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  1. वो आवाज़ का जादू या गर्मी हो लहजे की
    वो अन्दाज़ निराला हो या चमक हो चेहरे की
    हम किसको करेँ याद और किसको भुलाएँ
    तुम्हेँ देखते हैँ जितना , उतना तुम्हेँ चाहेँ
    हर बात तुम्हारी यूँ औरोँ से है जुदा
    जैसे फ़लक पे चाँद सितारोँ से है जुदा
    हैँ आज भी दुनिया मेँ फ़नकार बहुत अच्छे
    आगे तुम्हारे लगते हैँ लेकिन सभी बच्चे
    आज बस जिस्म के चर्चे हैँ जान नहीँ है
    सब कुछ है सिनेमा मेँ मगर 'प्राण' नहीँ है
    यूँ ही सदा हँसते रहो न तुम्हेँ हो कभी ग़म
    है दुआ हमारे बीच रहो ऐसे ही तुम हर दम


     'यारी है ईमान मेरा, यार मेरी जिन्दगी ...'फिल्म जंजीर में प्राण जिस मस्ती में यह गाना गाते नजर आए, वास्तविक लाइफ में भी वे अपने दोस्तों से बिलकुल इसी गाने के बोल की तरह ताल्लुक रखते थे। फ़िल्मी दुनिया का यह विलेन रियल लाइफ में किसी हीरो से कम नहीं था। यारों का यार 'प्राण' 12 जुलाई 2013 की रात सभी को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कह गए। उन्हें श्रृद्धांजलि स्वरुप पेश है यादों को समेटे हुए उनकी निजी लाइफ की कुछ तस्वीरें ...(सभी तस्वीरें pransikand.com से साभार ली गई हैं)

























  2. बॉलीवुड के सुपर स्‍टार प्राण का अंति‍म संस्‍कार शनि‍वार दोपहर मुंबई के शि‍वाजी पार्क श्‍मशान घाट में कर दि‍या गया। इससे पहले लीलावती अस्‍पताल से एक एंबुलेंस से उनका पार्थिव शरीर शि‍वाजी पार्क लाया गया जहां दोपहर तक अंति‍म दर्शन के लि‍ए उन्‍हें रखा गया। बॉलीवुड के महानायक अमि‍ताभ बच्‍चन भी प्राण साहब के अंति‍म संस्‍कार में हि‍स्‍सा लेने के लि‍ए पहुंचे। आइए तस्वीरों में देखते हैं और कौन-कौन शामिल हुआ प्राण साहिब के अंतिम सफ़र में शामिल...





















  3. जब-जब हिन्दी सिनेमा की फिल्मों की तारीफ की जाती है उनमें सबसे पहला नाम
    मदर इंडिया फिल्म का आता है. मदर इंडिया का नाम आज भी हिन्दी सिनेमा में
    इस कदर कायम है कि बहुत से मशहूर निर्देशक इसकी रीमेक बनाना चाहते हैं पर
    क्या आप जानते हैं कि मदर इंडिया फिल्म अपने आप में एक रीमेक फिल्म थी.
    साल 1957 में मदर इंडिया(Mother India)जिस दिन पर्दे पर रिलीज हुई थी उसी
    दिन सिनेमाघरों की भीड़ को देखकर हिन्दी सिनेमा के जानकारों ने इस बात का
    अंदाजा लगा लिया था कि यह फिल्म बहुत जल्द ही इतिहास रचेगी और ऐसा ही
    हुआ. आज भी बॉलीवुड की कोई भी फिल्म मदर इंडिया फिल्म की कहानी और
    निर्देशन की तुलना नहीं कर सकती है.

    आज रीमेक फिल्म बनाने का चलन हिन्दी सिनेमा में एंट्री ले चुका है पर
    क्या निर्देशक रीमेक फिल्में बनाते समय पुरानी फिल्म की चुनौतियों पर खरे
    उतर पाते हैं या नहीं यह बहुत बड़ा सवाल है. ऐसा नहीं था कि सालों पहले
    हिन्दी सिनेमा में रीमेक फिल्में नहीं बना करती थीं बल्कि बहुत बार ऐसा
    देखा गया कि निर्देशक अपनी ही फिल्म का रीमेक बनाकर इतिहास रचा करते थे.
    उन निर्देशकों की लिस्ट में एक नाम महबूब खान का है. साल 1940 में रिलीज
    हुई फिल्म 'औरत' महबूब खान की थी जो हिट तो हुई पर इतिहास ना रच सकी.
    उसके बाद उन्होंने इसी फिल्म की रीमेक फिल्म बनाई जिसका नाम था मदर
    इंडिया. महबूब खान की निर्देशित फिल्मों की लिस्ट में मदर इंडिया(Mother
    India)ऐसी फिल्म बन गई जिसके नाम से उन्होंने पूरी दुनिया में नाम कमाया
    और देखते ही देखते महबूब खान का नाम हिन्दी सिनेमा की खास शख्सियत की
    लिस्ट में शामिल हो गया.


    फिल्म मदर इंडिया(Mother India)की कहानी कुछ इस तरह थी कि राधा नाम की
    महिला नवविवाहिता के रूप में गाँव आती है और घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियाँ
    उठाने में पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती है. राधा नाम की महिला का
    किरदार नरगिस ने निभाया था और उन्होंने इस किरदार को निभाने में दिन-रात
    एक करके मेहनत की थी जिस कारण पर्दे पर मदर इंडिया देखने आए लोगों ने
    फिल्म के एक-एक दृश्य को दिल से महसूस किया था. सुखी लाल के कर्ज से
    बेहाल राधा का पति श्यामू घर छोड़ कर चला जाता है और घर-गृहस्थी को चलाने
    की सारी जिम्मेदारियां राधा के कंधों पर आ जाती है. फिल्म मदर
    इंडिया(Mother India)में श्यामू नाम का किरदार अभिनेता राज कुमार ने
    निभाया था. पति के जाने के बाद राधा समाज में अपनी इज्जत को सुखी लाल की
    नजरों से बचाती है और अपना एक बेटा खोने के बाद दो बेटों को अकेले बड़ा
    करती है पर इस सबके बीच राधा अपने मूल्यों, अपने सिद्धांतों से कभी भी
    समझौता नहीं करती है

    मदर इंडिया फिल्म के सुपरहिट होने के पीछे एक खास कारण था और वो था फिल्म
    का पोस्टर. आज किसी भी फिल्म के रिलीज होने से पहले फिल्म के प्रमोशन पर
    आंख बंदकर पैसा खर्च किया जाता है पर महबूब ने मदर इंडिया(Mother
    India)फिल्म के प्रमोशन के लिए ऐसा कुछ नहीं किया था. मदर इंडिया फिल्म
    का एक पोस्टर ही उसके सुपरहिट होने का सबसे बड़ा कारण बन गया. प्रमोशन
    पोस्टर में बैल की जगह स्वयं हल खींचकर अपना खेत जोतती महिला को दिखाकर
    इस फिल्म ने दर्शकों को दिल से जोड़ लिया था जिस कारण शायद ही कोई इस
    फिल्म को सिनेमाघर में नहीं देखने के लिए अपने कदम रोक पाया होगा.
    'दुनिया में हम आए हैं तो जीना ही पड़ेगा' मदर इंडिया(Mother India)फिल्म
    के इस गाने ने फिल्म की पूरी कहानी सही तरीके से बयां करने में खास मदद
    की थी. वास्तव में अब हिन्दी सिनेमा में वो समय आ चुका है जब अपनी फिल्म
    को बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट कराने के लिए निर्देशक और निर्माताओं को एक
    पोर्न स्टार, सेक्सी और बोल्ड सीन या फिर हॉलीवुड की फिल्मों का सहारा
    लेना पड़ता है. ऐसे में इस बात की उम्मीद करना बेकार ही है कि कोई भी
    निर्देशक फिल्म मदर इंडिया की सफलतापूर्वक रीमेक बना पाएगा.

  4. बॉलीवुड में अपने दम पर फिल्म चलाने वाली हीरोइनों की बात करें तो उनमें
    सबसे पहला नाम विद्या बालन का ही आता है. कहानी हो या डर्टी पिक्चर
    उन्होंने दोनों ही फिल्मों में अपनी ऐक्टिंग का लोहा मनवाया है. कैरेक्टर
    को स्क्रीन पर जिंदा करने की कला में माहिर विद्या को दर्शकों को आहें
    भरवाना बखूबी आता है तो अपनी ऐक्टिंग से वे ऑडियंस को सकते में डालना भी
    जानती हैं.

    घनचक्कर में रंग-बिरंगी विद्या

    अपनी आने वाली फिल्म धनचक्कर में वे कमाल-धमाल नजर आ रही हैं. फिल्म में
    विद्या पंजाबन हाउसवाइफ बनी हैं और जमकर पंजाबी में गाली-गलौज भी करती
    नजर आ रही हैं. उनकी चमकीली-भड़कीली ड्रेसेस तो पहले ही सबकी चर्चा का
    विषय है.

    अब घनचक्कर से जुड़ी ताजा खबर यह है कि यूटीवी मोशन पिक्चर्स एक वीडियो
    तैयार कर रहा है, जिसमें विद्या होंगी और यह वीडियो दुनिया भर के पतियों
    और बायफ्रेंड्स को समर्पित होगा. यह पहला मौका है जब विद्या बालन कोई
    म्यूजिक वीडियो शूट करेंगी. इस गीत को अमित त्रिनेदी ने कंपोज किया है.
    इस सांग को फिल्म में विद्या के किरदार को ध्यान में रखकर शूट किया गया
    है.

    इस चटपटे म्युजिक ट्रैक के बारे में फिल्म के डायरेक्टर राजकुमार गुप्ता
    कहते हैं, "यह सांग फिल्म में उनके बिंदास पंजाबी हाउसवाइफ के कैरेक्टर
    को बखूबी पेश करेगा. यह दुनिया के सभी पतियों, बॉयफ्रेंड्स और मंगेतरों
    के लिए एक ट्रिब्यूट है."

    हालांकि डायरेक्टर ने यह भी कहा कि फिल्म मे म्युजिक वीडियो की सिक्वेंस
    अभी तय की जानी है. वाकई विद्या ने जब कुछ हटकर किया है, दर्शकों को अपनी
    ओर खींचने में वे बखूबी कामयाब रही हैं. अब बारी घनचक्कर की है.

  5. हिंदी सिनेमा में अपनी बेहतरीन अभिनय क्षमता की बदौलत धाक जमाने वाले
    गुजरे जमाने के अभिनेता प्राण को दादा साहब फाल्‍के पुरस्‍कार मिलने जा
    रहा है.

    प्राण ने करीब 350 फिल्‍मों में काम किया है. उन्‍हें 93 साल की उम्र में
    दादा साहब फाल्‍के सम्‍मान मिलने जा रहा है. प्राण ने विलेन के अलावा
    चरित्र अभिनेता के रूप में भी खूब नाम कमाया.

    प्राण साल 1998 में ही फिल्‍मों से रिटायर हो चुके हैं. प्राण को साल
    2001 में 'पद्मभूषण' से सम्‍मानित किया जा चुका है. 'उपकार' और 'जंजीर'
    जैसी दर्जनों सुपरहिट फिल्‍मों में प्राण के अभिनय को खूब सराहा गया.

    प्राण फिल्‍मों में डालते रहे जान...
    बालीवुड में छह दशक तक सक्रिय रहने वाले प्राण ने करीब 400 फिल्मों में
    काम किया. उन्होंने नायक, खलनायक से लेकर चरित्र अभिनेता तक का किरदार
    निभाया.

    बालीवुड में एक समय 'मधुमती', 'जिद्दी' और 'राम और श्याम' जैसी फिल्मों
    में खलनायक का जोरदार किरदार निभाने की वजह से वे पर्दे पर घृणा के पात्र
    के प्रतीक बन गए. वे एक समय जहां खलनायक के किरदार का प्रतीक माने जाने
    लगे, वहीं उन्होंने चरित्र अभिनेता के रूप में भी अपनी जबर्दस्त छाप
    छोड़ी. फिल्म 'उपकार' में उनके मंगल चाचा के किरदार ने दर्शकों का दिल
    जीत लिया. इसी तरह 'जंजीर' कठोर लेकिन दयालु पठान के रूप आज भी लोग
    उन्हें भुला नहीं पाए हैं.

    प्राण की प्रमुख फिल्मों में 'छलिया', 'जिस देश में गंगा बहती है',
    'कश्मीर की कली', 'दो बदन', 'जानी मेरा नाम', 'गुड्डी', 'परिचय',
    'विक्टोरिया नंबर 203', 'बाबी', 'अमर अकबर एंथनी', 'डान', 'शराबी' आदि
    शामिल हैं.

    प्राण को सम्‍मान दिए जाने पर गायिका लता मंगेशकर ने कहा कि उन्‍हें दादा
    सा‍हब फाल्‍के पहले ही मिल जाना चाहिए था. हालांकि लता ने कहा कि
    उन्‍होंने प्राण की कोई फिल्‍म नहीं देखी है.

    गौरतलब है कि भारत में दादा साहब फाल्‍के अवॉर्ड सिनेमा जगत का सबसे बड़ा
    सम्‍मान है. वैसे इस सम्‍मान के तहत स्वर्ण कमल, एक शॉल तथा नकद राशि दी
    जाती है.

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