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15 Most Bizarre Men
Sunday, May 22, 2016
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आसमान में की सगाई
Thursday, May 8, 2014
आसमान में की सगाई
पटना। अब मेट्रोपॉलिटन शहरों की तरह पटना के युवा जोड़े भी आसमान में सगाई करने लगे हैं। रविवार को चार्टर्ड विमान से दो युगल नौ हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंचे और एक दूसरे को अंगूठी पहनाकर सगाई की रस्म पूरी की। नीचे आने पर परिजनों ने फूलों से और मिठाई खिलाकर इनका स्वागत किया।
युगल अभिषेक-प्रिया और संजीव-कल्याणी ने बताया कि एक घंटे हवाई का सफर बहुत रोचक रहा। हमने एक दूसरे को अंगूठी पहनाते हुए साथ जीने-मरने का संकल्प लिया। कल्याणी और प्रिया ने बताया कि सपने में भी नहीं सोचा था कि आकाश में सगाई होगी।
कल्याणी एमबीए हैं। वह अहमदाबाद में नौकरी कर रही थी। छोड़कर घर आ गई हैं। उनका विवाह मुंबई में सॉफ्टवेयर इंजीनियर संजीव कुमार सिंह के साथ तय है। चार्टर्ड विमान कंपनी ने एक घंटे की बुकिंग पर 65 हजार और दो घंटे की बुकिंग पर 1.30 लाख रुपये कीमत तय की है।Posted by Unknown Labels: अजब हैं लोग, अजब-गजब | 0 comments | Email This BlogThis! Share to X Share to Facebook |
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अजब हैं लोग थोड़ी सी परेशानी से डरते हैं
Tuesday, February 18, 2014
अजब हैं लोग थोड़ी सी परेशानी से डरते हैं
कभी सूखे से डरते हैं, कभी पानी से डरते हैं
तब उल्टी बात का मतलब समझने वाले होते थे
समय बदला, कबीर अब अपनी ही बानी डरते हैं
पुराने वक़्त में सुलतान ख़ुद हैरान करते थे
नये सुलतान हम लोगों की हैरानी से डरते हैं
हमारे दौर में शैतान हम से हार जाता था
मगर इस दौर के बच्चे तो शैतानी से डरते हैं
तमंचा ,अपहरण, बदनामियाँ, मौसम, ख़बर, कालिख़
बहादुर लोग भी अब कितनी आसानी से डरते हैं
न जाने कब से जन्नत के मज़े बतला रहा हूँ मैं
मगर कम-अक़्ल बकरे हैं कि कुर्बानी से डरते हैं
-सर्वत एम जमाल
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एक ही पेड़ पर उगे आलू-टमाटर
Saturday, September 28, 2013
लंदन। एक ही पेड़ पर आलू और टमाटर लगे देखकर चौंकिए नहीं। शाकाहारी लोगों
के लिए ये खोज किसी वरदान से कम नहीं है। कृषि वैज्ञानिकों ने एक ऐसा
हाईब्रिड पौधा तैयार किया है जिसमें एक ही समय में लाल रसीले टमाटर और
आलू दोनों लगते हैं। इसे नाम दिया गया है टॉमटैटो।
इप्सविच की हार्टिकल्चर कंपनी थांपसन एंड मारगन ने ब्रिटेन के बाजार के
लिए तैयार किए इस हाईब्रिड पौधे के जीन में कोई परिवर्तन नहीं किया है।
इसलिए ये दोनों सब्जियां सामान्य आलू और टमाटर जितनी ही स्वादिष्ट और
पौष्टिक हैं। हालांकि कंपनी का कहना है कि इस पौधे के टमाटर दुकान पर
बिकने वाले टमाटरों से अधिक स्वादिष्ट होंगे। रायल होर्टीकल्चर सोसाइटी
(आरएचएस) के गाय बारटर ने बताया कि प्रयोग के तौर पर ब्रिटेन में भी ऐसे
पौधे तैयार किए गए हैं। लेकिन वाणिज्यिक उपयोग के लिहाज से इतने बड़े
पैमाने पर आलू-टमाटर की एक ही पौधे से खेती पहली बार की गई है। ऐसी संकर
प्रजातियों के कई पौधों को ग्राफ्टिंग की तकनीक से तैयार किया गया है।
हालांकि ये तकनीक पुरानी है पर इससे तैयार पौधों पर उगने वाले फलों और
सब्जियों का स्वाद अच्छा नहीं होता था। कंपनी के निदेशक पॉल हानसोर्ड ने
दावा किया कि इसके टमाटरों का स्वाद सामान्य टमाटरों से भी अच्छा है। इस
पौध पर पिछले एक दशक से काम किया जा रहा है। ये लक्ष्य हासिल करना बहुत
ही मुश्किल रहा चूंकि टमाटर और आलू के तने दोनों ही समान रूप से पतले
होने चाहिए थे। ये बहुत ही उच्च प्रशिक्षण से अंजाम दी गई तकनीक है। एक
ही गमले में उगे टमाटर और आलू पर पैनी नजर रखी गई। ताकि आलू का विकास भी
सही तरीके से हो।
कंपनी का कहना है कि पिछले मौसम से ही वह एक साथ पौधे से टमाटर और आलू एक
साथ उगा रहे हैं। अब दोनों ही सब्जियां पककर पौधे से तोड़ने के लिए तैयार
हैं। उद्देश्य शक्ति और लचीलापन प्रदान करता है कि एक और की जड़ों के साथ
फूल या फलने के गुणों का गठबंधन है। इसतरह आलू और टमाटर के रूप में
अधिकांश पौधों अपनी ही प्रजाति के भीतर संकर किए जाने की जरूरत है, लेकिन
यह कभी-कभी एक भिन्न रूप लेकर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ का जरिया भी
बन सकता है। इसलिए सावधानी बहुत जरूरी है।
बहुत से लोग अपने बागानों में कम स्थान के कारण ये तकनीक अपना कर ऐसे ही
हरी सब्जियां और फल अपने किचन गार्ड या लान में उगाना चाहेंगे। इसीतरह का
उत्पाद पुटैटो टाम नाम से इसी हफ्ते न्यूजीलैंड में भी एक बगीचे में
उगाया गया है
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भारत में सूचीबद्ध कंपनियों में सन टीवी के प्रमोटर कलानिधि मारन तथा
उनकी पत्नी कावेरी बीते वित्त वर्ष में सबसे ज्यादा वेतन पैकेज पाने वाले
कार्यकारियों में हैं. इन दोनों में प्रत्येक का सालाना वेतन पैकेज 56.25
करोड़ रुपये रहा.
इस सूची में इन दोनों ने जिंदल स्टील एवं पावर के सीएमडी नवीन जिंदल को
भी पीछे छोड़ दिया है. हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था में सुस्ती का असर
तीनों के वेतन पैकेज पर दिख रहा है. तीनों ने पिछले वित्त वर्ष की तुलना
में इस बार कम पैकेज लिया. सूची में तीसरे स्थान पर रहे जिंदल का वेतन
पैकेज 2012-13 में 54.98 करोड़ रुपये रहा, 2011-12 में उन्हें 73.42
करोड़ रुपये का पैकेज मिला था. इसी तरह मारन दंपति के पैकेज में एक फीसदी
की कटौती हुई.
दिलचस्प तथ्य यह है कि इस सूची में शीर्ष स्थान पर मारन और जिंदल पिछले
चार साल से बने हुए हैं. मारन 2009-10 और 2012-13 में सूची में शीर्ष में
रहे, वहीं जिंदल 2010-11 और 2011-12 में सूची में शीर्ष पर रहे.
आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला को उनकी पांच सूचीबद्ध
कंपनियों ने 49.62 करोड़ रुपये का वेतन पैकेज दिया और वह सूची में पांचवे
स्थान पर रहे. हीरो मोटो कार्प के बृजमोहन लाल मुंजाल को 32.72 करोड़
रुपये का वेतन पैकेज मिला. पवन मुंजाल को 32.80 करोड़ रुपये और सुनीलकांत
मुंजाल को 31.51 करोड़ रुपये का वेतन पैकेज मिला.
बीते वित्त वर्ष में सबसे ज्यादा वेतन पैकेज पाने वाले 10 शीर्ष
कार्यकारियों का पैकेज मात्र 4 फीसदी यानी 15 करोड़ रुपये बढ़ा और यह 402
करोड़ रुपये रहा.
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कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है या कुछ पाने के लिए कुछ करना पड़ता है!
Tuesday, July 30, 2013
कल्याण रमन श्रीनिवासन तमिलनाडु के छोटे से गांव में पला-बढ़ा है। जब वह
15 साल का था, उसके पिता का निधन हो गया था। वह, उसका भाई और मां सिर्फ
420 रु. मासिक की पेंशन पर निर्भर थे। उनको झोपड़ी में रहना पड़ा। उसमें
न बिजली थी। न ही पानी।
वह स्ट्रीट लाइट में पढ़ता था। उसके परिजनों ने उसकी मां से कल्याण को
टाइपिंग सीखने को कहा ताकि वह कुछ कमा सके। लेकिन मां ने इंकार कर दिया
और कल्याण की बेहतर तालीम पर ध्यान दिया। मां की दृढ़ता के कारण कल्याण
की पढ़ाई सुनिश्चित हो सकी।जब उससे पूछा कि परिवार कैसे चला। तो उसका
जवाब था हमने हालातों से समझौता कर लिया था। कई मौकों पर उसने मां से कहा
कि एक दिन मैं तुझको इतना पैसा दूंगा कि तू सोच भी नहीं सकेगी कि इसका
क्या करे। कल्याण को इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश मिल गया।
कॉलेज में पढ़ाई के दौरान कई मौकों पर उसके पास खाने के लिए दूसरे
छात्रों पर निर्भर रहना होता था, ताकि किसी तरह से पेट भर सके। अंतिम
सेमेस्टर की परीक्षा के पहले उसने दिन भर खाना नहीं खाया और परीक्षा खत्म
होने पर बेहोश हो गया।
कॉलेज से ग्रेजुएशन के बाद टीसीएस में सिलेक्शन हो गया। उसे टीसीएस के
मुंबई ऑफिस में पहुंचना था। जब वह पहले दिन ऑफिस गया तो चप्पल पहनकर गया
था। उसके मैनेजर ने उसे डांटा और कहा कि कल से जूते पहनकर आना। इस पर
कल्याण ने कहा मैं नहीं पहन सकता। मैनेजर ने फिर डांटा तो उसने कहा कि
अभी मेरी हालत जूते खरीदने तक की नहीं है। मैनेजर ने पूछा कि तुम कहां रह
रहे हो, कल्याण ने कहा कि दादर रेलवे स्टेशन। मैनेजर तब तक भीतर से हिल
चुका था।
उसने एक माह की सैलेरी कल्याण को एडवांस में दी और रहने की व्यवस्था भी
की। इस एडवांस से कल्याण ने एक जोड़ जूते लिए और 1500 रु. मां को भेजकर
अपना वादा पूरा किया। बेहद कम समय में उसने वॉलमार्ट, अमेजन और अन्य
बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए काम किया।
आज कल्याण एक बड़ी अमेरिकी कंपनी में सीओओ है और अमेरिका में बस चुका है।
यह जानना बेहद इस्पायरिंग है कि कल्याण जैसे लोग बुरा दौर देखते हुए और
मजबूत हो जाते हैं। बुरा समय कभी खत्म होता नहीं, लेकिन मजबूत लोग पार कर
ही जाते हैं। मैंने अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुना है कि कुछ पाने के
लिए कुछ खोना पड़ता है, लेकिन मेरा मानना है कि कुछ पाने के लिए कुछ करना
पड़ता है।
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बेटा आज हम गिरे हैं, कल तुम भी तो गिरोगे..हंस लो..हंस लो.
Monday, July 22, 2013
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जाको राखे सांइयां मार सके न कोय.
Thursday, June 27, 2013
जाको राखे सांइयां मार सके न कोय. कुछ ऐसा हु्आ चीन के निंगहाई में.
5वीं मंजिल से गिरी, फिर भी जिंदा है वो...
इस प्रांत से एक अनोखा वीडियो सामने आया है जिसमें ढाई साल की बच्ची
पांचवीं मंजिल से गिरती है पर वह सही सलामत बच जाती है. Qiqi नाम की
लड़की को इस हादसे में चेहरे पर मामूली खरोंचे आईं हैं.
CCTV चैनल द्वारा दिखाए गए सिक्योरिटी कैमरे की फुटेज से साफ होता है कि
किस तरह लोगों के एक समूह ने इस लड़की की जान बचाई. जो वीडियो सामने आया
है उसमें देखा जा सकता है कि लोगों का एक समूह बिल्डिंग की ओर देखकर कुछ
बातें कर रहा था. फिर तुरंत वे लोग एक स्थान पर एकत्रित हो गए और
बिल्डिंग से गिरी लड़की को लपक लिया.
CCTV चैनल के मुताबिक लड़की की जान बचाने वाले लोग बिल्डिंग के पास में
ही एक कंपनी में काम करते हैं. लड़की की चीखने की आवाज सुनने के बाद वे
लोग वहां पर आए थे.
Qiqi के परिजनों के मुताबिक वे अपनी बेटी को घर में अकेला छोड़कर चले गए
थे. उस वक्त वह सो रही थी. पर नींद खुलने के बाद बच्ची खिड़की पर चढ़ गई
जिस वजह से यह घटना घटी.
kuchkhaskhabar@gmail.com
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96 की उम्र में उग आए सींग
Monday, April 29, 2013
बांका। इसे कुदरत का करिश्मा कहें या शारीरिक विकृति, समझ में नहीं आता।
96 वर्षीय बुजुर्ग के सिर पर तीन इंच लंबा सींग उग आया है। बकरे या अन्य
जानवरों के सींगों की तरह ही यह भी मजबूत और नुकीला है। इस अजूबे ने
स्थानीय चिकित्सकों को भी हैरत में डाल रखा है। वे भी इसे अपनी तरह का
अद्भुत केस मान रहे हैं।
जानकारी के अनुसार अमरपुर प्रखंड के सलेमपुर गांव के जगदीश कापरी के सिर
पर यह सींग निकला है। कापरी ने बताया कि छह महीने पहले सर्दियों के दौरान
उन्हें सिर के बीच में सींग विकसित होने का एहसास हुआ। जगदीश के
रिश्तेदार राजीव कापरी ने बताया कि सर्दियों में जगदीश की ऊनी टोपी
फाड़कर सींग बाहर निकल आया। इसके बाद सबका ध्यान इस ओर गया। जगदीश का
कहना है कि उन्हें सींग से कोई विशेष तकलीफ नहीं है। मगर, सिर पर
असामान्य रूप से सींग निकलने से वे सहमे हुए हैं।
स्थानीय चिकित्सकों से भी समस्या पर बात की गई। सभी पसोपेश में पड़ गए।
जगदीश की उम्र के मद्देनजर चिकित्सक शल्य क्त्रिया कर सींग हटाने से भी
परहेज कर रहे हैं।
इस बाबत सिविल सर्जन डॉ. एनके विद्यार्थी ने बताया कि चिकित्सा विज्ञान
में हॉर्न यानी सींग निकलने की बात अभी तक सामने नहीं आई है। कभी-कभी
शरीर के किसी हिस्से में मांस का अतिरिक्त हिस्सा निकलने के मामले जरूर
सामने आते रहे हैं। मगर, ठोस सींग का निकलना बिल्कुल अनोखा मामला है।
जल्द ही मेडिकल टीम भेजकर कापरी की जांच कराई जाएगी। तत्पश्चात उनके इलाज
पर विचार किया जाएगा।Posted by Unknown Labels: अजब हैं लोग | 0 comments | Email This BlogThis! Share to X Share to Facebook |
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गूगल के सीईओ की सैलरी मात्र 54 रुपए
Friday, April 26, 2013
क्या किसी की सैलरी इतनी कम हो सकती है आप सोंच भी सकते वो भी गूगल जैसी
दिग्गज कंपनी में लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी गूगल के सीईओ लैरी पेज
और उनके साथी सर्गेई ब्रिन की सैलरी मात्र 1 डॉलर है जबकि दूसरी तरफ गूगल
के दूसरे अधिकारियों का सैलरी पैकज 124 डॉलर है जिसमें से सबसे अधिक
सैलरी पैकेज बिजनेस ऑपरेशंस के हेड निकेश अरोड़ा को है जिन्हें सालाना
46.7 मिलियन डॉलर मिलते हैं।
हम आपको बता दें लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने मिलकर 1998 में गूगल की
शुरुआत की थी काफी कम समय में गूगल 2001 में शेयर मार्केट में लिस्टेड
हो गई इसी के बाद से लैरी और ब्रिन ने अपनी सैलरी 1 डॉलर तक सीमित कर ली
थी। इसके अलावा एप्पल के दिवंगत सीईओ स्टीव जॉब्स की सैलरी भी 1 डॉलर
ही थी। इतनी कम सैलरी केवल लैरी, ब्रिन और स्टीव जॉब्स की ही नहीं
बल्कि टेक जगत में कई ऐसी हस्तियां हैं जो नाम मात्र की सैलरी में काम
करती हैं।Posted by Unknown Labels: अजब हैं लोग | 0 comments | Email This BlogThis! Share to X Share to Facebook |
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भारतीय ज्ञान को हमेशा विश्व में माना जाता रहा है। दुनियाभर में भारतीय
लोग अपनी बुद्धि-कौशल से कंपनियों को ऊंचाई पर ले जा रहे हैं।
इन्हीं में एक नाम है नील मोहन का। नील मोहन को गूगल ने 100 मिलियन डॉलर
(करीब 544 करोड़) का बोनस दिया है। यह बोनस गूगल ने नील मोहन को इसलिए
दिया है कि कहीं वे ट्विटर न ज्वॉइन कर लें।
भारतीय मूल के 39 वर्षीय नील मोहन गूगल में एडवरटाइजिंग प्रोडक्ट्स के
वाइस प्रेसीडेंट हैं। ट्विटर ने उन्हें प्रॉडक्ट चीफ के पद का ऑफर दिया
था। गूगल उनके टैलेंट का भरपूर उपयोग करना चाहती है। नील दूसरे ऐसे
व्यक्ति हैं जिन्हें गूगल ने सबसे ज्यादा बोनस दिया है।
गूगल के चेयरमैन इरिक श्मिट को इससे पहले गूगल ने 101 मिलियन डॉलर दिए
थे। नील मोहन का बचपन फ्लोरिडा और मिशिगन में बीता। उन्होंने इलेक्ट्रिक
इंजीनियरिंग और एमबीए की डिग्री स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ली है। गूगल
ने नील को यह बोनस कंपनी के शेयर के तौर रूप में दिया है।
गूगल के शेयरों की वर्तमान कीमत के अनुसार नील के शेयरों की कीमत 100
मिलियन डॉलर से बढ़कर 150 मिलियन डॉलर हो गई है। भारतीय रुपए में यह राशि
लगभग 817 करोड़ रुपए हो जाएगी। नील के दोस्तों का कहना है कि नील में
टेक्नोलॉजी की समझ है और वे व्यापारिक रणनीति पर जबर्दस्त पकड़ रखते हैं।
नील मोहन फिलहाल सेन फ्रांसिस्को में अपनी पत्नी के साथ आलीशान मकान में
रहते हैं। इस मकान की कीमत लगभग 5.2 मिलियन डॉलर है। मोहन की पत्नी हेमा
सरीम कैलिफोर्निया में डेमोक्रेटिक स्टेट सिनेटर की क्षेत्रीय निदेशक
हैं।
नील मोहन ने अपने करियर की शुरुआत एक टेक्निकल कंपनी में सहायक वर्कर के
रूप में बहुत छोटे मेहनताने में की थी। 2008 में मोहन अपनी पिछली कंपनी
डबल क्लिक से गूगल में आए। डबल क्लिक को बिजनेस वर्ल्ड में एक
एडवरटाइजिंग कंपनी के रूप में जाना जाता है। इसके बाद उन्होंने अपनी
दूरदर्शिता और रणनीतियों से गूगल को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।Posted by Unknown Labels: अजब हैं लोग, अजब-गजब | 0 comments | Email This BlogThis! Share to X Share to Facebook |
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पाकिस्तान में पहली बार चुनाव लड़ेगा एक ट्रांसजेंडर
Monday, April 15, 2013
पाकिस्तान के पहली बार एक ट्रांसजेंडर को चुनाव लड़ने की इजाजत दी गई है.
देश के चुनाव आयोग ने यहां एक चुनाव क्षेत्र से ट्रांसजेंडर के नामांकन
पत्र को स्वीकार किया.
शुरूआत में चुनाव आयोग ने बिंदिया राणा के नामांकन पर्चे को रद्द कर दिया
था लेकिन अपील दायर करने के बाद बिंदिया को आखिरकार चुनाव लड़ने की इजाजत
मिल गई.
बिंदिया ने कहा कि वह पाकिस्तान में ट्रांसजेंडरों के हाल को सामने लाना चाहती हैं.Posted by Unknown Labels: अजब हैं लोग, अजब-गजब | 0 comments | Email This BlogThis! Share to X Share to Facebook |
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जहां कुत्ते, बिल्ली सोते हैं गद्दे पर...
Saturday, April 13, 2013
यहां सड़कों पर घूमते बेजुबान जानवरों (कुत्ते, बिल्ली, बकरी) को कटोरे व
प्लेट में खाना खिलाया जाता है और उनके सोने के लिए गद्दों का बिछौना
तैयार किया जाता है. वहीं कम उम्र के जानवरों को बोतल से दूध पिलाया जाता
है. यह नजारा है मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के एक आवास का. यह आवास
सड़क पर घूमते जानवरों का आश्रय स्थल बन गया है.
नरसिंहपुर की ऋचा प्रियदर्शी के लिए जानवरों के दुख दूर करना ही जीवन का
मकसद हो गया है. वह बताती हैं कि एक बार सड़क पर पड़े बीमार कुत्ते की
हालत को देखकर उनका दिल पसीज गया और वे उसे अपने घर ले आईं, उसकी
सेवा-खुशामद कर उन्हें सुख की अनुभूति हुई. फिर उनके मन में ऐसा विचार
उपजा कि जानवरों की सेवा ही उनके जीवन का ध्येय बन गया.
ऋचा को अपने इस मकसद को पूरा करने में मां माधुरी का भी पूरा साथ मिल रहा
है. माधुरी केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्य रही हैं और सेवानिवृत्त होने
के बाद बेटी के पशुसेवा अभियान में साथ निभा रही हैं.
सड़क पर घूमते व बीमारी से लड़ते कुत्ते, बिल्ली, बकरी आदि जब भी ऋचा को
नजर में आते हैं, वह उन्हें अपने घर लेकर आ जाती हैं. इतना ही नहीं, इन
जानवरों को अपने हाथ से खाना खिलाती हैं और उनकी देखभाल करती हैं. उनके
घर में जानवरों के सोने के लिए बाकायदा बिस्तर का इंतजाम है और खाने के
लिए बर्तन भी हैं. जब कोई जानवर उम्र में बहुत छोटा होता है या उसकी
तबीयत ज्यादा खराब होती है तो उसे बोतल के जरिए दूध पिलाया जाता है.
ऋचा ने एमए की डिग्री के साथ कानून की उपाधि भी हासिल की है. उन्हें
बीमार जानवरों की सेवा करने में सुख की अनुभूति होती है. वह कहती हैं कि
आदमी तो दगा दे जाता है, औलादें तक अपने मां-बाप को लात मारकर चल देती
हैं, मगर जानवर ऐसा नहीं करते. इन बेजुबान जानवरों की नजरों में वफा देखी
जा सकती है. यही कारण है कि वह इंसान की बजाय जानवरों को अपना दोस्त
मानती हैं.
ऋचा व उनकी मां माधुरी ने मृत्यु उपरांत अपनी देह चिकित्सा महाविद्यालय
को देने का ऐलान किया है. वे चहती हैं कि चिकित्सा छात्र उनकी देह के
जरिए अपना शिक्षण कार्य पूरा कर समाज की सेवा करें.Posted by Unknown Labels: अजब हैं लोग | 0 comments | Email This BlogThis! Share to X Share to Facebook |
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78 बच्चों का पिता 100 पूरे करना चाहता है
Tuesday, April 2, 2013
यूएई का 60 वर्षीय दाद मोहम्मद मुराद अब्दुल रहमान 78 बच्चों का पिता है
और उसका उद्देश्य है कि 2015 तक वह 100 बच्चों का पिता बन जायेगा। औसने
अभी तक 15 शादियां की हैं मगर कानूनन क्योंकि वह केवल चार पत्नियां ही रख
सकता था इसीलिये उसने बाकियों से तलाक ले लिया है। अपने उद्देश्य को
प्राप्त करने के लिये वह अभी कुछ और शादियां भी कर सकता है।Posted by Unknown Labels: अजब हैं लोग, अजब-गजब | 0 comments | Email This BlogThis! Share to X Share to Facebook |
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एंटी वायरस ने बनाया मैकेनिक से अरबपति
Monday, April 1, 2013
मुंबई [ओमप्रकाश तिवारी]। मुंबई सिर्फ एक दशक में अपनी मेहनत के बलबूते
120 वर्ग फीट की खोली से 230 करोड़ रुपये वार्षिक के व्यवसाय तक पहुंचना
हंसी खेल नहीं हो सकता। यह तभी संभव है, जब एक पत्थर उछाल कर आसमान में
छेद करने का हौसला मन में हो। कंप्यूटर एंटी वायरस क्विक हील के निर्माता
संजय काटकर की कहानी ऐसी ही है। सिर्फ दसवीं तक पढ़ाई करके कैलकुलेटर की
मरम्मत से अपना करियर शुरू करनेवाले कैलाश ने कभी स्वयं भी उस बुलंदी का
सपना नहीं देखा होगा, जहां आज वह हैं।
महाराष्ट्र के सतारा जिले के छोटे से गांव रहिमतपुर में जन्मे कैलाश (45)
के पिता पुणे स्थित फिलिप्स कंपनी में मशीन सेटर थे। पिता की आमदनी इतनी
नहीं थी कि बेटे को ज्यादा पढ़ा सकें। लिहाजा दसवीं की पढ़ाई पूरी करने
के बाद ही कैलाश ने एक दुकान में कैलकुलेटर मैकेनिक की नौकरी कर ली। यह
बात 1987 की है। 1990 में पुणे में ही अपनी दुकान खोलकर कैलकुलेटर ठीक
करते-करते वह रेडियो, टेपरिकॉर्डर, टेलीविजन एवं कंप्यूटर भी ठीक करने लग
गए। उसी दौरान कैलाश के छोटे भाई संजय ने 12वीं पास किया था।
देश में कंप्यूटर क्रांति की शुरुआत हो चुकी थी। इसलिए कैलाश ने संजय को
ग्रेजुएशन में कंप्यूटर साइंस लेने के लिए प्रेरित किया। कैलाश की दुकान
चल निकली थी, इसलिए फीस की चिंता नहीं थी। भाई कॉलेज में पढ़ाई करता और
खाली समय में दुकान में बैठकर कैलाश की मदद भी करता। उन दिनों कंप्यूटर
में कोई वायरस घुस जाए तो उसे ठीक करने के लिए एंटी वायरस 16 हजार रुपये
का आता था। कैलाश की दुकान में आनेवाले ज्यादातर कंप्यूटर वायरस की
बीमारी से ही ग्रस्त होते थे। संजय ने जल्दी ही एक ऐसा तरीका खोज निकाला,
जिससे कंप्यूटर में आया वायरस हटाया जा सके। धीरे-धीरे संजय ने अलग-अलग
तरह के वायरसों के लिए अलग-अलग टूल विकसित कर लिए।
जब कैलाश के ग्राहकों को इससे फायदा होने लगा तो दोनों भाइयों ने मिलकर
1995 में क्विकहील का पहला एंटी वायरस सीडी तैयार किया। एक दोस्त की मदद
से किसी सरकारी कंपनी में 25 सीडी का पहला ऑर्डर मिला। लेकिन अगले पांच
साल तक सीडी बिकने की गति इतनी धीमी रही कि दोनों भाई दुकान बंद कर कहीं
नौकरी करने का इरादा बनाने लगे। क्योंकि उन्हें एंटीवायरस बनाना तो आता
था, लेकिन बेचना नहीं आता था। आखिरी कोशिश के रूप में कैलाश ने बड़ी
मुश्किल से जुटाई कुछ पूंजी से मुंबई के एक अंग्रेजी दैनिक में आधे पेज
का विज्ञापन दे डाला। विज्ञापन ने असर दिखाया।
विपणन के लिए कैलाश को कुछ अच्छे लोग मिले, और सीडी बिकना भी शुरू हो
गया। 2002 में लगभग शून्य पूंजी से शुरू हुआ यह सफर आज 200 करोड़ रुपयों
से ज्यादा के वार्षिक व्यवसाय तक पहुंच चुका है।Posted by Unknown Labels: Story, अजब हैं लोग, अजब-गजब, जानकारी, टेक्नॉलोजी | 0 comments | Email This BlogThis! Share to X Share to Facebook |
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