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  1. Touch Typing Study में आपका स्वागत है!

    http://www.typingstudy.com/hi/

    क्या आप अभी भी दो उंगलियों के साथ टाइप करते हैं? क्या आपको अभी भी
    प्रत्येक की-स्ट्रोक के साथ कीबोर्ड को देखना पड़ता है?

    आपको बता दें कि Touch Typing Study एक मुफ्त, उपयोग में आसान, सीखने की
    वेबसाइट है जो आपको आपकी टाइपिंग गति तथा शुद्धता को बेहतर करने, अभ्यास
    करने तथा सीखने में सहायता करती है।एक बार जब आप टच टाइप कर सकेंगे तो
    आपको उन वर्णों को खोजने के लिये की-बोर्ड पर देखने की जरूरत नहीं होगी
    जिनको आपको टाइप करना है और आप कहीं अधिक तेज़ गति से टाइप कर
    सकेंगे(गी)!

    टच टाइप एक ऐसी विधि है जो दृष्य की स्थान पर मांसपेशीय स्मृति पर आधारित
    है. यह विधि आपको डेटा दर्ज करने की अधिक तेज़ गति प्रदान करती है, विशेष
    रूप से जब आपको किसी दृष्य सामग्री से टेक्स्ट का ट्रांसक्रिप्शन करना
    हो.

    टच टाइपिंग विधि से टाइप करना आपकी कम्प्यूटर संबंधी उत्पादकता को काफी
    अधिक बढ़ा देता है, यह डेटा दर्ज करने की गति को बढ़ाता है और जहां तक
    संभव हो थकान और आँखों पर दबाव को कम करता है.

    टच टाइपिंग स्टडी में 15 पाठ, एक स्पीड टेस्ट और ऐसे खेल शामिल हैं जिनसे
    आप चरणबद्ध तरीके से टाइप करना सीख सकते हैं, साथ ही अपनी प्रगति को
    देखते हुये मज़े उठा सकते हैं।

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  2. मुफ्त में ऑनलाइन खेल सीधे खेलें। हमारे पास आपके खेलने के लिए बहुत सारे
    कार के शानदार खेल, फुटबॉल खेल,
    निशानेबाजी के खेज,
    जोंबी के खेल,
    खाना पकाने के खेल हैं।
    हमारी अद्भुत ऑनलाइन लाइब्रेरी में अभी खोजें!

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    हम फ्लैश, शॉकवेव या HTML5 में इंटरनेट पर सर्वोत्तम ऑनलाइन खेल ढूंढने
    में विशेषज्ञ हैं। आपको ऑनलाइन खेल खेलने के लिए उन्हें संस्थापित करने
    की जरूरत है। हमारे सभी खेल 100% बिना किसी शुल्क के हैं और बिना अकाउंट
    बनाए उन्हें खेला जा सकता है। आप एंड्राइड खेल या iphone खेल भी खेल सकते
    हैं!

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  3. देश मे कहीं भी होगा बच्चा तो किया जा सकेगा बरामद

    अब प्रदेश मे गुमशुदा किसी भी बच्चे को वेबसाइड की मदद से बरामद किया जा सकेगा | यू पी मे भी  ट्रैकिंग चाइल्ड सॉफ्टवेअर को यहाँ की जरूरतों के अनुसार बादल कर नेशनल सर्वर से जोड़ दिया गया है| ट्रैकिंग चाइल्ड सॉफ्टवेअर पर गुमशुदा बच्चों की जानकारी अपलोड कर दी जाएगी |जिससे देश के सभी थानों मे लगे कंप्यूटर पर बच्चों की तस्वीर और जानकारी पहुँच जाएगी |
    बच्चे के मिलने पर सॉफ्टवेअर पर उसके बारे मे जानकारी खुद ब खुद आ जाएगी|   एडीजी तकनीकी शाखा ने जवाहर भवन स्थित कार्यालय मे पुलिस कर्मियों को इस सॉफ्टवेअर के इस्तेमाल की जानकारी देंने लिय कार्यशाला का आयोजन किया | नेशनल इन्फोर्मेटिक्स सेंटर से आए विशेषज्ञों ने पुलिस कर्मियों को बताया की वे इस सॉफ्टवेअर की मदद से कैसे बच्चों की फोटो व जानकारी वेबसाइड पर अपलोड करेंगे | बचपन बचाओ आंदोलन के तहत सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को गुमशुदा बच्चों  की तलाश के लिय खास योजना बनाने को कहा था | इसके बाद ट्रैकिंग चाइल्ड योजना की शुरुआत की गई |

    ·       एफ आई आर भी ड़ाल सकते हैं वेबसाइड  पर

    अगर किसी का बच्चा लापता है तो उसकी जानकारी वेबसाइड ट्रैक द मिसिंग चाइल्ड पर डाली जा सकती है | इसमे बच्चे की फोटो , उसकी जानकारी और दर्ज एफ आई आर को स्कैन कर ड़ाल सकते हैं | बच्चे की जानकारी वेबसाइड  पर आने के बाद देश के सभी राज्यों की पुलिस इसे देख सकेगी | अगर उनके इलाके मे वैसा कोई भी बच्चा दिखा या कहीं उससे संपर्क हुआ तो वहाँ की पुलिस  वेबसाइड की मदद से बच्चों के परिवार वालों तक पहुँच सकेगी |




  4.  ई-संसार में भारत सरकार के कई महत्वपूर्ण वेबसाइड एवं  वेब पोटर्ल है । जो संबंधित विभाग के महत्वपूर्ण जानकारियों के खजाने  से भरे हुआ है। साथ ही कई वेबसाइड एवं  वेब पोटर्ल विशेष रूप से जनहित के लिए विकसित किया गया है लेकिन प्रचार-प्रसार में कमी के कारण इन  वेबसाइड एवं   वेब पोटार्लो के बारे में बहुत कम लोग ही जानते है। तो आईये जानते है भारत सरकार के 100 महत्वपूर्ण उपयोगी वेबसाइड एवं वेव पोर्टल के बारे में ।यह जानकारी आपको पांच भाग में प्रदान किया जायेगा, आज जानते है भारत सरकार के शीर्ष के 20 उपयोगी वेब साइटो एवं वेब पोर्टल के बारे में … 

    1. http://india.gov.in/ या http://bharat.gov.in/ :-  यह भारत सरकार का आधिकारिक पोर्टल है। इस पोर्टल को बनाने का उद्देश्यो नागरिकों और अन्यर पणधारियों को भारत सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सूचना और सेवाओं तक एकल बिन्दुा अभिगम्योता प्रदान करना है। यहाँ आप भारत और इसके विभिन्नर पहलुओं के विषय में सूचना प्राप्त कर सकते है।  साथ ही यहाँ भारत सरकार के अन्यव पोर्टलों/वेबसाइटों के लिए इसमें विभिन्नत लिंक्सक दिए गए हैं।
    2. http://www.parliamentofindia.nic.in/ :- यह भारत की संसद का अधिकारिक  वेब पोर्टल है । यहाँ भारत की संसद से संबंधित जानकारी देख सकते हैं । यहाँ संसद के तीनो अंग (राष्ट्रपति, राज्यसभा एवं  लोकसभा) पर जानकारी प्रदान की गयी है।
    3. http://presidentofindia.nic.in/ :-  यह  भारत के राष्ट्रपति का अधिकारिक वेब पोर्टल है। यहाँ राष्ट्रपति और राष्ट्रपति भवन के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही राष्ट्रपति के दैनिक कार्यक्रम के बारे में यहाँ हर दिन सूचना मुहैया कराया जाता है।
    4. http://loksabha.nic.in/ :- भारत की संसद – लोकसभा – यह लोकसभा की आधिकारिक वेबसाइट है। यहाँ लोकसभा के सदस्य, सवाल, बहस, कानून, समिति, सचिवालय, भर्ती और पुस्तकालय आदि पर सूचना दी गई है।
    5. http://rajyasabha.nic.in/ :-भारत की संसद – राज्य सभा – यह  राज्यसभा  की आधिकारिक वेबसाइट है। यहाँ  राज्य सभा  के सदस्य और उनके कार्यकाल की जानकारी दी गयी है, साथ ही आप यहाँ राज्यसभा से जुडी सभी पहलू को समझ सकते है , क्यों कि यहाँ राज्यसभा के सभी विषयो पर विशेष सूचना दिया गया है।
    6. http://vicepresidentofindia.nic.in/ :-  यह  भारत के उपराष्ट्रपति का अधिकारिक वेब पोर्टल है। यहाँ आप भारत के उपराष्ट्रपति के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही उपराष्ट्रपति के दैनिक कार्यक्रम के बारे में यहाँ हर दिन सूचना मुहैया कराया जाता है।
    7. http://pmindia.nic.in/  :-  यह  भारत के प्रधानमंत्री का अधिकारिक वेब पोर्टल है। यहाँ आप भारत के प्रधानमंत्री के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यहाँ आप भारत के प्रधानमंत्री के भाषणों को सुन सकते है , साथ ही प्रधानमंत्री  के दुर्लभ तस्वीरों को देख सकते है। साथ ही प्रधानमंत्री  के दैनिक कार्यक्रम के बारे में यहाँ हर दिन सूचना मुहैया कराया जाता है।
    8. http://parliamentmuseum.org/indextry.html  :- संसद संग्रहालय – (भारत सरकार)- यह संसद संग्रहालय का अधिकारिक वेब पोर्टल है। संसद संग्रहालय के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। भारत की लोकतांत्रिक विरासत, स्वतंत्रता आंदोलन, सत्ता के हस्तांतरण, संविधान और संसदीय कार्यों आदि पर सूचना प्रदान की जाती है। प्रयोक्‍ता के लिए संग्रहालय संसाधन केंद्र के विवरण भी प्रदान किए गए हैं।
    9.  http://rashtrapatisachivalaya.gov.in/ : - यह राष्ट्रपति सचिवालय  का अधिकारिक वेब पोर्टल है। यहाँ राष्ट्रपति सचिवालय  के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही राष्ट्रपति सचिवालय  के दैनिक कार्यक्रम के बारे में यहाँ हर दिन सूचना मुहैया कराया जाता है । यहाँ  राष्ट्रपति सचिवालय  से जुडी अहम रिपोर्ट, योजना और नियम  को देखा जा सकता है ।
    10. http://cabsec.nic.in/  यह केन्द्रीय सचिवालय का वेब पोर्टल है, यहाँ  केन्द्रीय सचिवालय से जुडी अहम रिपोर्ट, योजना और नियम  को देखा जा सकता है। साथ ही आप  भारत सरकार (कार्य-आबंटन) नियम, 1961 के सही पहलू को समझ सकते है।
    11.  http://www.nic.in/ :- - राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) [ भारत सरकार ] – यह राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र  का अधिकारिक वेबपोर्टल है। राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र (एनआईसी)भारत सरकार का एक प्रमुख वैज्ञानिक व तकनीकी संस्थान है जिसकी 1976 में सरकारी क्षेत्र में बेहतर पद्धतियों, एकीकृत सेवाओं तथा विश्वव्यापी समाधानों को अपनाने वाली ई-सरकार/ई-शासन संबंधी समाधानों को प्रदान करने के लिए स्थापना की गयी। राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र ही देश भर के सरकारी तंत्र, विभाग, प्रभाग, संस्थान एवं सभी इकाईयो का वेबसाइड एवं वेब पोर्टल को विकसित करता है। यहाँ आप राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों से  रूबरू हो सकते है।
    12. http://data.gov.in/ :-  यह भारत सरकार के विभिन्न योजनाओं से संबंधित आकंडे मुहैया करने वाला अधिकारिक वेब पोर्टल है।  यहाँ आप कई योजनाओं से सम्बंधित आंकड़ा एक साथ एख सकते है। साथ ही आप कई योजनाओं एवं रिपोर्ट की पुरानी स्थिति भी देख सकते है और उन्हें आवश्यकता अनुसार डाऊनलोड भी कर सकते है।
    13. http://indg.in/ :- यह भारत विकास प्रवेशद्वार का अधिकारिक वेब पोर्टल है। यह कई भारतीय भाषाओँ में भारत सम्बंधित आधारभूत सूचना प्रदान करता है। इस पोर्टल का विकास राष्ट्रीय पहल “भारत विकास प्रवेशद्वार”, के अंग के रूप में किया गया है जो ग्रामीण भारत के सशक्तीकरण को समर्पित है।
    14. http://tdil-dc.in/  :-  भारतीय भाषा प्रौद्योगिकी प्रसारण और वितरण केंद्र ( भारत सरकार) का अधिकारिक वेब पोर्टल है। जिसका विकास भारतीय भाषाओँ की बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है। यहाँ  कई भाषाओ के संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां मुहैया कराई गई है। साथ ही यहाँ आप एक भाषा से दुसरे भाषा में कुशल पूर्वक शुद्ध अनुवाद कर सकते है।
    15. https://iib.gov.in/ :- Insurance Information Bureau का अधिकारिक वेब पोर्टल है। यहाँ आप विभिन्न बीमा से संबंधित आवश्यक सूचना प्राप्त का सकते है. साथ ही यहाँ आप कई सालो का बीमा सूची एक ही क्लिक पर देख सकते है एवं आवश्यकतानुसार डाउनलोड कर सकते है।
    16. http://pgportal.gov.in/ :- लोक शिकायत के लिए प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग द्वारा संचालित यह पोर्टल है। यहाँ आप ऑनलाइन लोक शिकायत दर्ज करा सकते है और साथ ही दर्ज शिकायतों का मानीटरिंग भी कर सकते है। ” प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग एक नोडल (आदर्श) एजेंसी है जिसके द्वारा देश में नागरिक-केंद्रित शासन के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत निर्मित होते हैं। चूंकि नागरिक शिकायतों का निवारण विभाग की एक सर्वाधिक महत्वंपूर्ण पहल है, इसलिए प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग नागरिकों के शिकायतों के निवारण और निपटान हेतु प्रभावकारी और सामयिक तंत्र तैयार करता है ।” यहाँ आप  लोक शिकायत पर दिए गए सूचना के माध्यम से महत्वपूर्ण पहलुओ को आराम से समझ सकते है।
    17. http://goicharters.nic.in/ :- यह केन्द्र सरकार के संगठनों का नागरिक चार्टर से संबंधित पोर्टल है। यहाँ आप केंद्र सरकार के विभिन्न संगठनो में निर्धारित नागरिक चार्टर को देख सकते है।  साथ ही यहाँ दिये गए सूचनाओ के आधार पर नागरिक चार्टर के विभिन्न पक्षों को बेहतर समझ सकते है।
    18. http://pensionersportal.gov.in/ :- यह केंद्र सरकार के पेंशन धारकों का अधिकारिक पोर्टल है। यहाँ पेंशन धारकों के सुविधा के लिए कई आवश्यक विन्दुयो को एक ही स्थान पर एक साथ प्रदर्शित किया गया है। साथ ही यहाँ पेंशन धारक सरकार के नए नियम और योजनाओं से भी रूबरू हो सकते है।
    19. http://rkvy.nic.in/ - राष्ट्रीय कृषि विकास योजना – कृषि मंत्रालय – यहाँ आप देश भर में चहल रहे कृषि विकास योजनाओं  के बारे में जान सकते है। राज्यवार कृषि आंकड़ो और ताजा योजना रिपोर्ट को देख सकते है।
    20. http://agmarknet.nic.in/   :-  भारत के विपणन एवं निरीक्षण (डीएमआई), – कृषि मंत्रालय ( भारत सरकार ) – यह एगमार्क संबंधित जानकारी मुहैया करने वाला भारत सरकार का अधिकारिक वेब पोर्टल है. जो छह भारतीय भाषा में एगमार्क संबंधित सूचना प्रदान करता है, साथ ही देश भर में सभी मंडियों का एक बाजार मुल्य की सूचना हर दिन मुहैया करता है, कोई भी भारतीय यहाँ से व्यापर के लिए अपने उत्पादित वस्तु का एगमार्क में पंजीकरण करा सकते है।

  5. अंडा खाना आपके लिए ज्यादा फायेदेमंद है या फिर सेब खाना,किस में किस से
    ज्यदा पोष्टिक तत्व है इन सब के बारे में अगर आप जानकारी चाहते है तो आप
    Twofoods नाम के वेबसाइट की सहयेता ले सकते है|
    इस वेबसाइट पैर आप किन्ही दो खाने की चीजों का आपस में कम्पेयर कर सकते
    है की किस में कितना पोष्टिक तत्व

    वेबसाइट पर जाने के लिए यहाँ क्लिक करें
    http://www.twofoods.com

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  6. अकसर आपको कंपनियों या सेवा प्रदातायों की सेवा में शिकायत या कोई सुझाव
    लेने के लिए कस्टमर केयर के नंबर की जरूरत पड़ जाती हैं |

    कभी कभी तो आपको ये नंबर पता होता है , कभी कभी इसकी तलाश करने में काफी
    दिक्कत होती हैं |
    यहाँ एक ऐसी साईट बता रहा हूँ, जहाँ देश के लगभग सारे टोल फ्री (जिन पर
    कॉल करने का कोई चार्ज नहीं लगता ) नंबर मौजूद है |
    काफी उपयोगी साबित हो सकती है |


    इस वेबसाइट पर जाने यहाँ क्लिक करें ।

    http://www.1-800.in/index.php

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  7. न्यूयार्क : अर्जेटीना निवासी मार्टिन पार्लाटो ने एक ऐसी वेबसाइट तैयार की है, जिसपर इंटरनेट उपयोग करने वालों को अपने सपने साकार करने में मदद मिल सकती है। पार्लाटो ने वेबसाइट अपने पिता के सम्मान में शुरू की है, जिनका उसके बचपन में ही स्वर्गवास हो चुका था।

    समाचार एजेंसी ईएफई के मुताबिक पार्लाटो ने कहा कि अमेरिका में पंजीकृत वेबसाइट `पॉसिबल डॉट कॉम` (पीओएसआईबीएल डॉट कॉम) की शुरुआत निजी जरूरतें पूरी करने के लिए की गई थी। वेबसाइट पिछले साल नवम्बर में शुरू हुई है और अब तक कई युवाओं के सपने साकार करने में मदद कर चुकी है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि सोशल नेटवर्क में सामाजिक बनने की पूरीम्भावना है, लेकिन उसका इस तरह से इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इसलिए मैंने कुछ अलग चीज तैयार करने की सोची।

    पार्लाटो ने अपने पिता के बारे में कहा कि उन्होंने मुझे उन लोगों की खोज करने की एक स्पष्ट सोच दी, जो जरूरतमंद हैं, साथ ही उनके जीवन से जुड़ने और उसे पूरी तरह से बदल देने और उसे जो भी सफलता मिले उसके प्रति उदार रहने की सोच दी। उसके पिता इटली के एक प्रवासी के पुत्र थे और जब पार्लाटो सात वर्ष के थे तभी उनकी मृत्यु हो चुकी थी।
    उन्होंने कहा कि `पॉसिबल डॉट कॉम` पर लोग अपने सपने के बारे में बता सकते हैं और उन्हें कई प्रकार की सहायता मिल सकती है, जिनमें आर्थिक सहायता भी शामिल है। उन्होंने अर्जेटीना के एक शहर कोडरेबा के एक बच्चे का उदाहरण दिया, जो अपनी स्टेम कोशिकाओं का प्रतिरोपण करवाना चाहता था, उसे एक कम्पनी ने चीन में यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए 60 हजार डॉलर की मदद की। पार्लाटो अपनी कम्पनी का मुख्यालय न्यूयार्क ले जाना चाहता है। इन दिनों वह न्यूयार्क में सम्भावित निवेशकों और फाउंडेशनों के साथ बैठक कर रहा है, जो पॉसिबल के साथ जुड़ना चाहते हों। (एजेंसी)
    https://www.posibl.com

  8. क्या कभी आपने google.com या pipl.com पर अपना नाम टाइप करके देखा है! आप
    हैरान रह जाएंगे कि आपके बारे में कितनी सारी जानकारी इंटरनेट पर मौजूद
    है।

    इसमें आपकी फोटो, ईमेल एड्रेस, फोन नबंर और परिवार की जानकारी भी हो सकती
    है। यह खतरनाक है और आने वाली किसी मुश्किल का संकेत भी। इसलिए जरूरत है
    इंटरनेट पर काम करते हुए सावधान रहने की।

    सोशल मीडिया प्रोफाइल न भरें
    जितनी ज्यादा सूचना आप ऑनलाइन शेयर करेंगे उतना ही किसी के लिए आप तक
    पहुंचना आसान हो जाएगा, इसलिए ऐसा न करें। अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर
    एक नजर डालें और दी गई जानकारी सीमित करें।

    जिन लोगों को आपका नाम, जन्मदिन, ईमेल एड्रेस और फोन नंबर जानने की जरूरत
    है, वह इस बारे में जानते हैं।

    हार्डवेयर पासवर्ड भी जरूरी
    मामला पीसी, लैपटॉप का हो या फिर मोबाइल का, अपनी डिवाइस में पासवर्ड
    जरूर सेट करें। डिवाइस के खो जाने या गलती से कहीं छूट जाने की स्थिति
    में यह पासवर्ड आपकी प्राइवेसी की सुरक्षा करेगा।

    पासवर्ड के अलावा ऐसे एप भी इंस्टॉल करें जो आपकी डिवाइस के खोने पर उसकी
    लोकेशन का पता लगा सकें। यह भी ध्यान रखें कि आपका कंप्यूटर और मोबाइल
    डिवाइसेज एंटी-मालवेअर एप्स और सॉफ्टवेयर से लोडिड हों।

    प्राइवेट ब्राउजिंग का इस्तेमाल करें
    यदि आप नहीं चाहते कि कोई भी आपके कंप्यूटर तक पहुंच बनाकर यह देखे कि आप
    ऑनलाइन क्या सर्फ कर रहे हैं तो 'प्राइवेट ब्राउजिंग' के ऑप्शन को एनेबल
    करें। यह सेटिंग सभी वेबब्राउजर में उपलब्ध होती है। यह कुकीज, टेम्परेरी
    फाइल और आपकी ब्राउजिंग हिस्ट्री को आपके विंडो क्लोज करने के बाद डिलीट
    कर देता है।

    पासवर्ड पर पकड़
    यह काफी मुश्किल है कि आप अपनी दर्जन भर ऑनलाइन सर्विसेज के लिए अलग-अलग
    पासवर्ड का इस्तेमाल करें और उन्हें याद रखें। इसलिए ज्यादातर लोग एक ही
    पासवर्ड का इस्तेमाल करते हैं। इसके साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि अगर
    फिशिंग अटैक या किसी और तरीके से किसी के हाथ आपका पासवर्ड लग गया तो वह
    आपके सभी अकाउंट्स तक पहुंच सकता है और आपके लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है।

    इस परेशानी से बचने के लिए पासवर्ड मैनेजर का इस्तेमाल करें। इसके लिए
    LAstPass एक अच्छा विकल्प है, जो पासवर्ड मैनेज करने का काम करता है।

    टू-फैक्टर ऑथेंटिफिकेशन
    आप अपने फेसबुक, गूगल, ड्रॉपबॉक्स, माइक्रोसॉफ्ट, ट्विटर और अन्य
    अकाउंट्स को टू-फैक्टर ऑथेंटिफिकेशन से लॉक कर सकते हैं। इसका मतलब यह है
    कि जब आप लॉग इन करते हैं तो आपको एक स्पेशल कोड एंटर करने की जरूरत होती
    है, जो कि वह साइट आपके फोन पर मैसेज के द्वारा भेजती है।

    कुछ सर्विसेज में इसकी जरूरत हर बार लॉग इन करते वक्त होती है और कुछ में
    सिर्फ तब, जब आप नया डिवाइस या वेब ब्राउजर इस्तेमाल करते हैं।

    गूगल अलर्ट सेट करें
    यह एक आसान तरीका है वेब की दुनिया में हो रही आपसे जुड़ी बातों को जानने
    का। इसके लिए आपको सिर्फ गूगल को यह बताना कि आप किन चीजों पर नजर रखना
    चाहते हैं। जब बात अपनी प्राइवेसी की है तो आप अपना नाम दर्ज कर सकते
    हैं। इसके अलावा जिन वेब पेज या ब्लॉग्स पर आप नजर रखना चाहते हैं उनके
    बारे में गूगल को बताकर भी अलर्ट सेट कर सकते हैं।

    पैसे देकर करें शॉपिंग
    बिजनेस इन्साइडर नामक एक वेबसाइट की मानें तो क्रेडिट कार्ड कंपनियां
    आपके द्वारा खरीदे जाने वाले सामान की जानकारी एडवरटाइजर्स को बेचती हैं।
    यदि आप नहीं चाहते कि ऐसा हो तो शॉपिंग करने के लिए पुराने तरीके का ही
    इस्तेमाल करें। यानी नगद दें और सामान लें।


    सोशल नेटवर्क एक्टिविटी को प्राइवेट रखें
    फेसबुक सेटिंग चेक करें और वहां अपने दोस्तों को ही अपनी एक्टिविटी से
    जुड़ने की इजाजत दें। ऊपर की ओर दाईं तरफ बने प्राइवेसी सेटिंग के विकल्प
    पर जाएं और वहां 'हू कैन सी माई स्टफ' पर जाकर विकल्प सेट करें। ट्विटर
    के लिए भी सेटिंग विकल्प पर जाएं। यहां जाकर आप हर तरह की प्राइवेसी
    सेटिंग कर सकते हैं।

    मसलन उस बॉक्स के बारे में जो ट्विटर को यह अनुमति देता है कि वह आपकी
    ट्वीट्स के साथ आपकी लोकेशन भी दिखाए या फिर यह कि आपके ट्वीट सिर्फ वही
    लोग देख पाएं, जिन्हें आपने अनुमति दी है। इसी तरह गूगल + पर भी आप
    सेटिंग्स में जाकर यह तय कर सकते हैं कि आपसे कौन बात कर सकता है और आपके
    पोस्ट्स पर कौन कमेंट कर सकता है। इस तरह आप सोशल नेटवर्क से जुड़े
    रहेंगे, वो भी सुरक्षा के साथ।

    इंटरनेट की दुनिया में घूमते हुए कहीं आप अपनी प्राइवेसी को तो खतरे में
    नहीं डाल रहे? यह सवाल कुछ लोगों को हैरान कर सकता है, मगर सच यही है कि
    हर बात के लिए इंटरनेट और सोशल नेटवर्किंग पर बढ़ती निर्भरता के कारण
    इंटरनेट यूजर की निजी जानकारी बेहद आसानी से सबके पास जा रही है।

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  9. अगर आप भी ऑनलाइन शॉपिंग करना पसंद करते हैं, तो सावधान हो जाइए, क्योंकि
    आप साइबर अपराधियों के निशाने पर हो सकते हैं. त्योहारों के मौके पर
    साइबर क्राइम के ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें साइबर अपराधी इंटरनेट
    इस्तेमाल करने वालों को अपना निशाना बनाने की फिराक में हैं.

    कंप्‍यूटर या स्मार्टफोन की स्क्रीन पर पूरी दुनिया का बाजार सिमट आया
    है. लोग ऑनलाइन शॉपिंग का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि जो लोग
    ऑनलाइन शॉपिंग को लेकर पूरी तरह से बेफिक्र हैं, वे सावधान हो जाएं,
    क्योंकि साइबर अपराधी की नज़र आप पर हो सकती है.

    नॉर्टन बाई सीमनटेक के कंट्री मेनेजर रितेश चोपड़ा कहते हैं, 'अभी दिवाली
    का टाइम है, हमने कुछ ऐसे केस देखे हैं जहां ईमेल भेजी गई हैं और फेक
    डोमेन नेम यूज किया गया है, ताकि ग्राहक उस ईमेल को खोलें और उस साइट पर
    जाएं जहां फेक डोमेन नेम यूज किया गया है.

    ये मेल पॉपुलर ब्रांड के नामों से भेजे गए हैं और इन पर 80 फीसदी
    डिस्काउंट भी दिए गए हैं, ताकि लोग दिवाली पर नई चीजें खरीदें.

    ऑनलाइन शॉपिंग का बाजार ही इतना बड़ा है कि साइबर अपराधी इस बाजार में
    अपने शिकार की फिराक में रहते हैं. एक अनुमान के मुताबिक भारत में ऑनलाइन
    शॉपिंग का बाजार 4 हजार करोड़ रुपये का हो सकता है.

    ऐसोचैम के सेक्रेटरी जनरल डी. एस. रावत कहते हैं, 'ऑनलाइन शॉपिंग
    हिंदुस्तान में धीरे-धीरे वेस्टर्न पैटर्न पर आ गई है, इसमें बहुत ज्यादा
    बढ़त आई है. एक अनुमान के मुताबिक इसमें 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है,
    कुछ आंकड़ों के मुताबिक यह 4 हजार करोड़ रुपये का बाजार हो गया है.

    आजकल ऑनलाइन ऑफर्स की बरसात करने वाले ई-मेल्स का आना आम बात है लेकिन
    इसमें से कई ई-मेल आपको गलत वेबसाइट की तरफ ले जा सकते हैं. अगर आपने
    इनमें अपनी जानकारी दे दी तो साइबर अपराधी इसका फायदा उठा सकते हैं. इस
    तरह के मामलों को स्पियर फिशिंग कहते हैं.

    यूं बचें ऑनलाइन शॉपिंग में धोखा खाने से:
    - अनजान वेबसाइट पर शॉपिंग न करें.

    - डिस्काउंट्स के चक्कर में पड़कर किसी स्कैम का शिकार न हों.

    - पेमेंट करते हुए सचेत रहें.

    - किसी और के मोबाइल फोन से शॉपिंग करना भी खतरनाक हो सकता है.

    - अनसेक्योर्ड इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल ऑनलाइन पेमेंट या शॉपिंग के लिए न करें.

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  10. क्या आप कई धंधों में फेल होने के बाद 50 हजार रुपये की पूंजी लगाकर
    हजारों करोड़ रुपये की पूंजी वाली कंपनी खड़ी करने का सपना देख सकते हैं?
    और फिर अमिताभ बच्चन जैसे महंगे सितारे को अपनी कंपनी के साथ जोड़कर
    उन्हें भी 6014 फीसदी का मुनाफा दिलवा सकते हैं?


    कारोबार की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रहे वीएसएस मणि ने न सिर्फ ऐसे
    सपने देखे, बल्कि उन्हें हकीकत में तब्दील भी कर डाला है। प्रोडक्ट और
    सर्विस सर्च कंपनी 'जस्टडायल' ने मई में आईपीओ जारी कर बाजार से 905
    करोड़ रुपये जुटाए थे। चालू वर्ष में जस्टडायल का आईपीओ सबसे बड़ा रहा।
    इसके लिए 12 गुना अधिक आवेदन मिले थे।

    गैरज से लेकर स्टॉक एक्सचेंज का सफर

    लोकल सर्च इंजन कंपनी जस्टडायल के मालिक वीएसएस मणि ने 1996 में महज 50
    हजार रुपये की पूंजी, 6 कर्मचारियों, किराए पर लिए कुछ कम्प्यूटर, मांग
    कर लाए गए फर्नीचर के साथ एक गैराज में जस्ट डायल की शुरुआत की थी। तब
    मणि की उम्र 29 साल थी। उस दौर को याद करते हुए मणि बताते हैं, 'जब आपके
    पास पैसे नहीं होते हैं तो आप नई सोच के साथ कारोबार खड़े करने के बारे
    में सोचते हैं।' मणि मुस्कुराते हुए कहते हैं, 'आप जस्टडायल और गूगल के
    बीच समानताएं देख सकते हैं। लेकिन हमारा जन्म गूगल से पहले हुआ था।'
    कंपनी को कामयाबी मिलती गई। 2007 में मणि ने जस्टडायल को इंटरनेट पर लाने
    का फैसला किया और जस्टडायल.कॉम की शुरुआत की। 5 जून को जस्टडायल की शेयर
    लिस्टिंग के बाद 611 रुपये पर बंद हुए। यह इश्यू प्राइस से 15 फीसदी
    ज्यादा है। इससे कंपनी के फाउंडर वीएसएस मणि की दौलत 1,241 करोड़ रुपये
    है। उनकी कंपनी में 30.28 फीसदी हिस्सेदारी है। आईपीओ में मणि ने अपने
    हिस्से के 15.57 लाख शेयर बेचे, जिससे उन्हें 87 करोड़ रुपये मिले। 31
    मार्च, 2013 तक जस्टडायल के पास 91 लाख ग्राहकों का डेटाबेस है।
    जस्टडायल.कॉम के मुताबिक 31 दिसंबर, 2012 तक उस वित्तीय वर्ष के पहले नौ
    महीनों में जस्टडायल ने 26.72 करोड़ लोगों के सवालों के जवाब दिए थे।
    आप कंपनी की कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि इस समय
    जस्टडायल में करीब 2700 लोग नौकरी करते हैं।

    नौकरी करते हुए आया धंधे का आइडिया

    मणि ने 1987 में येलो पेजेस कंपनी यूनाइटेड डेटाबेस इंडिया में नौकरी
    शुरू की। यहां उन्होंने दो साल नौकरी की। इसी दौरान उनके दिमाग में ख्याल
    आया कि येलो पेजेस की तर्ज पर अगर टेलीफोन पर डेटाबेस दिया जाए तो अच्छा
    बिजनेस हो सकता है। इसी सोच को हकीकत में तब्दील करते हुए मणि ने कुछ
    दोस्तों की मदद से 'आस्क मी' की 1989 में शुरुआत की। लेकिन वह बिजनेस
    फ्लॉप हो गया। मणि मानते हैं, 'आस्क मी का प्रयोग इसलिए नाकाम हो गया,
    क्योंकि उस दौर में सिर्फ एक फीसदी भारतीय टेलीफोन का इस्तेमाल करते थे
    और अर्थव्यवस्था भी खस्ताहाल थी। हमने जो टेलीफोन नंबर चुने थे, वे भी
    गलत थे। आस्क मी तो लोगों की जुबान पर रहता था, लेकिन नंबर किसी को याद
    नहीं रहता था।'

    पेट पालने के लिए शादियां तक करवाईं

    'आस्क मी' के नाकाम होने के बाद मणि पर परिवार का पेट पालने का दबाव था
    और उन्हें कुछ जल्दी करना था। इसी दबाव में मणि और उनके दोस्तों ने
    50,000 रुपये लगाकर वेडिंग प्लानर बिजनेस चालू किया। उसके बारे में मणि
    बताते हैं, 'हमने उस धंधे में 2-3 लाख रुपये का मुनाफा कमाया। लेकिन मुझे
    वह काम कुछ अटपटा लगा और मैंने उससे बाहर आने का फैसला किया। इसके बाद
    मैं अपने पुराने सपने को पूरा करने में जुट गया।' 1992 से लेकर 1996 तक
    का समय मणि के लिए बहुत संघर्ष भरा था। मणि जस्टडायल को और जल्दी शुरू
    करना चाहते थे। लेकिन उनके पास पर्याप्त पूंजी नहीं थी। उन दिनों ओवाईटी
    के तहत फोन लाइन का खर्च 15,000 रुपये था या फिर आप कुछ साल का इंतजार
    करना पड़ता था। मणि के पास यह पूंजी भी नहीं थी। मणि ने 3 हजार रुपये
    लगाकर फोन के कनेक्शन के लिए अप्लाई किया। एक साल बाद उन्हें फोन कनेक्शन
    मिला और उन्होंने जस्टडायल की शुरुआत की।


    बिजनेस मॉडल

    'आस्क मी' की नाकामी से सीखते हुए मणि ने 'जस्टडायल' की शुरुआत की। लेकिन
    पुरानी गलतियां नहीं दोहराईं। बकौल मणि, 'हमने इस बार ब्रांड नेम की जगह
    टेलीफोन नंबर पर ध्यान दिया और हमें ऐसा नंबर मिला जिसमें 7 बार 8 आता
    है। हमने तजुर्बेकार पेशेवरों को नौकरी देने के बजाय कॉलेज के स्टूडेंट्स
    को नौकरी दी। इन लोगों ने मुंबई में दुकान-दुकान जाकर सूचनाएं इकट्ठी कीं
    और फिर उनका एक डेटाबेस तैयार किया। इसके बाद कंपनी ने अपना सॉफ्टवेयर
    तैयार किया, ताकि कुछ ही पलों में डेटाबेस से जरूरी सूचना सामने आ जाए।
    हम प्रचार नहीं कर सकते थे। इसलिए अपने विज्ञापनदाताओं से कहा कि वे अपने
    कर्मचारियों से हमारी सर्विस का इस्तेमाल करने को कहें। जहां तक बात
    आमदनी की है तो जिस दसवें क्लाइंट से हमने बात की थी, वह अपनी सूचना
    लिस्ट करवाने के एवज में पैसे देने को राजी हो गया था। इसके बाद हमने कभी
    पीछे मुड़कर नहीं देखा।' मणि की कंपनी जस्टडायल यलो पेजेस की तर्ज पर
    विभिन्न उत्पाद और सेवाएं देने वाली कंपनियों के बारे में सूचनाएं मुहैया
    कराती है। ऐसी सूचनाएं पहले टेलीफोन के जरिए दी जाती थीं। लेकिन मणि ने
    अब इनका विस्तार इंटरनेट, प्रिंट और एसएमएस तक कर दिया है।

    परिवार की मदद के लिए छोड़ा सीए का इम्तिहान

    मणि उस सोच को धवस्त करते हैं, जिसके मुताबिक कामयाबी के लिए बहुत ज्यादा
    पढ़ाई-लिखाई और डिग्रियां जरूरी होती हैं। लाखों युवाओं की तरह मणि का
    कभी सपना सीए बनना था। इसके लिए मणि ने ग्रैजुएशन के साथ सीए का कोर्स
    शुरू किया। लेकिन कुछ समय बाद परिवार को आर्थिक मदद देने की वजह से
    उन्हें सीए का इम्तिहान छोड़ना पड़ा और उन्होंने येलो पेजेस के साथ
    सेल्समैन का काम शुरू किया।

    अब भी दौलत नहीं, लिस्टिंग की कामयाबी से ज्यादा खुश हैं मणि

    करोड़ों रुपये का कारोबारी 'साम्राज्य' खड़ा करने के बाद मणि अभी अपनी
    दौलत के बारे में नहीं सोच रहे। उन्हें तो जस्ट डायल की लिस्टिंग के रूप
    में 14 साल की मेहनत का इनाम मिला है। 1999 में उन्होंने लिस्टिंग की तरफ
    पहली बार कदम बढ़ाए थे। वह इसके लिए छह बार कोशिश कर चुके हैं। अमेरिकी
    एक्सचेंज नैस्डेक पर लिस्टिंग की उन्होंने दो बार कोशिश की। भारत में भी
    मणि ने दो बार आईपीओ लाने की कोशिश की। पहली बार अगस्त, 2011 और दूसरी
    बार इसके साल भर बाद। एक बार तो उनके मन में किसी छोटे एक्सचेंज पर भी
    कंपनी की लिस्टिंग का ख्याल आया था। उनकी आखिरी कोशिश कामयाब रही और मई
    में आया आईपीओ कामयाब रहा। जस्ट डायल का 950 करोड़ रुपये का आईपीओ इस साल
    का सबसे बड़ा इश्यू था। यह किसी भारतीय इंटरनेट कंपनी का भी सबसे बड़ा
    आईपीओ है। यह 12 गुना ओवरसब्सक्राइब हुआ था। पीई इन्वेस्टर्स को इश्यू
    में अपने शेयर बेचने पर 850 फीसदी का रिटर्न मिला। सिकोइया कैपिटल ने इस
    कंपनी में 2009 और उसके बाद 2012 में इन्वेस्टमेंट किया था। इसके एमडी
    शैलेंद्र सिंह ने बताया, 'हम जानते थे कि मणि के रूप में हमें स्पेशल
    फाउंडर मिला है। वह प्रोडक्ट और यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए
    छोटी से छोटी बात पर ध्यान देते हैं।'

    अमिताभ को भी करवाया जबर्दस्त फायदा

    कई धंधों में हाथ आजमा चुके और कारोबार में नाकामियों का लंबा दौर देख
    चुके बॉलीवुड स्टार अमिताभ बच्चन दिसंबर, 2010 में जस्टडायल से जुड़े थे।
    तब से वे इसके ब्रांड एम्बेसडर हैं। अमिताभ की कंपनी में एक फीसदी की
    हिस्सेदारी है।
    जस्टडायल का आईपीओ आने के महज 20 दिनों में अमिताभ बच्चन को 6014 फीसदी
    का फायदा हुआ है। दरअसल, जस्टडायल ने प्रति शेयर 10 रुपये के हिसाब से
    अमिताभ को 62,794 शेयर आवंटित किए थे। बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज
    में कंपनी के शेयर 590 रुपये के भाव पर लिस्ट हुए। इसके बाद इनमें करीब
    15 फीसदी बढ़त हुई और वे 611.45 पर बंद हुए। इस तरह अमिताभ के शेयरों की
    कीमत 6.27 लाख रुपये से बढ़कर 3.84 करोड़ रुपये हो गई। कंपनी ने आईपीओ की
    इश्यू प्राइस 530 रुपये प्रति शेयर तय की थी। हालांकि, एक साल के लॉक-इन
    पीरियड के कारण अमिताभ को इस बढ़त का लाभ नहीं मिल पाएगा। लेकिन उनकी
    पूंजी बढ़ गई है।

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  11. (जानकारी पाने के लिए पहले राज्य फिर जिला और डाक घर चुनें)
    pincode.net.in में 1,52,000 से ज़्यादा डाक घरों की सूची है

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  12. वेब कंपनियां नहीं चाहतीं कि आप उनकी वेबसाइट्स पर बना अपना अकाउंट डिलीट
    करें। अगर आप अपना अकाउंट डिलीट करते हैं, तो यह उनके लिए नुकसान है। कुछ
    कंपनियों ने अकाउंट डिलीट करने की प्रोसेस आसान रखी है, जबकि ज्यादातर पर
    यह प्रोसेस बहुत मुश्किल है। कभी-कभार तो अकाउंट डिलीट करना असंभव सा
    लगता है। लेकिन JustDelete.me ने इसे आसान बना दिया है।

    अगर आप किसी वेबसाइट पर अपना अकाउंट डिलीट करने का लिंक नहीं खोज पा रहे
    हैं, तो JustDelete.me पर जाइए। इस वेबसाइट पर ढेरों वेबसाइट्स के नाम और
    उन पर अकाउंट डिलीट करने के लिंक्स हैं।

    JustDelete.me पर सबसे ऊपर सर्च करने का भी ऑप्शन है। आप जहां से अपना
    अकाउंट डिलीट करना चाहते हैं, उस वेबसाइट का नाम लिख कर सर्च कर सकते
    हैं।

    यहां वेबसाइट्स से अकाउंट डिलीट करने की प्रोसेस को हरे, पीले, लाल और
    काले रंग के जरिए दिखाया गया है। अकाउंट डिलीट करना हरे रंग वाली
    वेबसाइट्स पर आसान, पीले पर औसत, लाल पर कठिन और काले पर असंभव है।

  13. answers.com में क्या है खास: इस किस्म की वेबसाइट का इससे अच्छा नाम कोई
    और नहीं हो सकता। साइट है भी अपने नाम के मुताबिक ही, जहां मनोरंजन,
    तकनीक, भोजन, कारोबार, जानवर, कार, खेल, राजनीति, हॉबी जैसे विषयों पर
    हजारों सवालों के जवाब दिए गए हैं। आप यहां सवाल पूछने के साथ-साथ जवाब
    भी दे सकते हैं, हालांकि इस के लिए आपको रजिस्टर करना होगा। साइट का
    चेहरा-मोहरा आकर्षक है।

    answers.com इसलिए भी खास है कि यह आपको पांच इंटरनैशनल भाषाओं में जवाब
    देती है। ये जवाब होते हैं WikiAnswers, ReferenceAnswers और
    VideoAnswers से। यह मोबाइल और डेस्कटॉप दोनों पर बखूबी काम करती है।
    फिलहाल इस वेबसाइट का मोबाइल ऐप नहीं है लेकिन इसकी मोबाइल साइट है, जो
    फोन पर आसानी से खुल जाती है।

  14. वेबकैम का Magic

    Saturday, September 28, 2013

    होम सिक्योरिटी सिस्टम

    आपके पीसी का वेबकैम आपकी ऐबसेंस में घर या ऑफिस में होने वाली
    एक्टिविटीज पर नजर रखेगा और इसकी लाइव फीड को आप दूर बैठे किसी भी पीसी
    पर देख सकेंगे। इससे आपका वेबकैम रिमोट सिक्योरिटी सिस्टम में कन्वर्ट हो
    जाएगा। साथ ही, मोशन सेंसिंग फीचर से जैसे ही चलती-फिरती चीज नजर आएगी तो
    वह तुरंत रिकॉर्डिग शुरू कर देगा।

    वेबसाइट : www.yawcam.com

    www.vitamindinc.com

    लिनक्स यूजर्स : www.lavrsen.dk

    फेस को बनाएं पासवर्ड

    पीसी में फेस रिकग्नाइजेशन सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के बाद जैसे ही
    कंप्यूटर के सामने बैठेंगे, वह वेबकैम की मदद से खुद ही लॉग-इन कर देगा,
    यानी आपका चेहरा पासवर्ड का काम करेगा।

    वेबसाइट : www.keylemon.com

    luxand.com/blink

    bananascreen.en.softonic.com

    ऑप्टिकल करेक्टर रिकग्नाइजेशन

    आप अब वेबकैम से किताब, नोट्स या बिजनेस कार्ड को रियलटाइम टेक्स्ट में
    कन्वर्ट कर सकते हैं। यूजर वेबकैम को ओसीआर यानी ऑप्टिकल करेक्टर
    रिकग्नाइजेशन की तरह भी यूज कर सकते हैं और माइक्रोसॉफ्ट डॉक्यूमेंट
    इमेजिंग, गूगल डॉक्स, एबी फाइन रीडर और एवरनोट की हेल्प से इमेज को
    टेक्स्ट में कन्वर्ट कर सकते हैं।

    वेबसाइट : www.abbyy.com

    evernote.com

    वीडियो ई-मेल

    आप फ्रेंड्स-रिलेटिव्स से ईमेल या चैट से कॉन्टैक्ट में रहते होंगे। अगर
    उनके पीसी में वेबकैम नहीं है, तो वीडियो चैटिंग मुश्किल है, लेकिन आप
    उन्हें वीडियो ई-मेल कर सकते हैं। आईजॉट सॉफ्टवेयर वेबकैम के जरिए
    रिकॉर्डिग करके उसे फ्रेंड्स या रिलेटिव्स को मेल कर सकते हैं। साथ ही,
    अगर रिलेटिव के पास एंड्रॉयड या आईफोन है, तो वह आपके वीडियो ईमेल को फोन
    पर ही एक्सेस कर सकता है।

    वेबसाइट : www.eyejot.com

    फोटोबूथ

    कैमरॉयड एक वेब बेस्ड फोटो एप्लीकेशन है, जहां यूजर सीधे लॉग-इन करके
    अलग-अलग फोटो इफेक्ट्स के साथ अपनी फोटो खींच सकते हैं। इसके लिए कोई
    सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है। यहां फोटो इफेक्ट्स के अलावा
    कई फिल्टर्स और फ्रेम्स भी हैं।

    वेबसाइट : www.cameroid.com

    www.seenly.com

    www.webcammax.com

    www.shiningmorning.com

    हैंडराइटिंग को बनाएं फॉन्ट

    आप यूजर वेबकैम की हेल्प से खुद की हैंडराइटिंग में फॉन्ट भी बना सकते
    हैं। यूजर इन फॉन्ट्स को पर्सनल टच देने के लिए ईमेल या डॉक्यूमेंट्स में
    यूज कर सकते हैं। वेबसाइट पर जाकर टैंपलेट डाउनलोड कर लें और अपनी
    राइटिंग में टैंपलेट फिल कर दें। इसके बाद वेबकैम से स्कैन कर फॉन्ट को
    साइट पर अपलोड कर दें और टीटीएफ फॉर्मेट में सेव कर लें।

    वेबसाइट : www.myscriptfont.com

    बारकोड रीडर

    अपने स्मार्टफोन पर बारकोड या क्यूआर कोड को एप्स की हेल्प से रीड करना
    आसान है। आप अपने पीसी के वेबकैम पर भी इसे आजमा सकते हैं। बस वेबकैम को
    बारकोड या क्यूआरकोड के सामने रखें। सॉफ्टवेयर कुछ ही सेकंड में छिपे हुए
    कंटेन्ट को पढ लेगा।

    वेबसाइट : www.bcwebcam.de

    बनाएं टाइम लेप्स वीडियो

    टाइम लेप्स फोटोग्राफी टेक्नोलॉजी है, जिससे मोशन में मल्टीपल
    फोटोग्राफ्स लिए जाते हैं। इन फोटोग्राफ्स में मोशन का आभास होता है।
    इसके लिए आपका टेक्नोसेवी होना जरूरी नहीं। यह काम वेबकैम और सॉफ्टवेयर
    खुद कर लेंगे।

    वेबसाइट :

    sourceforge.net/projects/tilaphos

    3डी गेमिंग

    वेबकैम के साथ गेमिंग के लिए पीसी में एडोब फ्लैश प्लेयर डाउनलोड करना
    होगा। इंटरनेट पर ऐसे ऑनलाइन गेम्स हैं, जिनमें वेबकैम यूज कर सकते हैं।
    यहां तक कि 3डी इफेक्ट्स वाले गेम्स भी।

    वेबसाइट : www.newgrounds.com

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  15. इंटरनेट सर्च इंजन गूगल ने उत्तराखंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों में लापता
    लोगों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने के लिए 'पर्सन फाइंडर' ऐप्लिकेशन
    की पेशकश की है। गूगल का पर्सन फाइंडर वेब आधारित ऐप्लिकेशन है, जिसकी
    मदद से लोग अपने मित्रों और संबंधियों के गुम होने की जानकारी दे सकते
    हैं या उनके बारे में सर्च कर सकते हैं।

    गूगल के वरिष्ठ उत्पाद प्रबंधक जयंत मैसूर ने बताया, "उत्तराखंड भारी
    बाढ़ से प्रभावित हुआ है चूंकि आपसी संवाद के नज़रिए से राज्य में
    ज्यादातर इलाके बेहद दुर्गम हैं, इसलिए गूगल आपदा दल आपके लिए पर्सन
    फाइंडर लाया है."


    हिन्दी में जानकारी

    गूगल के इस ऐप्लिकेशन ने 2011 में जापान में आई सुनामी के दौरान लोगों को
    खोजने में काफी मदद की थी। एक अनुमान के मुताबिक उत्तराखंड में आई इस
    आपदा में अब भी 50,000 से अधिक लोग विभिन्न इलाकों में फँसे हुए हैं।


    सरकार ने पीड़ित लोगों की मदद या उनके संबंधियों को उनके बारे में
    जानकारी देने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। गूगल की यह सेवा
    सरकारी इंतजामों के अलावा है। यह टूल हिन्दी और अंग्रेजी दोनों में
    उपलब्ध है। गूगल पर्सन फाइंडर को भेजे गए आंकड़े कोई भी इंटरनेट के जरिए
    देख सकता है.


    अपने परिजनों को खोजिए

    कोई भी व्यक्ति सर्च बॉक्स में जाकर अपने परिचित व्यक्ति का नाम लिखकर
    उसे खोज सकता है। इस टूल के जरिए संबंधित व्यक्ति का नाम, उसकी रूपरेखा,
    घर का पता और उसकी मौजूदा स्थिति के बारे में जाना जा सकता है।

    अपने लापता परिजनों का डाटा व फोटो अपलोड कीजिए
    यदि किसी का परिचित न मिल रहा हो तो वह उसकी गुमशुदगी की जानकारी पर्सन
    फाइंडर पर पोस्ट कर सकता है। इससे लाभ ये होगा कि यदि वो घायल या बेहोशी
    की हालत में है तो उसकी मदद करने वाले लोगों को उसके परिजनों के बारे में
    पता चल जाएगा और वो आपको सूचित कर सकेंगे।


    गूगल पर्सन फाइंडर की सेवाओं के लिए यहां क्लिक करें.

    http://google.org/personfinder/2013-uttrakhand-floods

    गूगल पर्सन फाइंडर को हिन्दी में उपयोग करने के लिए यहां क्लिक करें.

    http://google.org/personfinder/2013-uttrakhand-floods?lang=hi

  16. इंटरनेट सर्च इंजन गूगल ने उत्तराखंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों में लापता
    लोगों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने के लिए 'पर्सन फाइंडर' ऐप्लिकेशन
    की पेशकश की है। गूगल का पर्सन फाइंडर वेब आधारित ऐप्लिकेशन है, जिसकी
    मदद से लोग अपने मित्रों और संबंधियों के गुम होने की जानकारी दे सकते
    हैं या उनके बारे में सर्च कर सकते हैं।

    गूगल के वरिष्ठ उत्पाद प्रबंधक जयंत मैसूर ने बताया, "उत्तराखंड भारी
    बाढ़ से प्रभावित हुआ है चूंकि आपसी संवाद के नज़रिए से राज्य में
    ज्यादातर इलाके बेहद दुर्गम हैं, इसलिए गूगल आपदा दल आपके लिए पर्सन
    फाइंडर लाया है."


    हिन्दी में जानकारी

    गूगल के इस ऐप्लिकेशन ने 2011 में जापान में आई सुनामी के दौरान लोगों को
    खोजने में काफी मदद की थी। एक अनुमान के मुताबिक उत्तराखंड में आई इस
    आपदा में अब भी 50,000 से अधिक लोग विभिन्न इलाकों में फँसे हुए हैं।


    सरकार ने पीड़ित लोगों की मदद या उनके संबंधियों को उनके बारे में
    जानकारी देने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। गूगल की यह सेवा
    सरकारी इंतजामों के अलावा है। यह टूल हिन्दी और अंग्रेजी दोनों में
    उपलब्ध है। गूगल पर्सन फाइंडर को भेजे गए आंकड़े कोई भी इंटरनेट के जरिए
    देख सकता है.


    अपने परिजनों को खोजिए

    कोई भी व्यक्ति सर्च बॉक्स में जाकर अपने परिचित व्यक्ति का नाम लिखकर
    उसे खोज सकता है। इस टूल के जरिए संबंधित व्यक्ति का नाम, उसकी रूपरेखा,
    घर का पता और उसकी मौजूदा स्थिति के बारे में जाना जा सकता है।

    अपने लापता परिजनों का डाटा व फोटो अपलोड कीजिए
    यदि किसी का परिचित न मिल रहा हो तो वह उसकी गुमशुदगी की जानकारी पर्सन
    फाइंडर पर पोस्ट कर सकता है। इससे लाभ ये होगा कि यदि वो घायल या बेहोशी
    की हालत में है तो उसकी मदद करने वाले लोगों को उसके परिजनों के बारे में
    पता चल जाएगा और वो आपको सूचित कर सकेंगे।


    गूगल पर्सन फाइंडर की सेवाओं के लिए यहां क्लिक करें.

    http://google.org/personfinder/2013-uttrakhand-floods

    गूगल पर्सन फाइंडर को हिन्दी में उपयोग करने के लिए यहां क्लिक करें.

    http://google.org/personfinder/2013-uttrakhand-floods?lang=hi

  17. आज में आप को एक बोहत अच्छी जानकारी देने जा रहा हु . अगर आप का आधार
    कार्ड गुम हो जाता है, तो, जा फिर बनाने के बाद आता ही नहीं है, जा
    फिर 6 महीने के बाद आता है , तो
    आप फिर बी अपना आधार कार्ड आज ही ले सकते हो , बस आप को कुछ मेहनत करनी है ,

    Note.. जब आप आधार कार्ड बनबाने जाते हो तो आप को एक स्लिप दी जाती है बस
    बो सिल्प आप के पास हो तो आप अपना आधार कार्ड प्राप्त kar सकते हो,


    1) सब से पहले आप को इस वेबसाइट पर जाना होगा,

    http://eaadhaar.uidai.gov.in/eDetails.aspx

    2) Slip Me Di huye Jnakari aap Ko is Website Me dene Hogi .Or SubMit
    Par Click Karna

    Hoga .

    3) Click Krte Hi aap Ko apne Mobile Par EK Code aye ga .

    Jo Mobile NO aap NE Slip ME Deya Huya Hai .Is Code KO aap Ne WEbsite
    ME dena Hoga .

    4) Fir AAp apna आधार कार्ड Download Kar Sakte Ho .Or Print Le Sakte Ho .

    Note--- Agar AAp ke Mobile Par Code Nahi Ata hai TO aap apna No fir SE
    De Sakte Ho .Is

    Mobile No Par Par aap ko Code Mil Jaye ga .

    Kuchkhaskhabar@gmail.com

    09988060863

    Munish Kumar Garg

  18. बोहत बार हमारे कंप्यूटर में किसी फाइल का डुप्लीकेट फाइल बन कर डंप हो
    जाता है ,बो डुप्लीकेट फाइल का हमे पता ही नहीं चलता की बो कहा पर स्टोर
    है ,

    अगर हम इस को डिलीट करना चाहते है ,तो हमे अपने पुरे कंप्यूटर में देखना
    होगा जिस से हमें बोहत टाइम लगे गा, में आप को एक सॉफ्टवेर के बारे में
    बताता हु.जे सॉफ्टवेर अपने आप डुप्लीकेट फाइल को खोज कर डिलीट कर देता है
    .

    डाउनलोड सॉफ्टवेर

    http://www.digitalvolcano.co.uk/duplicatecleaner.html

    kuchkhaskhabar@gmail.com

  19. सब से पहले आप www.google.कॉम खोलो
    फिर सर्च बॉक्स में सर्च Google Gravity लिखे,
    और सर्च करो ,
    सर्च करते ही आप के सामने जे लाइन होगी ,
    Google Gravity - Mr.doob
    बस इस लाइन पर क्लिक कर दो,
    फिर देखो मेरा Google बाबा केसे डांस करता है ,

  20. कई बार हार्डडिस्क क्रैश होने या लैपटॉप के चोरी या खोने के बाद सबसे बड़ी
    टेंशन होती है डाटा कैसे हासिल किया जाए। पेनड्राइव में भी आप सीमित
    मात्रा में ही डाटा स्टोर कर सकते हैं। लेकिन अगर पेनड्राइव भी गुम जाए
    तो क्या करेंगे? ऐसे में ऑनलाइन डाटा स्टोरेज सबसे बेस्ट ऑप्शन है, जहां
    यूजर डाटा को सुरक्षित रख सकते हैं और उसे कभी भी-कहीं भी एक्सेस कर सकते
    हैं। जानिए कुछ बेस्ट ऑनलाइन डाटा स्टोरेज ऑप्शंस के बारे में..

    ADri1e

    एड्राइव उन कुछ चुनिंदा साइट्स में से एक है जो अपने बेसिक प्लान में
    मेंबर को पर्सनल यूज के लिए 50 जीबी स्टोरेज फ्री देती है। एड्राइव के
    वेब-इंटरफेस सॉफ्टवेयर में यूजर डाटा को स्टोर करने के अलावा एडिट भी कर
    सकते हैं। इसका फायदा यह है कि इसके लिए कोई सॉफ्टवेयर पीसी पर डाउनलोड
    नहीं करना पड़ता। वहीं डेस्कटॉप क्लाइंट को डाउनलोड करने का ऑप्शन सिर्फ
    पेड प्लांस में है। यूजर इसके फाइल मैनेजर विंडो में स्टोर डाटा को बड़ी
    आसानी से सर्च कर सकते हैं। वहीं एड्राइव मल्टीटॉस्किंग है, जहां यूजर
    अपलोडिंग के दौरान डाउनलोडिंग भी कर सकते हैं। एड्राइव पर यूजर एमएस ऑफिस
    शीट्स, फोल्डर्स, एप्लीकेशंस, फोटोग्राफ्स, म्यूजिक और वीडियो फाइल्स
    वगैरह स्टोर कर सकते हैं। वहीं डाटा की ऑनलाइन शेयरिंग का भी ऑप्शन है।
    एड्राइव की जोहो एडीटर एप्लीकेशन से यूजर वर्ड डॉक्यूमेंट को ऑनलाइन ही
    एडिट और सेव कर सकते हैं।

    वेब लिंक : 222.adri1e.com

    Badongo

    ऑनलाइन स्टोरेज में यह अकेली ऐसी साइट है जो फ्री में अनलिमिटेड ऑनलाइन
    स्टोरेज का ऑफर दे रही है। लेकिन इसमें पेंच यह है कि फ्री यूजर्स एक दिन
    में 4.8 जीबी डाटा ही डाउनलोड कर सकते हैं और डाउनलोडिंग स्पीड 500
    केबीपीएस तक ही सीमित रहती है। साथ ही एक बार में एक ही फाइल डाउनलोड कर
    सकते हैं। वहीं बाडोंगो में यूजर कई तरह से अपने अकाउंट को एक्सेस कर
    सकते हैं। यहां यूजर वेब फाइल मैनेजर के अलावा विंडोज, मैक पीसी या आईफोन
    पर भी एक्सेस कर सकते हैं। वेब फाइल मैनेजर पर यूजर फोल्डर बनाने के
    अलावा मल्टीपल फाइल्स भी अपलोड कर सकते हैं। वहीं डेस्कटॉप फाइल मैनेजर
    पर ड्रैग एंड ड्रॉप का भी ऑप्शन है।

    वेब लिंक : 222.badongo.com

    Bo3

    बॉक्स पर यूजर 5 जीबी से 50 जीबी तक का स्टोरेज फ्री पा सकते हैं, लेकिन
    यह निर्भर करता है यूजर के साइन-अप पर। अगर यूजर डेस्कटॉप साइन-अप का
    ऑप्शन चुनता है तो उसे 5 जीबी स्टोरेज फ्री मिलता है वहीं आईपैड एप को
    साइन-अप करने पर 50 जीबी स्टोरेज फ्री मिलता है। वहीं विंडोज या मैक यूज
    करने वाले डेस्कटॉप क्लाइंट्स के लिए सिंक का ऑप्शन नहीं है। बॉक्स की
    एंड्रॉयड, टेबलेट, आईफोन-आईपैड, ब्लैकबेरी या प्लेबुक एप्स भी उपलब्ध
    हैं। एप्स यूज करने वाले कंटेंट को अपलोड करने के अलावा ईमेल लिंक्स से
    फाइल्स शेयर भी कर सकते हैं। बॉक्स की खूबी है कि इसके वेब बेस्ड फाइल
    मैनेजर से यूजर पीसी से फाइल्स को ड्रेग या ड्रॉप कर सकते हैं। साथ ही
    फोल्डर क्रिएट करने के साथ-साथ गूगल डॉक्स की मदद से वर्ड या एक्सेल
    डॉक्यूमेंट्स भी बना सकते हैं।

    वेब लिंक : 222.bo3.com

    DropBo3

    ऑनलाइन स्टोरेज के मामले में ड्रॉपबॉक्स सबसे बेस्ट है। हालांकि
    ड्रॉपबॉक्स के बेसिक प्लान में यूजर को केवल 2 जीबी का स्टोरेज फ्री
    मिलता है। ड्रॉपबॉक्स पर फाइल शेयरिंग के साथ-साथ सिंक भी कर सकते हैं।
    ड्रॉपबॉक्स की सबसे बड़ी खूबी है कि यूजर डाटा को आईफोन-आईपैड, एंड्रॉयड,
    ब्लैकबेरी और सिंबियन एप्स से डिवाइसेज पर भी एक्सेस और अपलोड कर सकते
    हैं। हालांकि ड्रॉपबॉक्स पर 2 जीबी ही फ्री स्पेस मिलता है लेकिन
    फ्रेंड्स को इनवाइट करके मुफ्त में ही स्पेस बढ़ा सकते हैं। ड्रॉपबॉक्स
    को एक्सेस करने के लिए किसी ब्राउजर की जरूरत नहीं पड़ती। यूजर अगर ऑफलाइन
    है तो भी डेस्कटॉप पर सेव एप्लीकेशन ऑटोमेटिक सिंक करती रहेगी और ऑनलाइन
    होते ही ड्रॉपबॉक्स पर ऑटोमेटिक अपडेट हो जाएगा।

    वेब लिंक : 222.dropbo3.com

    Microsoft Sk4Dri1e

    फ्री में डाटा स्टोज चाहने वालों के लिए स्काइड्राइव भी अच्छा ऑप्शन है।
    स्काईड्राइव 25 जीबी का फ्री स्टोरेज देता है और विंडोज एक्सप्लोरर की
    तरह ही काम करता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी है कि ऑफिस डॉक्यूमेंट्स को भी
    स्काइड्राइव के फाइल मैनेजर में ही क्रिएट और सेव किया जा सकता है। साथ
    ही यूजर फाइल्स को शेयर भी कर सकते हैं। स्काइड्राइव में भी हार्डड्राइव
    से फाइल्स को ड्रेग और ड्रॉप करने का ऑप्शन है। स्काईड्राइव को यूजर
    वेब-इंटरफेस साफ्टवेयर से ही एक्सेस कर सकते हैं। साथ ही यूजर विंडोज
    फोन, आईफोन पर स्काईड्राइव को एक्सेस कर सकते हैं। इसके अलावा यूजर एक
    बार में 50 एमबी की फाइल ही डाउनलोड या अपलोड कर सकते हैं। माइक्रोसॉफ्ट
    ऑफिस से स्काईड्राइव में मौजूद ऑफिस डॉक्यूमेंट्स को सीधे एडिट कर सकते
    हैं।

    वेब लिंक : sk4dri1e.li1e.com

    Glide Gdri1e

    माइक्रोसॉफ्ट स्काइड्राइव की तरह ग्लाइड में भी 30 जीबी फ्री ऑनलाइन
    स्टोरेज मिलता है। ग्लाइड में फाइल साइज अपलोडिंग या डाउनलोडिंग की बंदिश
    नहीं है। ग्लाइड को पीसी यूजर्स किसी डेस्कटॉप क्लाइंट सॉफ्टवेयर की बजाय
    वेब-इंटरफेस ब्राउजर से ही एक्सेस कर सकते हैं। ग्लाइड में कलेंडर,
    कान्टेक्ट्स, फोटो एडिटर, मीटिंग मैनेजर और मीडिया प्लेयर जैसे ऑप्शन भी
    हैं।

    वेब लिंक : gglidesociet4.com

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