Story
(104)
जानकारी
(41)
वेबसाइड
(38)
टेक्नॉलोजी
(36)
article
(28)
Hindi Quotes
(21)
अजब-गजब
(20)
इंटरनेट
(16)
कविता
(16)
अजब हैं लोग
(15)
तकनीक
(14)
समाचार
(14)
कहानी Story
(12)
नॉलेज डेस्क
(11)
Computer
(9)
ऐप
(9)
Facebook
(6)
ई-मेल
(6)
करियर खबरें
(6)
A.T.M
(5)
बॉलीवुड और मनोरंजन ...
(5)
Mobile
(4)
एक कथा
(4)
पासवर्ड
(4)
paytm.com
(3)
अनमोल वचन
(3)
अवसर
(3)
पंजाब बिशाखी बम्पर ने मेरी सिस्टर को बी दीया crorepati बनने का मोका .
(3)
माँ
(3)
helpchat.in
(2)
कुछ मेरे बारे में
(2)
जाली नोट क्या है ?
(2)
जीमेल
(2)
जुगाड़
(2)
प्रेम कहानी
(2)
व्हॉट्सऐप
(2)
व्हॉट्सेएप
(2)
सॉफ्टवेर
(2)
"ॐ नमो शिवाय!
(1)
(PF) को ऑनलाइन ट्रांसफर
(1)
Mobile Hacking
(1)
Munish Garg
(1)
Recharges
(1)
Satish Kaul
(1)
SecurityKISS
(1)
Technical Guruji
(1)
app
(1)
e
(1)
olacabs.com
(1)
olamoney.com
(1)
oxigen.com
(1)
shopclues.com/
(1)
yahoo.in
(1)
अशोक सलूजा जी
(1)
कुमार विश्वास ...
(1)
कैटरिंग
(1)
खुशवन्त सिंह
(1)
गूगल अर्थ
(1)
ड्रग साइट
(1)
फ्री में इस्तेमाल
(1)
बराक ओबामा
(1)
राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला
(1)
रिलायंस कम्यूनिकेशन
(1)
रूपये
(1)
रेडक्रॉस संस्था
(1)
लिखिए अपनी भाषा में
(1)
वोटर आईडी कार्ड
(1)
वोडाफोन
(1)
लिखिए अपनी भाषा में
-
माँ ! मै आज भी तेरा बच्चा हुँ
Monday, April 14, 2014
Posted by Unknown Labels: माँ | 0 comments | Email This BlogThis! Share to X Share to Facebook |
|
-
माँ के प्रेम से बढ़ कर दुनिया में और कोई प्रेम नहीं हो सकता
Friday, March 21, 2014
कुछ समय पहले ऑस्ट्रेलिया में आये भूकंप में एक दिल को छु लेने वाली घटना हुई..
भूकंप के बाद बचाव कार्य का एक दल एक महिला के पूर्ण रूप से ध्वस्त हुए
घर की जांच कर रहा था,बारीक दरारों में से महिला का मृत शारीर दिखा लेकिन
वो एक अजीब अवस्था में था,महिला अपने घुटनों के बल बैठी थी ठीक वैसे ही
जैसे मंदिर में लोग भगवान् के सामने नमन करते है,उसके दोनों हाथ किसी
चीज़ को पकडे हुए थे,भूकंप से उस महिला की पीठ व् सर को काफी क्षति
पहुंची थी,
काफी मेंहनत के बाद दल के सदस्य ने बारीक दरारों में से जगह बना कर अपना
हाथ महिला की तरफ बढाया इस उम्मीद में की शायद वो जिंदा हो,लेकिन महिला
का शारीर ठंडा प़ड चूका था,जिसे बचाव दल समझ गया की महिला मर चुकी है,
बचाव दल ने उस घर को छोड़ दिया और दुसरे मकानों की तरफ चलने लगे,बचाव दल
के प्रमुख का कहना था की "पता नहीं क्यूँ मुझे उस महिला का घर अपनी तरफ
खींच रहा था,कुछ था जो मुझसे कह रहा था के मैं इस घर को ऐसे छोड़ कर न
जाऊं और मैंने अपने दिल की बात मानने का फैसला किया"
उसके बाद बचाव दल एक बार फिर उस महिला के घर की तरफ पहुंचे,दल प्रमुख ने
मलबे को सावधानी से हटा कर बारीक दरारों में से अपना हाथ महिला की तरफ
बढ़ाया और उसके शारीर के निचे स्थित जगह को हाथों से टटोलने लगे,तभी उनके
मुह से निकला "बच्चा... यहाँ एक बच्चा है"पूरा दल काम में जुट
गया,सावधानी से मलबा हटाया जाने लगा,तब उन्हें महिला के मृत शारीर के
निचे एक टोकरी में रेशमी कम्बल में लिपटा हुआ ३ माह का एक बच्चा मिला,दल
को अब समझ में आ चूका था की महिला ने अपने बच्चे को बचाने के लिए अपने
जीवन का त्याग किया है,भूकंप के दौरान जब घर गिरने वाला था तब उस महिला
ने अपने शारीर से सुरक्षा देकर अपने बच्चे की रक्षा की थी.डोक्टर भी जल्द
ही वहां आ पहुंचे.
दल ने जब बच्चे को उठाया तब बच्चा बेहोश था,जब बचाव दल ने बच्चे का कम्बल
हटाया तब उन्हें वहां एक मोबाइल मिला जिसके स्क्रीन पर सन्देश लिखा
था,"मेरे बच्चे अगर तुम बच गए तो बस इतना याद रखना की तुम्हारी माँ तुमसे
बहुत प्यार करती है" मोबाइल बचाव दल में एक हाथ से दुसरे हाथ जाने लगा,
सभीने वो सन्देश पढ़ा,सबकी आँखें नम हो गयी...
माँ के प्रेम से बढ़ कर दुनिया में और कोई प्रेम नहीं हो सकता
--
यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story या जानकारी है
जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ
E-mail करें. हमारी Id है:kuchkhaskhabar@gmail.com.पसंद आने पर हम उसे
आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे.
www.kuchkhaskhabar.comPosted by Unknown Labels: माँ | 0 comments | Email This BlogThis! Share to X Share to Facebook |
|
-
ममता का कर्ज :-लघुकथा
Thursday, October 24, 2013
शाम अपने माता पिता का इकलौता बेटा था। जानकी और सतपाल ने लाड़ प्यार के
आँचल में ममता की छाँव तले उसे पालकर बड़ा किया , और उसकी हर आरज़ू को
पूरा करने को तत्पर रहते थे। ज्यों ज्यों शाम प्राइमरी से मिडिल, फिर
मिडिल से हाई स्कूल का फासला तय करता रहा, उसकी ख़ूबियाँ भी प्रेम का
पानी पाकर निखरती रही। शक्ल सूरत से तो वह मनमोहक था पर बुद्धिमान भी
बहुत साबित हुआ। जब वह कालेज पहुंचा तो माँ-बाप के सामने अमरिका जाकर
पढ़ने की इच्छा प्रकट की, और साथ में वह वादे भी करता रहा कि वह पढ़ाई
पूरी करते ही वापस आकर पिता के नक़्शे-क़दम पर चलकर, यहीं पर बसेरा डालकर
उन दोनों की देखभाल भी करता रहेगा। इस प्रकार माता-पिता की ममता का
क़र्ज़ भी उतारता रहेगा। उसकी मीठी बातें और सलीके दार सोच सुनकर दोनों
जानकी और सतपाल बहुत खुश हुए और अपनी तमाम उम्र की बाक़ी जमा पूँजी
लुटाकर उसे बाहर रवाना करने में मदद की। यूं वक्त आने पर अमर उनकी आँखों
में नए सपने सजाकर उनकी आँखों से दूर चला गया।
पहले शाम जल्दी-जल्दी उन्हें ख़त लिखा करता था, उन्हें अपनी पढ़ाई के
बारे में, अपने बारे में, माहौल के बारे में बताता, पर बहुत जल्द ही उन
ख़तों की रफ़्तार ढीली पड़ गयी और वक्त ऐसा आया की वासुदेव के लिखे हुए
ख़तों का जवाब आना भी बंद हो गया। यूं दो साल और बीत गए। निराशा आंखें
उठाये हर सूनी डगर पर ख़त के इंतज़ार में पथराई आँखों से निहारा करती थी।
और एक दिन डाकिया एक बड़ा सा लिफाफा उन्हें दे गया, जिसमें ख़त के
साथ-साथ कुछ फोटो भी थे। जल्दी में सतपाल ख़त पढ़ने लगा जिसको
सुनते-सुनते उसकी पत्नि जानकी वहीं बेहोश हो गयी। ये शाम की शादी के फोटो
थे जो उसने वहाँ की अंग्रेज़ लड़की के साथ कर ली थी और ख़त में लिखा था "
पिताजी हम दोनों फक़त पांच दिन के लिए आपके पास आ रहे हैं और फिर घूमते
हुए वापस लौटेंगे। एक ख़ास बात है अगर हमारे रहने का बंदोबस्त किसी होटल
में हो जाये तो बेहतर होगा। पैसों की ज़रा भी चिंता न कीजियेगा।"
यह ख़बर थी जो पढ़ने के बाद सतपाल का बदन गुस्से से थर-थर कांपने लगा,
जिसे क़ाबू में रखते हुए वह अपनी पत्नी को होश में लाने की कोशिश करता
रहा और वहीं ज़मीन पर बैठकर बच्चों की तरह रोने लगा। उम्मीदें और अरमान
सब बिखर गए, सामने उनके ममता का शीशमहल टूटा और खँडहर हो गया। जिसको अपने
लहू से सींचा, वह अपनाइयत को भूल कर गैर देश को अपना मान बैठा, वह गैरों
से भी बदतर है। ऐसा बेटा प्यार तो छोड़ो, नफ़रत के क़ाबिल भी नहीं है,
यही कुछ सोचते-सोचते आँख से आंसुओं का झरना बह निकला। दूसरे दिन सुबह तार
के ज़रिये बेटे को जवाब में लिखा " तुम्हारा हाल पढ़ा। पढ़कर जो दिल को
धक्का लगा है उसी को कम करने के लिए हम पति-पत्नी कल तीर्थों के लिए
रवाना हो रहे हैं, कब लौटेंगे पता नहीं और अब हमें किसी का इंतज़ार भी
नहीं। इसलिए तुम पराये मुल्क को अपना समझ कर नये रिशतों को निभाने की
कोशिश करना। यहाँ अब तुम्हारा अपना कोई नहीं है."...सतपाल।
--
यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story या जानकारी है
जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ
E-mail करें. हमारी Id है:kuchkhaskhabar@gmail.com.पसंद आने पर हम उसे
आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे.
www.kuchkhaskhabar.comPosted by Unknown Labels: Story, माँ | 0 comments | Email This BlogThis! Share to X Share to Facebook |
|
Showing posts with label माँ. Show all posts
Showing posts with label माँ. Show all posts
Powered by
KuchKhasKhabar.com
KuchKhasKhabar.com

