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  1. इस सॉफ्टवेर को डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें ।


  2. Touch Typing Study में आपका स्वागत है!

    http://www.typingstudy.com/hi/

    क्या आप अभी भी दो उंगलियों के साथ टाइप करते हैं? क्या आपको अभी भी
    प्रत्येक की-स्ट्रोक के साथ कीबोर्ड को देखना पड़ता है?

    आपको बता दें कि Touch Typing Study एक मुफ्त, उपयोग में आसान, सीखने की
    वेबसाइट है जो आपको आपकी टाइपिंग गति तथा शुद्धता को बेहतर करने, अभ्यास
    करने तथा सीखने में सहायता करती है।एक बार जब आप टच टाइप कर सकेंगे तो
    आपको उन वर्णों को खोजने के लिये की-बोर्ड पर देखने की जरूरत नहीं होगी
    जिनको आपको टाइप करना है और आप कहीं अधिक तेज़ गति से टाइप कर
    सकेंगे(गी)!

    टच टाइप एक ऐसी विधि है जो दृष्य की स्थान पर मांसपेशीय स्मृति पर आधारित
    है. यह विधि आपको डेटा दर्ज करने की अधिक तेज़ गति प्रदान करती है, विशेष
    रूप से जब आपको किसी दृष्य सामग्री से टेक्स्ट का ट्रांसक्रिप्शन करना
    हो.

    टच टाइपिंग विधि से टाइप करना आपकी कम्प्यूटर संबंधी उत्पादकता को काफी
    अधिक बढ़ा देता है, यह डेटा दर्ज करने की गति को बढ़ाता है और जहां तक
    संभव हो थकान और आँखों पर दबाव को कम करता है.

    टच टाइपिंग स्टडी में 15 पाठ, एक स्पीड टेस्ट और ऐसे खेल शामिल हैं जिनसे
    आप चरणबद्ध तरीके से टाइप करना सीख सकते हैं, साथ ही अपनी प्रगति को
    देखते हुये मज़े उठा सकते हैं।

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  3. 'सॉफ्टवेयर' उन प्रोग्रामों को कहा जाता है, जिनको हम हार्डवेयर पर चलाते
    हैं.किसी भी कम्प्यूटर को चलाने के लिये जो सबसे आवश्यक सॉफ्टवेयर है वह
    है ऑपरेटिंग सिस्टम. ऑपरेटिंग सिस्टम के बिना आप कम्प्यूटर में काम नहीं
    कर सकते.

    ऑपरेटिंग सिस्टम:

    ऑपरेटिंग सिस्टम व्यवस्थित रूप से जमे हुए साफ्टवेयर का समूह है जो कि
    आंकडो एवं निर्देश के संचरण को नियंत्रित करता है. आपरेटिंग सिस्टम
    हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर के बीच सेतु का कार्य करता है.कम्प्यूटर का अपने
    आप में कोई अस्तित्व नही है.यह केवल हार्डवेयर जैसे की-बोर्ड, मॉनिटर,
    सी.पी.यू इत्यादि का समूह है. आपरेटिंग सिस्टम समस्त हार्डवेयर के बीच
    सम्बंध स्थापित करता है.आपरेटिंग सिस्टम के कारण ही प्रयोगकर्ता को
    कम्प्यूटर के विभिन्न भागों की जानकारी रखने की आवश्यकता नहीं पड़ती
    है.साथ ही प्रयोगकर्ता अपने सभी कार्य तनाव रहित होकर कर सकता है.यह
    सिस्टम के संसाधनों को बांटता एवं व्यवस्थित करता है. ऑपरेटिंग सिस्टम के
    कई अन्य उपयोगी विभाग होते है जिनके कई काम केन्द्रिय प्रोसेसर द्वारा
    किए जाते है. उदाहरण के लिए आप प्रिटिंग का कोई काम करें तो केन्द्रिय
    प्रोसेसर आवश्यक आदेश देकर वह कार्य आपरेटिंग सिस्टम पर छोड देता है और
    वह स्वयं अगला कार्य करने लगता है. इसके अतिरिक्त फाइल को पुनः नाम देना,
    डायरेक्टरी की विषय सूची बदलना, डायरेक्टरी बदलना आदि कार्य आपरेटिंग
    सिस्टम के द्वारा किए जाते है.

    आज जो सबसे प्रचलित ऑपरेटिंग सिस्टम हैं वह माइक्रोसॉफ्ट कंपनी द्वारा
    बनाये गये हैं. इनमें डॉस (DOS), विंडोज-98, विंडोज-एक्स पी,
    विंडोज-विस्टा प्रमुख हैं.लेकिन इन सभी को कम्प्यूटर के साथ आपको खरीदना
    पड़ता है. यदि आप मुफ्त का ऑपरेटिंग सिस्टम प्रयोग करना चाहते हैं तो
    उसके लिये लिनक्स के कई ऑपरेटिंग सिस्टम हैं जो पूरी तरह मुफ्त हैं. इनमे
    से कई विंडोज से कई मायने में बेहतर भी हैं लेकिन इनको सीखने में थोड़ा
    ज्यादा समय लग सकता है. चुंकि अभी विंडोज ही बहु-प्रचलित ऑपरेटिंग सिस्टम
    है इसलिये हम उसी से संबंधित उदाहरणों का प्रयोग इस लेख में करेंगे.

    एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर:

    एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर आपके रोज मर्रा की जरूरत को पूरा करते हैं. जैसे यदि
    आप यदि कुछ लिखना चाहें तो उसके लिये विंडोज में नोटपैड व वर्डपैड है.
    इसके अलावा आप ओपन ऑफिस का प्रयोग कर सकते हैं जो मुफ्त है या
    माइक्रोसोफ़्ट ऑफिस खरीद सकते हैं जिसमें से आप माइक्रोसॉफ्ट वर्ड का
    उपयोग लिखने के लिये कर सकते हैं. इसके अलावा आप डाटा के
    गणितीय,सांख्यिकीय उपयोग के लिये माइक्रोसॉफ्ट एक्सल और प्रजेंटेशन बनाने
    के लिये पावर पॉइंन्ट का उपयोग कर सकते हैं.किसी भी प्रकार की ड्राइग के
    लिये विंडोज में पेन्ट नाम का सॉफ्टवेयर होता है यदि आपको एडवांस ड्राइंग
    करनी है तो आप गिम्प (GIMP) का प्रयोग कर सकते हैं जो कि मुफ्त है या फिर
    अडोब कंपनी का फोटोशॉप सॉफ्टवेयर खरीद सकते हैं.

    http://hi.wikipedia.org/s/1rds
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  4. ऐसा अकसर होता है जब आप नहीं चाहते हैं कि आपके पर्सनल कंप्यूटर या
    लैपटॉप को कोई दूसरा हाथ लगाए। इसके लिए आप हर समय आपने कंप्यूटर या
    लैपटॉप के पास भी नहीं बैठ सकते हैं।

    ऐसे में आप आपने कंप्यूटर को पासवर्ड लॉक के जरिए सुरक्षित रख सकते हैं।
    कंप्यूटर पासवर्ड लॉक बनाने कोई मुश्किल की बात नहीं हैं।

    अगर आप विंडोज कंप्यूटर इस्तेमाल कर रहे हैं तो निम्न स्पेट को पूरा करके
    आप कंप्यूटर पासवर्ड बना सकते हैं।

    1 सबसे पहले START बटन पर क्लिक करें। यहां आपको दाएं ओर control panel
    का ऑप्‍शन दिखाई देता हैं।

    अगर control panel ऑप्‍शन दिखाई नहीं देता है तो आप इसको सर्च ऑप्‍शन में
    जाकर खोज भी सकते हैं।

    2 control panel में जाने के बाद User Account and Family Safety पर क्लिक करें।

    3 यहां आपके सामने User Account विकल्प दिखाई देगा। इस पर क्लिक करें।

    4 User Account पर क्लिक करते ही आपके सामने Change password, Remove
    password, Change your Account picture और Change your Account name
    ऑप्‍शन दिखाई देते हैं।

    5 Change password पर क्लिक करें। इसके बाद आपके सामने पासवर्ड बनाने का
    ऑप्‍शन खुला जाता है। यहां आप अपना पासवर्ड बना सकते हैं।

    इस खबर पर प्रतिक्रिया देने के लिए नीचे के बॉक्स में कमेंट करें, शेयर
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  5. Computer security एक कम्प्यूटर वायरस एक कंप्यूटर प्रोग्राम (computer
    program)है जो अपनी अनुलिपि कर सकता है और उपयोगकर्ता की अनुमति के बिना
    एक कंप्यूटर को संक्रमित कर सकता है और उपयोगकर्ता को इसका पता भी नहीं
    चलता है.विभिन्न प्रकार के मैलवेयर (malware) और एडवेयर (adware)
    प्रोग्राम्स के संदर्भ में भी "वायरस" शब्द का उपयोग सामान्य रूप से होता
    है, हालाँकि यह कभी-कभी ग़लती से भी होता है.मूल वायरस अनुलिपियों में
    परिवर्तन कर सकता है, या अनुलिपियाँ ख़ुद अपने आप में परिवर्तन कर सकती
    हैं, जैसा कि एक रूपांतरित वायरस (metamorphic virus) में होता है.एक
    वायरस एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में तभी फ़ैल सकता है जब इसका होस्ट
    एक असंक्रमित कंप्यूटर में लाया जाता है, उदाहरण के लिए एक उपयोगकर्ता के
    द्वारा इसे एक नेटवर्क या इन्टरनेट पर भेजने से, या इसे हटाये जाने योग्य
    माध्यम जैसे फ्लॉपी डिस्क (floppy disk), CD (CD), या USB ड्राइव (USB
    drive)पर लाने से. इसी के साथ वायरस

    एक ऐसे संचिका तंत्र या जाल संचिका प्रमाली (network file system) पर
    संक्रमित संचिकाओं के द्वारा दूसरे कम्पूटरों पर फ़ैल सकता है जो दूसरे
    कम्प्यूटरों पर भी खुल सकती हों.कभी कभी कंप्यूटर का कीड़ा (computer
    worm) और ट्रोजन होर्सेस (Trojan horses) के लिए भी भ्रम पूर्वक वायरस
    शब्द का उपयोग किया जाता है.एक कीडा अन्य कम्प्यूटरों में ख़ुद फैला सकता
    है इसे पोषी के एक भाग्य के रूप में स्थानांतरित होने की जरुरत नहीं होती
    है, और एक ट्रोजन होर्स एक ऐसी फाईल है जो हानिरहित प्रतीत होती है.कीडे
    और ट्रोजन होर्स एक कम्यूटर सिस्टम के आंकडों, कार्यात्मक प्रदर्शन , या
    कार्य निष्पादन के दौरान नेटवर्किंग को नुकसान पहुंचा सकते हैं.सामान्य
    तौर पर , एक कीड़ा वास्तव में सिस्टम के हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर को
    नुकसान नहीं पहुंचाता , जबकि कम से कम सिद्धांत रूप में , एक ट्रोजन
    पेलोड, निष्पादन के दोरान किसी भी प्रकार का नुकसान पहुँचने में सक्षम
    होता है. जब प्रोग्राम नहीं चल रहा है तब कुछ भी नहीं दिखाई देता है
    लेकिन जैसे ही संक्रमित कोड चलता है, ट्रोजन होर्स प्रवेश कर जाता है.यही
    कारण है कि लोगों के लिए वायरस और अन्य मैलवेयर को खोजना बहुत ही कठिन
    होता है और इसीलिए उन्हें स्पायवेयर प्रोग्राम और पंजीकरण प्रक्रिया का
    उपयोग करना पड़ता है.

    आजकल अधिकांश व्यक्तिगत कंप्यूटर इंटरनेट और लोकर एरिया नेटवर्क से जुड़े
    हैं और लोकल एरिया नेटवर्क (local area network), दूषित कोड को फैलाने की
    प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाता है.आज का वायरस नेटवर्क सेवाओ का भी लाभ
    उठा सकता है जैसे वर्ल्ड वाइड वेब, ई मेल, त्वरित संदेश (Instant
    Messaging) और संचिका साझा (file sharing) प्रणालियां वायरसों और कीडों
    को फैलने में मदद करती हैं.इसके अलावा , कुछ स्रोत एक वैकल्पिक शब्दावली
    का उपयोग करते हैं, जिसमें एक वायरस स्व-अनुलिपि करने वाले मैलवेयर
    (malware) का एक रूप होता है.

    कुछ मेलवेयर, विनाशकारी प्रोग्रामों, संचिकाओं को डिलीट करने, या हार्ड
    डिस्क की पुनः फ़ॉर्मेटिंग करने के द्वारा कंप्यूटर को क्षति पहुचाने के
    लिए प्रोग्राम किए जाते हैं.अन्य मैलवेयर प्रोग्राम किसी क्षति के लिए
    नहीं बनाये जाते हैं, लेकिन साधारण रूप से अपने आप को अनुलिपित कर लेते
    हैं औए शायद कोई टेक्स्ट, वीडियो , या ऑडियो संदेश के द्वारा अपनी
    उपस्थिति को दर्शाते हैं.यहाँ तक की ये कम अशुभ मैलवेयर प्रोग्राम भी
    कंप्यूटर उपयोगकर्ता (computer user) के लिए समस्याएँ उत्पन्न कर सकते
    हैं..वे आमतौर पर वैध कार्यक्रमों के द्वारा प्रयोग की जाने वाली
    कम्प्यूटर की स्मृति (computer memory) को अपने नियंत्रण में ले लेते
    हैं.इसके परिणामस्वरूप , वे अक्सर अनियमित व्यवहार का कारण होते हैं और
    सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं.इसके अतिरिक्त , बहुत से मैलवेयर बग (bug)
    से ग्रस्त होते हैं , और ये बग सिस्टम को नुक्सान पंहुचा सकते हैं या
    डाटा क्षति (data loss) का कारण हो सकते हैं.कई सीआईडी प्रोग्राम ऐसे
    प्रोग्राम हैं जो उपयोगकर्ता द्वारा डाउनलोड किए गए हैं और हर बार पॉप अप
    किए जाते हैं.इसके परिणाम स्वरुप कंप्यूटर की गति बहुत कम हो जाती है
    लेकिन इसे ढूंढ़ना और समस्या को रोकना बहुत ही कठिन होता है.

  6. अब अपने चेहरे को बना सकते है आप अपने कंप्यूटर का पासवर्ड इस मुफ्त औजार
    की सहायता से ।

    उपयोग में आसान बस एक बार अपने चेहरे को इसमें रजिस्टर कर दीजिये और अगली
    बार बस अपने कंप्यूटर को देखकर ही लोगिन कीजिये ।

    इसके उपयोग के लिए आपके कंप्यूटर पर वेबकैम और विंडोज विस्टा या विंडोज
    सेवन इन्स्टाल होना जरुरी है . लैपटॉप उपयोगकर्ताओं के लिए विशेष उपयोगी
    अपने कंप्यूटर को सुरक्षित करने के लिए इसका प्रयोग कर सकते हैं ।

    इसे डाउनलोड करने यहाँ क्लिक करें ।
    http://www.luxand.com/download/LuxandBlinkSetup.exe

  7. क्या आप जानते हैं बिल गेट्स कौन है? क्या आप जानते हैं जॉब स्टीव्स कौन
    है? आप जरूर जानते होंगे क्योंकि दोनों ही व्यक्ति अपने अपने क्षैत्र में
    काफी सफलता अर्जित कर चुके हैं और सुर्खियों में बने रहते हैं. लेकिन कुछ
    लोग ऐसे होते हैं जो गुमनामी में रहना पसंद करते हैं और एक दिन दुनिया
    उन्हें भूल जाती है. तब यह मायने नहीं रखता कि उन्होनें तकनीक या अन्य
    किसी भी क्षैत्र में कितना बड़ा योगदान दिया था.

    ऐसे ही एक व्यक्ति थे डॉ. ई. एडवर्ड रोबर्टस. डॉ. रोबर्ट्स आधुनिक निजी
    कम्प्यूटर के जनक थे. हाल ही में 68 वर्ष के डॉ. रोबर्ट्स का निधन
    न्यूमोनिया की वजह से हुआ. लेकिन बहुत कम तकनीकविदों और इस क्षैत्र से
    जुड़े लोगों ने उनको याद किया. एकमात्र बिल गेट्स उनसे मिलने पहुँचे और
    उनके आखिरी समय पर वे उनके पास ही थे.

    कौन थे डॉ. रोबर्टस?

    डॉ. रोबर्ट्स ने आधुनिक कम्प्यूटिंग तकनीक को विकसित करने में महत्वपूर्ण
    योगदान दिया था. उस जमाने में बड़े कम्प्यूटर मशीन हुआ करती थी. डॉ.
    रोबर्ट्स ने एक माइक्रोकम्प्यूटर बनाने की सोची जिसे कोई भी व्यक्ति
    इस्तेमाल कर सके. उन्होनें 70 के दशक के मध्य में MITS Alter नाम का
    माइक्रो कम्प्यूटर बनाया जो कम खर्चीला था और उसे विभिन्न कार्य करने के
    लिए प्रोग्राम किया जा सकता था. उनकी इस उपलब्धि को कई इतिहासकार पर्सनल
    कम्प्यूटर के विकास की पहली कड़ी मानते हैं. कई इतिहासकारों का मानना है
    कि उस जमाने का माइक्रोकम्प्यूटर पहला निजी कम्प्यूटर कहा जा सकता है. इस
    लिहाज से डो. रोबर्ट्स को यदि निजी कम्प्यूटर का जनक कहा जाए तो गलत नहीं
    होगा.

    बिल गेट्स और उनके साथी पॉल एलन ने कभी इस इस प्रोजेक्ट पर काम किया था.
    बल्कि इन दोनों ने यहीं से अपने कैरियर की शुरूआत भी की थी. बाद में
    दोनों ने डॉ. रोबर्ट्स की दुकान पर काम भी किया था. और आगे चलकर अपनी राह
    अलग की और माइक्रोसोफ्ट का जन्म हुआ.

    डॉ. रोबर्ट्स ने जब माइक्रो कम्प्यूटर बनाया, उस जमाने में इस तरह के
    कम्प्यूटर मौज शौख की वस्तु हुआ करते थे और लोगों ने यह समझा ही नहीं था
    कि इस डिवाइज का कितना व्यापक इस्तेमाल किया जा सकता है. डॉ. रोबर्ट्स को
    भी यह सम्भावना दिखाई नहीं दी. उन्होनें इस क्षैत्र को त्याग दिया और
    अपने चिकित्सा के व्यवसाय में लौट गए.

    उन्होनें ज्योर्जिया में मेडिकल प्रेक्टिस शुरू की और बाद में तकनीक की
    दुनिया से अलग होते चले गए. लोगों ने भी इनको भूलना शुरू कर दिया. इसलिए
    जब डॉ. रोबर्ट्स की मृत्यु हुई तब उनके पास उनके परिवार वाले ही थे, और
    हाँ बिल गेट्स भी.

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