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  1. अगर आप भारत गैस ऑनलाइन बुक करना चाहते हो तो , सब से पहले आप को इस
    लिंक http://www.ebharatgas.com/pages/Customer_Console/Customer_New_Register.html पर जा कर अपनी id बनानी होगी एक बार id बना कर आप उस id से कबी बी
    भारत गैस बुक कर सकते हो ,

    आप की भारत गैस की id बनते ही आप को एक मेल मिले गई .जो ईमेल आप ने भारत
    गैस की id बनाते समय दी थी , उस मेल में आप को एक यूजर नाम और पासवर्ड
    मिले गा . उस यूजर नाम से आप इस लिंक पर अपनी id लोगिन कर सकते हो,
    id लोगिन करते ही आप के पास एक ऐसा फॉर्म खुले गा जो आप निचे देख रहे हो .


    बुकिंग करने के लिए आप को Place Order पर क्लिक करना होगा ,,

    बुकिंग देखने के लिए View Previous Order पर क्लिक करना होगा ,,


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  2. जल्द ही बाजार में ऐसा 3डी पेन आने वाला है, जिसके जरिए आप शानदार कला बना सकते हैं। वेबसाइट किकस्टार्टर के अनुसार 6.5 इंच (16.5 सेमी) का 'लिक्स' नाम का एक अल्यूमीनियम पेन है जिसमें एबीएस व पीएलए प्लास्टिक फिलामेंट्स दिए गए हैं, जिनकी मदद से सिर्फ एक बटन दबाने से 3डी स्कैच बनाना संभव हो सकेगा।

    इस पेन को यूएसबी के जरिए पावर आउटलेट से कनेक्ट कर चार्ज भी किया जा सकेगा। सिर्फ एक मिनट की चार्जिंग के बाद इसके फिलामेंट 3डी स्कैच बनाने के लिए अनुकूल तापमान पर पहुंच जाएंगे।


    यह पेन अपने आउटपुट प्वाइंट से 395 डिग्री फैरनहाइट (202 डिग्री सेल्सियस) तापमान पैदा करेगा।

    ज्यादा खूबसूरती से काम करने के लिए इसकी डिजाइन में दो तरह के स्पीड कंट्रोल बटन दिए गए हैं। इसमें इस्तेमाल किए गए फिलामेंट के अनुसार रंगों व ग्लॉस का चुनाव किया जा सकता है।

    ये बाजार में पहला 3डी पेन नहीं है लेकिन डेवलेपर्स का दावा है कि ये दुनिया का सबसे छोटा 3डी पेन है। वेबसाइट पर इसकी कीमत 139.95 डॉलर करीब 8,440 रुपए बताई गई है।

  3. त्यौहारों की वजह से अचानक बाजार में दूध, घी और मावा की डिमांड कई गुना
    बढ़ जाती है। यही डिमांड मिलावट को जन्म देती है। नकली दूध, घी और मावा
    बनानेवाले त्यौहारों के मौसम में हरकत में आ जाते हैं। नकली मिठाई और
    सिंथेटिक दूध से गंभीर बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। आखिर कैसे
    बनता है मिलावटी मावा और दूध। कैसे करें असली-नकली की पहचान।

    कैसे बनता है नकली मावा

    एक किलो दूध से सिर्फ दो सौ ग्राम मावा ही निकलता है। जाहिर है इससे मावा
    बनाने वालों और व्यापारियों को ज्यादा फायदा नहीं हो पाता है। लिहाजा
    बनाया जाता है मिलावटी मावा। इसे बनाने में अक्सर शकरकंदी, सिंघाडे़ का
    आटा, आलू और मैदे का इस्तेमाल होता है। नकली मावा बनाने में स्टार्च,
    आयोडीन और आलू इसलिए मिलाया जाता है ताकि मावे का वजन बढ़े। वजन बढ़ाने
    के लिए मावा में आटा भी मिलाया जाता है। नकली मावा असली मावा की तरह दिखे
    इसके लिए इसमें कुछ केमिकल भी मिलाया जाता है। कुछ दुकानदार मिल्क पाउडर
    में वनस्पति घी मिलाकर मावे को तैयार करते हैं।

    कैसे बनता है सिंथेटिक दूध

    सिंथेटिक दूध बनाने के लिए सबसे पहले उसमें यूरिया डालकर उसे हल्की आंच
    पर उबाला जाता है। इसके बाद इसमें कपड़े धोने वाला डिटर्जेंट, सोडा
    स्टार्च, फॉरेमैलिन और वाशिंग पाउडर मिलाया जाता है। इसके बाद इसमें
    थोड़ा असली दूध भी मिलाया जाता है। मिलावटी मावा और सिंथेटिक दूध पीने से
    आपको फूड पॉयजनिंग हो सकती है। उल्टी और दस्त की शिकायत हो सकती है।
    किडनी और लिवर पर भी बेहद बुरा असर पड़ता है। स्किन से जुड़ी बीमारी भी
    हो सकती है।

    अधिक मात्रा में नकली मावे से बनी मिठाइ खाने से लीवर को भी नुकसान पहुंच
    सकता है। इससे कैंसर तक हो सकता है।

    कैलाश हॉस्पिटल के डॉक्टर डॉ. प्रवीण मिश्र के मुताबिक जो खाने की चीजों
    में मिलावट से फ़ूड पॉइजनिंग से लेकर कैंसर तक बीमारियां हो सकती हैं।
    स्किन डिसीस स्टमक डिसीस हो सकता है। लगातार मिलावटी खाना खाने से कैसर
    भी हो सकता।

    नकली मावा तो मिठाई में इस्तेमाल होता है। असली और नकली मिठाई में पहचान
    करना मुश्किल है। लिहाजा आप अच्छी और भरोसेमंद दुकान से ही मिठाई खरीदें।
    हमेशा बिल के साथ मिठाई लें ताकि किसी किस्म की खराबी होने पर दुकानदार
    को पकड़ सकें। जहां तक दूध का सवाल है तो आप थोड़ा सजग रहकर असली और नकली
    दूध में फर्क कर सकते है।

    सिंथेटिक दूध में साबुन जैसी गंध आती है, जबकि असली दूध में कुछ खास गंध
    नहीं आती। असली दूध का स्वाद हल्का मीठा होता है, नकली दूध का स्वाद
    डिटर्जेंट और सोडा मिला होने की वजह से कड़वा हो जाता है। असली दूध स्टोर
    करने पर अपना रंग नहीं बदलता, नकली दूध कुछ वक्त के बाद पीला पड़ने लगता
    है। अगर असली दूध में यूरिया भी हो तो ये हल्के पीले रंग का ही होता है,
    वहीं अगर सिंथेटिक दूध में यूरिया मिलाया जाए तो ये गाढ़े पीले रंग का
    दिखने लगता है।

    अगर हम असली दूध को उबालें तो इसका रंग नहीं बदलता, वहीं नकली दूध उबालने
    पर पीले रंग का हो जाता है।

    असली दूध को हाथों के बीच रग़ड़ने पर कोई चिकनाहट महसूस नहीं होती। वहीं,
    नकली दूध को अगर आप अपने हाथों के बीच रगड़ेंगे तो आपको डिटर्जेंट जैसी
    चिकनाहट महसूस होगी।

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  4. जब सारी दुनिया में पानी और बिजली के बेहतर विकल्पों के लिए उठापटक चल
    रही है तब ब्राजील के एक साधारण से मैकेनिक ने बिजली का पर्यावरण के लिए
    सुरक्षित और बहुत ही सहज विकल्प दे दिया है। उसने मोजर लैंप नाम से चालीस
    या साठ वॉल्ट के बल्ब को जलाने का सस्ता और सुलभ उपाय तलाश कर लिया है।
    इतना ही नहीं मैकेनिक अल्फ्रेड मोजर ने अपने नाम के बल्ब से फिलीपींस की
    गरीबी की रेखा से नीचे रह रही आबादी की जिंदगी को रोशन भी कर दिया है।

    फिलीपींस की एक-चौथाई आबादी गरीबी की रेखा के नीचे हैं जिसके लिए बिजली
    बहुत ही महंगी पड़ती है। लेकिन मोजर लैंप अब फिलीपींस के 1,40,000 घरों
    को रोशन कर रहे हैं। मोजर के इस सस्ते और पर्यावरण के अनुकूल बल्ब अब
    तेजी से अन्य विकासशील देशों में भी लोकप्रिय हो रहे हैं। मोजर ने बीबीसी
    को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि ये एक दिव्य रोशनी है। ईश्वर ने सबके
    लिए सूर्य दिया है। रोशनी हर किसी के लिए है। इसके खोजकर्ता मोजर ने कहा
    कि उनके बल्ब से आप धन की बचत कर सकते हैं। इससे आपको बिजली का करंट भी
    लगता है। और सबसे बड़ी बात इस पर आपका एक पैसा भी खर्च नहीं होता है।
    मोजर सौर ऊर्जा के जरिए सूरज की रोशनी को एक दो लीटर की पानी की
    प्लास्टिक बोतल के जरिए बिजली बनाते हैं।

    इस बोतल में साफ पानी भरा होता है। उन्होंने बताया कि इस पानी में वह दो
    कप ब्लीच डालते हैं ताकि पानी सुरक्षित रहे और ये हरा न होने पाए यानी
    इसमें काई न जमे। बोतल जितनी साफ और पारदर्शी होगी उसका उतना ही अच्छा
    असर होगा। मोजर बोतल के मुहाने पर एक काले रंग का ढक्कन लगाते हैं। फिर
    उसे छत में बने छेद के अंदर फंसाते हैं। फिर वह उसे छत के साथ पालीएस्टर
    टेप से सील कर देते हैं। इससे बारिश होने पर भी छत से पानी नहीं टपकता।
    एक रिपोर्ट के अनुसार विकासशील देशों के कई हिस्सों में लाखों परिवार
    अपनी झुग्गियों की नन्हीं खिड़कियों से रोशनी की हल्की से किरण तक को
    तरसते हैं। इसीलिए मोजर को ये विचार सन् 2002 में आया कि जब ब्राजील के
    उनके शहर उबेराबा में बिना बिजली के घुप अंधेरा छा गया था। उन्हें अपनी
    दुकान में रोशनी के लिए किसी अनूठे तरीके की तलाश थी। जैसी ही उन्होंने
    इस जादुई तरीके से बिजली बनाने का तरीखा खोजा उनके साथ ही उनके पड़ोसियों
    और शहर के सुपरमार्केट तक बल्ब से रोशन हो गए।

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  5. जल्‍द आप अपने मोबाइल में यू टयूब एप्‍लीकेशन की मदद से बिना इंटरनेट के
    वीडियो देख सकेंगे। रिपोर्ट के अनुसार गूगल इसके लिए एप्‍लीकेशन में एक
    ऑप्‍शन देगा, अगर यूजर किसी वीडियो को बाद में देखना चाहता है तो वो उसे
    ऐड टू डिवाइस ऑप्‍शन सलेक्‍ट करके वीडियो को बाद में बिना इंटरनेट के देख
    सकता है। गूगल ने अपने नोट में कहा है यूजर ऑफलाइन वीडियो को 48 घंटे तक
    ही देख सकेगा इसके बाद यूजर को इंटरनेट कनेक्‍टीविटी की जरूरत पड़ेगी। यू
    ट्यूब की मेल के अनुसार यूजर बिना इंटरनेट कनेक्‍टीविटी के वीडियो 48
    घंटे तक ही देख सकता है लेकिन अगर उसे वीडियो देखने की अवधि बढ़ानी है तो
    उसे दुबारा नेट कनेक्‍ट करके वहीं वीडियो रीफ्रेश करना होगा।

    रीफ्रेंश करने के बाद यूजर वहीं वीडियो दोबारा 48 घंटे तक देख सकेगा। अगर
    यू ट्यूब को होने वाले फायदे की बात की जाए तो जब भी यूजर कोई ऑफलाइन
    वीडियो देखेगा उससे पहले उसके स्‍क्रीन पर कुछ विज्ञापन दिखेंगे जिससे यू
    ट्यूब को फायदा होगा। यू ट्यूब के अनुसार इसमें सिर्फ इन स्‍ट्रीम ऐड ही
    आएंगे बाकी किसी भी तरह के ऐड फार्मेट एप्‍लीकेशन में नहीं दिखेंगे। यू
    ट्यूब इस नई सर्विस को नवंबर तक लांच कर देगा। ऑफ लाइन मोड में देखे जाने
    वाले वीडियो में मूवी और ऐसा कोई कंटेंट नहीं देखा जा सकेगा जिसे खरीदने
    की जरूरत पड़े।


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  6. बोहत बार हमारे कंप्यूटर में किसी फाइल का डुप्लीकेट फाइल बन कर डंप हो
    जाता है ,बो डुप्लीकेट फाइल का हमे पता ही नहीं चलता की बो कहा पर स्टोर
    है ,

    अगर हम इस को डिलीट करना चाहते है ,तो हमे अपने पुरे कंप्यूटर में देखना
    होगा जिस से हमें बोहत टाइम लगे गा, में आप को एक सॉफ्टवेर के बारे में
    बताता हु.जे सॉफ्टवेर अपने आप डुप्लीकेट फाइल को खोज कर डिलीट कर देता है
    .

    डाउनलोड सॉफ्टवेर

    http://www.digitalvolcano.co.uk/duplicatecleaner.html

    kuchkhaskhabar@gmail.com

  7. सब से पहले आप www.google.कॉम खोलो
    फिर सर्च बॉक्स में सर्च Google Gravity लिखे,
    और सर्च करो ,
    सर्च करते ही आप के सामने जे लाइन होगी ,
    Google Gravity - Mr.doob
    बस इस लाइन पर क्लिक कर दो,
    फिर देखो मेरा Google बाबा केसे डांस करता है ,



  8. ट्रेन में सफर करते हुए इंटरनेट के जरिए जुड़ा रह पाना जल्द ही बिना डाटा कार्ड के भी संभव होगा। ऐसे में रास्ते में किसी जगह इंटरनेट कनेक्टिविटी के टूटने का डर भी खत्म हो जाएगा। इसके लिए रेलवे की बहुप्रतीक्षित योजना को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने हरी झंडी दे दी है। 

    इंटरनेट के लिए सैटेलाइट के कू बैंड की फ्रिक्वेंसी के इस्तेमाल की इजाजत इसरो ने दे दी है। यह पहला मौका होगा जब जब चलती ट्रेन में भी इंटरनेट का मजा सैटेलाइट के जरिए ले सकेंगे।

    कैसे काम करेगा ट्रेन में इंटरनेट इस काम को मुंबई की एक कंपनी अंजाम देगी। इसके तहत एक एंटीना ट्रेन के इंजन के पास लगाया जाएगा और ट्रेन के डिब्बों को वाई-फाई के जरिए जोड़ा जाएगा। इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए यात्रियों को मोबाइल पर एक पासवर्ड दिया जाएगा।
    टीटीई से एक नंबर लेकर उस पर डायल करने से यह पासवर्ड हासिल किया जा सकेगा। इस पासवर्ड का उपयोग कर यात्री अपने लैपटॉप, टैबलेट या मोबाइल पर इंटरनेट को शुरू कर सकते हैं।
    रेलवे ने पहले भी चलती ट्रेन में इंटरनेट की सेवा मुहैया कराने के लिए यह प्रस्ताव रखा था, लेकिन इसरो से हरी झंडी नहीं मिलने के कारण अभी तक यह संभव नहीं हो पाया है। इंटरनेट के लिए सैटेलाइट की फ्रिक्वेंसी के इस्तेमाल के लिए इसरो से मंजूरी लेना जरूरी है। एक अधिकारी ने बताया कि अब इजाजत मिल चुकी है और जल्द ही योजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा
    प्रस्ताव के मुताबिक सबसे पहले ट्रायल के लिए हावड़ा-राजधानी में सैटेलाइट से इंटरनेट के संचालन के लिए अपलिंकिंग की सुविधा दी जाएगी। अधिकारी ने बताया कि यह एक पायलट प्रोजेक्ट है इसलिए इसमें किसी भी यात्री से इंटरनेट के लिए शुल्क नहीं लिया जाएगा।

    रेलवे ने हावड़ा राजधानी में इंटरनेट के इस प्रोजेक्ट के लिए 6.30 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इस काम को मुंबई की एक कंपनी अंजाम देगी। इसके तहत एक एंटीना ट्रेन के इंजन के पास लगाया जाएगा और ट्रेन के डिब्बों को वाई-फाई के जरिए जोड़ा जाएगा। इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए यात्रियों को मोबाइल पर एक पासवर्ड दिया जाएगा।

    टीटीई से एक नंबर लेकर उस पर डायल करने से यह पासवर्ड हासिल किया जा सकेगा। इस पासवर्ड का उपयोग कर यात्री अपने लैपटॉप, टैबलेट या मोबाइल पर इंटरनेट को शुरू कर सकते हैं। यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो अन्य टे्रनों को भी इंटरनेट के इस्तेमाल के लिए सैटेलाइट से जोड़ा जाएगा।

    kuchkhaskhabar@gmail.com

  9. 1 लीटर में 200 किलोमीटर: इंडियन लड़कों ने बनाई सबसे ज्यादा माइलेज वाली कार

    के.जे. सोमैया कॉलेज के लड़कों ने कमाल कर दिया है. बड़ी-बड़ी कंपनियां, बड़े-बड़े ऑटोमोबाइल इंजीनियर जिस चीज का सिर्फ सपना भर देखते हैं, उसे सच कर दिखाया इन लड़कों ने. जी हां, इन्होंने ऐसी कार डिजायन कर बनाई है, जो एक लीटर पेट्रोल से 200 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है. 
    के.जे. सोमैया कॉलेज के सेकेंड इयर के लड़कों ने इस वन-सीटर कार को डिजायन किया है. 35 सीसी इंजन वाले इस कार की बॉडी फाइबर ग्लास से बनाई गई है और इसका शेप डोल्फिन की तरह है. कार का नाम रखा है - जुगाड़ 13. है न मजेदार अविष्कार! जहां एक ओर तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे वाहन राहत की सांस देते हैं.

    के.जे. सोमैया कॉलेज की यह टीम इस साल जुलाई में शेल इको मैराथन इंटरनेशनल कम्पीटीशन में हिस्सा लेने मलेशिया के सेपांग इंटरनेशनल सर्किट जा रही है. शेल इको मैराथन इंटरनेशनल कम्पीटीशन में कुल 150 टीमें हिस्सा ले रही हैं.

    इस टीम में के.जे. सोमैया कॉलेज के इलेक्ट्रानिक और मैकेनिकल डिपार्टमेंट के कुल 40 लड़के हैं. इन लड़कों ने अपन दम पर यामाहा, न्यासा और ओम फ्रेट्स को अपना मार्केटिंग पार्टनर बनाया है. ओम फ्रेट्स ने इनके बनाए कार को मलेशिया तक बिना किसी शुल्क के पहुंचाने का आश्वासन दिया है.

  10. आप जब भी किसी फोटो को देखते हैं तो लगता है कि वो पूरी तरह से एक ही
    एलीमेंटस से बनी हुई है लेकिन जनाब ऐसा नहीं है। दरअसल, जो भी पिक्चर या
    फोटो हम देखते है वो बहुत छोटे टुकड़ों या बिंदुओ से मिलकर बनी होती है
    जिसे पिक्सल कहा जाता है। कम्प्यूटर से लेकर तमाम डिजिटल उपकरणों पर
    दिखने वाली तस्वीरें पिक्सलों से मिलकर ही बनती हैं। अहम बात ये है कि
    पिक्सल किसी भी फोटो को मापने का पैमाना नहीं है।



    सीधे तौर पर इसे इस तरह समझा जा सकता है कि जिस फोटो में जितने ज्यादा
    पिक्सल होंगे वो फोटो उतनी ही ज्यादा स्पष्ट होगी। कम्प्यूटर के मॉनीटर
    पर या टीवी स्क्रीन पर कोई भी फोटो लाखों पिक्सल्स से मिलकर बनी होती है।
    हर एक पिक्सल आठ या उसके गुणक में रंग ग्रहण करता है। बिट को इसकी इकाई
    माना जाता है। अगर किसी पिक्सल में 24 बिट हैं तो वह अधिकतम 16 लाख रंगों
    को दिखा सकता है।



    एक मॉनीटर का पिक्सल तीन रंगों के बिंदुओ से बने होते हैं ये रंग हैं
    लाल, हरा और बैगनी। ये तीनो रंग किसी पिक्सल में घुले मिले होते हैं।
    डिजिटल कैमरों के लिए मेगापिक्सल शब्द का इस्तेमाल किया जाता है जो
    पिक्सल से भी छोटी इकाई है। मेगापिक्सल्स कैमरों को बेहतर माना जाता है।

  11. आज की इस "कलयुगी" दुनिया में हम जीवन के हर क्षेत्र में विज्ञान से
    जुड़ी कई चीजें इस्तेमाल करते हैं और इनमें से इंटरनेट बहुत महत्वपूर्ण
    है. इंटरनेट के माध्यम से आज फेसबुक, गूगल, याहू जैसे स्थानों पर बने
    हमारे अकाउंट आज हमारे बैंक अकाउंट से अधिक महत्वपूर्ण हो चुके हैं.
    लेकिन जिस तरह एक बैंक में भी चोरों के सेंध मारने का डर रहता है उसी तरह
    इंटरनेट के जहां में भी हर पल दिल में एक डर बैठा रहता है कि कहीं किसी
    ने हमारे अकांउट के पासवर्ड चुरा लिया तो क्या होगा?

    गूगल, याहू और फेसबुक हैं जान

    आज इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले अधिकतर लोगों के पास अपनी जीमेल आईडी या
    याहू आईडी होती ही है. सोशल नेटवर्किंग पर समय व्यतीत करने वाले युवाओं
    के लिए फेसबुक और ट्विटर जैसी जगहें बेहद महत्वपूर्ण रखती हैं. ऐसे में
    कई बार लोग अपनी सुविधा के लिए एक पैटर्न के या बेहद आसान पासवर्ड रख
    लेते हैं जिसकी वजह से उनके सामने प्राइवेसी के साथ कई अन्य खतरे खड़े हो
    जाते हैं. ऐसे में आप कैसे इस परेशानी से बच सकते हैं यही आज इस ब्लॉग
    में हम बताना चाहते हैं.

    गलत स्पेलिंग ही है सही पासवर्ड का तरीका

    अक्सर लोग ऐसे शब्दों या अंकों को पासवर्ड बनाते हैं जो उनका नाम या जन्म
    की तारीख होते हैं. इस कारण उनके पासवर्ड आसानी से चोरी होनी की आशंका
    रहती है, लेकिन अगर आप सुरक्षित पासवर्ड चाहते हैं तो सही स्पेलिंग का
    प्रयोग न करें.


    विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर गलत व्याकरण का इस्तेमाल किया जाए तो आपके
    पासवर्ड सुरक्षित रह सकते हैं. हैकर आमतौर पर सही स्पेलिंग का प्रयोग
    करके पासवर्ड की चोरी करते हैं. गलत स्पेलिंग या व्याकरण का इस्तेमाल
    करके उन्हें बेवकूफ बनाया जा सकता है.


    अकसर लोग लंबे पासवर्ड के चक्कर में कोई ऐसा पासवर्ड रख लेते हैं जो बेहद
    आसान होता है ऐसे में हैकर्स इसको ब्रेक कर ही लेते हैं. लेकिन गलत
    स्पैलिंग कर आप उन्हें भी चकमा दे सकते हैं.


    उदाहरण के तौर पर मान लीजिए आपका नाम मनोज कुमार पांडेय
    (MANOJKUMARPANDEY) है और आप अपना पासवर्ड "MANOJPANDEY1234" रखना चाहते
    हैं तो इसकी जगह आप "MAONJPANDYE1234" रखिए. ऐसा करना थोड़ा मुश्किल और
    याद रखने के लिहाज से मुश्किल तो है ही लेकिन एक दो बार अगर आप इस चीज को
    ट्राई करेंगे तो आपको यह पासवर्ड याद हो जाएगा.

  12. 'न तो यह शरीर तुम्हारा है और न ही तुम इस शरीर के हो। यह शरीर पांच तत्वों से बना है- अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश। एक दिन यह शरीर इन्हीं पांच तत्वों में विलीन हो जाएगा।'- भगवान कृष्ण

    जब शरीर छूटता है तो व्यक्ति के साथ क्या होता है यह सवाल सदियों पुराना है। इस संबंध में जनमानस के चित्त पर रहस्य का पर्दा आज भी कायम है जबकि इसका हल खोज लिया गया है। फिर भी यह बात विज्ञान सम्मत नहीं मानी जाती, क्योंकि यह धर्म का विषय है।

    मुख्यत: तीन तरह के शरीर होते हैं- स्थूल, सूक्ष्म और कारण। व्यक्ति जब मरता है तो स्थूल शरीर छोड़कर पूर्णत: सूक्ष्म में ही विराजमान हो जाता है। सूक्ष्म शरीर के विसरित होने के बाद व्यक्ति दूसरा शरीर धारण कर लेता है, लेकिन कारण शरीर बीज रूप है जो अनंत जन्मों तक हमारे साथ रहता है।

    आत्मा पर छाई धुंध : व्यक्ति रोज मरता है और रोज पैदा होता है, लेकिन उसे इस बात का आभास नहीं होता। प्रतिपल व्यक्ति जाग्रत, स्वप्न और फिर सुषुप्ति अवस्था में जिता है। मरने के बाद क्या होता है यह जानने के लिए सर्वप्रथम व्यक्ति के चित्त की अवस्था जानना जरूरी है या कहना चाहिए की आत्मा के ऊपर छाई भाव, विचार, पदार्थ और इंद्रियों के अनुभव की धुंध का जानना जरूरी है।

    आत्मा शरीर में रहकर चार स्तर से गुजरती है : छांदोग्य उपनिषद (8-7) के अनुसार आत्मा चार स्तरों में स्वयं के होने का अनुभव करती है- (1)जाग्रत (2)स्वप्न (3)सुषुप्ति और (4)तुरीय अवस्था।

    तीन स्तरों का अनुभव प्रत्येक जन्म लिए हुए मनुष्य को अनुभव होता ही है, लेकिन चौथे स्तर में वही होता है जो ‍आत्मवान हो गया है या जिसने मोक्ष पा लिया है। वह शुद्ध तुरीय अवस्था में होता है जहां न तो जाग्रति है, न स्वप्न, न सु‍षुप्ति ऐसे मनुष्य सिर्फ दृष्टा होते हैं- जिसे पूर्ण-जागरण की अवस्था भी कहा जाता है।

    होश का स्तर तय करता गति : प्रथम तीनों अवस्थाओं के कई स्तर है। कोई जाग्रत रहकर भी स्वप्न जैसा जीवन जिता है, जैसे खयाली राम या कल्पना में ही जीने वाला। कोई चलते-फिरते भी नींद में रहता है, जैसे कोई नशे में धुत्त, चिंताओं से घिरा या फिर जिसे कहते हैं तामसिक।

    हमारे आसपास जो पशु-पक्षी हैं वे भी जाग्रत हैं, लेकिन हम उनसे कुछ ज्यादा होश में हैं तभी तो हम मानव हैं। जब होश का स्तर गिरता है तब हम पशुवत हो जाते हैं। कहते भी हैं कि व्यक्ति नशे में व्यक्ति जानवर बन जाता है।

    पेड़-पौधे और भी गहरी बेहोशी में हैं। मरने के बाद व्यक्ति का जागरण, स्मृति कोष और भाव तय करता है कि इसे किस योनी में जन्म लेना चाहिए। इसीलिए वेद कहते हैं कि जागने का सतत अभ्यास करो। जागरण ही तुम्हें प्रकृति से मुक्त कर सकता है।

    क्या होता है मरने के बाद : सामान्य व्यक्ति जैसे ही शरीर छोड़ता है, सर्वप्रथम तो उसकी आंखों के सामने गहरा अंधेरा छा जाता है, जहां उसे कुछ भी अनुभव नहीं होता। कुछ समय तक कुछ आवाजें सुनाई देती है कुछ दृश्य दिखाई देते हैं जैसा कि स्वप्न में होता है और फिर धीरे-धीरे वह गहरी सुषुप्ति में खो जाता है, जैसे कोई कोमा में चला जाता है।

    गहरी सुषुप्ति में कुछ लोग अनंतकाल के लिए खो जाते हैं, तो कुछ इस अवस्था में ही किसी दूसरे गर्भ में जन्म ले लेते हैं। प्रकृ‍ति उन्हें उनके भाव, विचार और जागरण की अवस्था अनुसार गर्भ उपलब्ध करा देती है। जिसकी जैसी योग्यता वैसा गर्भ या जिसकी जैसी गति वैसी सुगति या दुर्गति। गति का संबंध मति से होता है। सुमति तो सुगति।

    लेकिन यदि व्यक्ति स्मृतिवान (चाहे अच्छा हो या बुरा) है तो सु‍षुप्ति में जागकर चीजों को समझने का प्रयास करता है। फिर भी वह जाग्रत और स्वप्न अवस्था में भेद नहीं कर पाता है। वह कुछ-कुछ जागा हुआ और कुछ-कुछ सोया हुआ सा रहता है, लेकिन उसे उसके मरने की खबर रहती है। ऐसा व्यक्ति तब तक जन्म नहीं ले सकता जब तक की उसकी इस जन्म की स्मृतियों का नाश नहीं हो जाता। कुछ अपवाद स्वरूप जन्म ले लेते हैं जिन्हें पूर्व जन्म का ज्ञान हो जाता है।

    लेकिन जो व्यक्ति बहुत ही ज्यादा स्मृतिवान, जाग्रत या ध्यानी है उसके लिए दूसरा जन्म लेने में कठिनाइयां खड़ी हो जाता है, क्योंकि प्राकृतिक प्रोसेस अनुसार दूसरे जन्म के लिए बेहोश और स्मृतिहीन रहना जरूरी है।

    इनमें से कुछ लोग जो सिर्फ स्मृतिवान हैं वे भूत, प्रेत या पितर योनी में रहते हैं और जो जाग्रत हैं वे कुछ काल तक अच्छे गर्भ की तलाश का इंतजार करते हैं। लेकिन जो सिर्फ ध्यानी है या जिन्होंने गहरा ध्यान किया है वे अपनी इच्छा अनुसार कहीं भी और कभी भी जन्म लेने के लिए स्वतंत्र हैं। यह प्राथमिक तौर पर किए गए तीन तरह के विभाजन है। विभाजन और भी होते हैं जिनका वेदों में उल्लेख मिलता है।

    जब हम गति की बात करते हैं तो तीन तरह की गति होती है। सामान्य गति, सद्गगति और दुर्गति। तामसिक प्रवृत्ति व कर्म से दुर्गति ही प्राप्त होती है, अर्थात इसकी कोई ग्यारंटी नहीं है कि व्यक्ति कब, कहां और कैसी योनी में जन्म ले। यह चेतना में डिमोशन जैसा है, लेकिन कभी-कभी व्यक्ति की किस्मत भी काम कर जाती है।

    सचमुच प्रकृति में किसी भी प्रकार का कोई नियम काम नहीं करता क्योंकि कभी-कभी व्यक्ति की योग्यता भी असफलता का द्वार खोल देती है और अयोग्य व्यक्ति यदि अच्छी चाहत और सकारात्म विचारों वाला है तो सद्गति को प्राप्त हो जाता है। प्रकृति को चाहिए जागरण, समर्पण और संकल्प। तो संकल्प लें की आज से हम विचार और भाव के जाल को काटकर सिर्फ दृष्टा होने का अभ्यास करेंगे।


  13. फेस योग कहीं भी बैठ कर आप कर सकती हैं, लेकिन बेहतर होगा कि रोजाना नियमित रूप से एक ही जगह और एक ही समय पर करें। ताकि यह आपकी आदत में शामिल हो जाए।

    आखिर ताउम्र जवां रहने का मामला है। आप इसे कार में बैठकर, ऑफिस या डेस्कटॉप के सामने कहीं भी कर सकती हैं। इसके लिए योग मैट भी जरूरी नहीं है। इसमें रोजाना मात्र 15-20 मिनट लगते हैं और इसे आप हफ्ते में छह दिन कर सकती हैं। जिस तरह शरीर को स्वस्थ और युवा रहने के लिए एक्सरसाइज की जरूरत होती है। उसी प्रकार चेहरे की मांसपेशियों को मजबूत और चेहरे पर कसाव लाने के लिए भी एक्सरसाइज की जरूरत होती है।

    तनाव, परेशानी, चिंता, गुस्सा और पल-पल बदलने वाले चेहरे के भावों से आए उम्र के निशान को हटाने और चेहरे को तनावमुक्त रखने के लिए आप भी फेस योग को अपना सकती हैं।

    क्यों जरूरी है

    फेस योग की सभी एक्सरसाइज से चेहरे का रक्त संचार बढता है, त्वचा को अधिक ऑक्सीजन और पोषण मिलता है। इस तरह त्वचा स्वस्थ और चमकदार होने के साथ-साथ युवा नजर आती है।

    1. लाफिंग आउट लाउड फेस : 
    जमीन पर सीधी बैठ जाएं। खुलकर जोर से हंसे। हंसते हुए दोनों हाथ की तर्जनी को चीक्स बोन के नीचे रखें। सपोर्ट देते हुए गाल ऊपर की तरफ लिफ्ट करें। इस अवस्था में 5-10 सेकंड तक रुकें। इसे 20 बार दोहराएं। इससे चीक्स टोन अप होते हैं व उनमें कसाव आता है।

    2. सैश माउथ एक्सरसाइज: 
    आराम की मुद्रा में बैठ जाएं। सांस खींचते हुए दाहिने तरफ का गाल फुलाएं फिर बायीं तरफ का फुलाएं। ऐसा दोनों तरफ से बारी-बारी करें। बीस बार यह प्रक्रिया दोनों तरफ से करें। इससे गाल फर्म रहते हैं। झुर्रियां नहीं पडतीं।

    3. स्माइलिंग फिश फेस : 
     आराम की मुद्रा में बैठें। चेहरा मछली की तरह बनाएं। इसके लिए होंठों को भीतर की ओर खीचें। गालों में भी खिंचाव महसूस करें। इस पोज में हंसने की कोशिश करें। यह दिखेगा नहीं, आप महसूस करेंगी। इससे चेहरे की सभी मासंपेशियां टोन-अप होती हैं। इसे 20 बार करें।

    4. मार्जारी आसन : 
    वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं। हाथ अपने घुटनों के आगे लाएं। हिप्स को ऊपर की तरफ उठाएं और शरीर का भार हाथों और घुटनों पर डालें। संतुलन बनाएं। भरपूर सांस खींचें और मुंह खोलकर जितना संभव हो जीभ बाहर निकालें और आंखों को ऊपर की तरफ करते हुए सांस बाहर की तरफ जोर से छोडें। इस प्रक्रिया को 5-7 बार करें। इससे चेहरे पर कसाव और चमक आएगी।

    5. इनवर्टेड पोज : 
     पैरों को खोल कर सीधी खडी हों। सांस भरते हुए जितना संभव हो आगे की ओर झुकें। दोनों हाथों का अंगूठा और तर्जनी उंगली ठोढी व चीक्स बोन पर रखकर सपोर्ट दें। इस अवस्था में 5-10 सेकंड तक रुकें। इससे रक्तसंचार चेहरे की तरफ होता है, त्वचा स्वस्थ व चमकदार होती है। इसे 10 बार दोहराएं।

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