंग का काम
    करते हैं। नंदिनी ने बताया कि उसने अपने पिता के सामने कुछ कर गुजरने की
    इच्छा जाहिर की और पिता ने उससे वादा किया कि भले ही वह आर्थिक तौर पर
    गरीब हैं, लेकिन वह अपनी बेटी के सपने को साकार करने के लिए पूरा सहयोग
    देंगे।

    पिता की हल्लाशेरी ने नंदिनी के हौसले बुलंद कर दिए। जब उसने 9 साल की
    उम्र में विश्व रिकॉर्ड कायम किया तो नंदिनी से ज्यादा खुशी उनके पिता को
    थी। इसके बाद समाज ने भी उनका सत्कार किया और आर्थिक तौर पर सहायता भी
    दी। 2013 में गणतंत्र दिवस के मौके पर नंदिनी को डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह
    बादल द्वारा विशेष तौर पर सम्मानित किया गया। धीयां दी लोहड़ी के मौके पर
    सांसद हरसिमरत कौर बादल द्वारा भी नंदिनी को विशेष तौर पर सम्मानित किया
    जा चुका है। नंदिनी ने एबेकस प्रशिक्षण लेकर प्रदेश स्तर के पहले मुकाबले
    में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। ब्रह्मांड के प्लेनेट्स को पृथ्वी के
    चुंबकीय पुल से जोड़कर जीवन की संभावनाएं पैदा करने को वह अपना लक्ष्य
    मानती है। उसने कहा कि इस काम में समय तो जरूर लग सकता है, लेकिन जब वह
    सक्षम हो जाएगी तो सुनसान प्लेनेट्स पर जिंदगी की संभावनाएं पैदा कर
    देगी। उसने आगे कहा कि फिलहाल वह आईएएस अधिकारी बनना चाहती है।

    माता-पिता बेटों की तरह बेटियों को दें मौका

    "मैं अपील करती हूं कि सभी माता-पिता अपने बेटियों को बेटों की तरह हर
    अवसर प्रदान कराएं। बेटी को खुद को साबित करने का मौका दें। मैं दावे में
    साफ कह सकती हूं कि बेटी ये साबित कर देगी कि वह बेटे से किसी भी तरह कम
    नहीं है। बेटी को अनदेखा न करें, उसकी भावना को समझें और खुले आसमान में
    उड़ने का मौका दें।"- नंदिनी, 9वीं की छात्रा।
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